पूछता है देश: क्या अमेरिका को चीन पर हमला नहीं कर देना चाहिए ?

ऐसा होना चाहिये ताकि आगे इस तरह चीन के जहरीले मन्सूबे कामयाब न हो सकें और उसे पता चले कि उसकी नीयत से दुनिया वाकिफ है..

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अमेरिका को चीन पर हमला करना चाहिए -सभी मित्र देश और यूरोपियन देश साथ हों -चीन के जैविक युद्ध का उत्तर देना होगा.
वर्ष 2003 में अमेरिका ने इराक के कथित जैविक हथियारों को बाहर निकाल कर नष्ट करने के लिए उस पर हमला किया था और 6 महीने में सद्दाम हुसैन को बंदी बना लिया था.
अब चीन ने 2019 से कोरोना वायरस के जरिये विश्व को एक जैविक युद्ध में धकेल दिया है जिसकी वजह से करीब 16.74 करोड़ लोग कोरोना के शिकार हुए और 3.47 करोड़ लोग मारे गए.
चीन का लक्ष्य ये जैविक युद्ध छेड़ कर दुनियां के अधिकतर देशों पर कब्ज़ा करने का था –चीन ने 150 से ज्यादा देशों को 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज दिया हुआ है.
चीन की सोच थी कि कर्ज में डूबे सभी देश जब ख़राब आर्थिक स्थिति होने के कारण कर्ज नहीं लौटा पाएंगे, तब वो उन पर कब्ज़ा कर लेगा.
चीन के जैविक हथियारों के बारे पुष्टि खुद चीन के रिसर्च पेपर्स में की गई है, कल ही अमेरिकन ख़ुफ़िया विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि नवम्बर,19  में ही वुहान लैब के वैज्ञानिक कोरोना की चपेट में आ गए थे मगर चीन ने सब कुछ WHO से छुपा लिया.
चीन ने अपने देश में किसी बाहरी देश या WHO को भी किसी तरह से पूरी जांच नहीं करने दी और जो भी चीन में इस वायरस के लिए बोला, उसे मार दिया गया.
लेकिन चीन को सबसे बड़ी चुनौती भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी जब देश में आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया गया –ये विश्व के सभी देशों के लिए भी मार्ग दर्शन था.
इस संकल्प को तोड़ने के लिए चीन ने नया म्यूटेंट मार्च में भारत में छोड़ दिया और इसका भी खुलासा खुद चीन सरकार के पेपर्स में किया गया.
चीन अपने देश में सब कुछ गुप्त रखता है मगर लोकतांत्रिक देशों में लोकतंत्र का फायदा उठाता है – ये उसने अमेरिका में किया और भारत  में कांग्रेस और मीडिया के साथ मिल कर मोदी को उखाड़ने का खेल खेला.
मुझे लगता है हमारी कांग्रेस की तरह चीन ने हर देश के राजनितिक दलों से MOU किये हुए हैं.
आज चीन ने एक वायरस के जरिये दुनिया में हाहाकार मचाया है और कल किसी और वायरस के जरिये करेगा – इस तरह चीन कभी विश्व की आर्थिक स्थिति सुधरने नहीं देगा.
इसलिए अमेरिका को मित्र देशों और यूरोपियन यूनियन के सभी देशों सहित विश्व के अन्य देशों के साथ मिल कर गंभीरता से इस चिन्ता पर गहन विचार-विमर्श करना चाहिए और उसके बाद मिल कर ही चीन पर हमला भी करना चाहिए.
चीन के ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका को धमकी दी है कि अगर युद्ध किया तो हार जाओगे -ऐसी धमकी वो देश ही दे सकता जिसकी खुद की हालत सीधे युद्ध में सामना करने की नहीं होती है .
पाकिस्तान के बाद अब चीन भी परोक्ष युद्ध (Proxy War) ही करना चाहता है जिस पर अमेरिका और सभी देशों को नजर भी रखनी चाहिये और लगाम भी लगानी चाहिए.
मगर चीन को एक बात याद रहनी चाहिए, जो कोई भी दूसरों के लिए गड्ढा करता है और विध्वंस की योजना बनाता है, कभी कभी कुदरत उसके साथ अपनी तरह से न्याय कर देती है- ये न्याय चीन के साथ भी अवश्यमेव होगा.
(सुभाष चन्द्र)

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