पूछता है देश: क्या आज के निन्दकों को नियर रखा जा सकता है?

निंदक ठोक के राखिये, आँगन आग लगाय.. जैसे मर्जी जतन करो, आग न बुझने पाय" - ये वाला जमाना आ गया है और वो कबीर वाला जमाना गया..

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निंदक ठोक के राखिये, आँगन आग लगाय.. जैसे मर्जी जतन करो, आग न बुझने पाय” – ये वाला जमाना आ गया है और वो कबीर वाला जमाना गया.
एक सज्जन जो किसी अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर मुझे पाठ पढ़ाते हैं और मोदी जी के लिए कहते हैं कि उन्हें अपनी निंदा करने वालों की बात सुननी चाहिए और उसके लिए वो कबीर का दोहा सुनाते है-
“निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय”
ये ऐसे उपदेश केवल मोदी के लिए दिए जाते हैं जबकि ये सबके लिए कहा गये हैं मगर किसी और को ध्यान देने के लिये नहीं कहे जाते.
जबकि सच तो ये है कि मोदी अपनी आलोचना का स्वागत करते हैं मगर आज जो उनके निंदक हैं, उनका बस चले तो मोदी का तख्ता एक मिनट में पलट दें.
आखिर निंदक कौन होता है जिसे करीब रखना चाहिए–क्या सुबह से शाम तक मोदी को गाली बकने वाले राहुल गाँधी और उसके साथी निंदक हैं?
कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत अपने ट्वीट में मोदी के लिए कह रही है -“अबकी
बार अंतिम संस्कार” –क्या ये निंदक है?
इस महिला की तरह मोदी की मौत चाहने वाले बहुत हैं, क्या वो निंदक हैं जिन्हें मोदी को गले लगाना चाहिए;
–कथित किसानों के आंदोलन में पंजाब की महिलाओं ने छातियां पीट पीट कर गाया था –मोदी मर जा मर जा तू –वो
क्या निंदक थींय़
एक सरदार जी कह रहे थे –इमरान हमारा भाई है, दुश्मन दिल्ली बैठा है (मोदी) – ऐसा कहने वाला क्या निंदक हो सकता है जिसे गले लगाने लायक माना जाये?
मोदी के किस निंदक को अपने साथ नहीं रखा और किसी को कुछ नहीं कहा, यकीन न हो तो पूछ लो शत्रुघ्न सिन्हा, अरुण शौरी,यशवंत सिन्हा, नवजोत सिद्धू, कीर्ति आज़ाद और अन्य बहुत से लोगों से, जिनमे अब सुब्रमनियन स्वामी भी जुड़ गये हैं.
कितनी विदेशी शक्तियों से मोदी लड़ रहा है और अगर चौकन्ना न रहता अब तक तो उखाड़ दिया जाता.
लोग ये कहावत बड़े गर्व से दूसरों के लिए कह देते हैं मगर उनकी जाती जिंदगी में जब कोई उन्हें निंदक मिलता है, तो उन्हें लगता है कि मौका मिलने पर वो उनकी टांग खींच लेगा और इसलिए वो उसे
करीब रखने की बजाय, सबसे पहले उसे रास्ते से हटा देते हैं.
निंदक को साथ रखने की सीख कभी सोनिया जी को दे कर देखो, उनके खिलाफ बोलने वाला एक पल पार्टी में नहीं रहता –जिहादी आतंकी तो किसी को जीने ही नहीं देते -और किसी किसी धर्म के लोग तो अपने निंदकों का धर्म परिवर्तन ही करा देते हैं.
इसलिए कहा गया है कि -” पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जे आचरहिं ते नर न घनेरे” दूसरों को उपदेश देना बहुत सरल है पर खुद उस पर अमल नहीं कर सकते.
इसलिए मेरा मानना है कि जब कबीर जी ने लिखा था तब निंदकों की पहचान कुछ और होती थी जो आज नहीं है –
आज के युग में मेरे विचार से सही दोहा है.
“निंदक ठोक के राखिये, आँगन आग लगाय
जैसे मर्जी जतन करो, आग ना बुझने पाय”
आज के युग में निंदक को पहचानिये, कहीं मौका मिलते ही आपके घर में आग ना लगा दे –ये आज सनातन धर्म की रक्षा के सबसे बड़ा “रक्षा सूत्र” है .
(सुभाष चन्द्र)

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