पूछता है देश: क्या गांधी की पोती को भारत में इतनी जल्दी सजा हो सकती थी?

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गाँधी की परपोती को डर्बन में सजा -क्या भारत में हो सकती थी ? यहां ट्रायल कोर्ट ही 15 साल लगा देता..
आज शाम से एक खबर वायरल हो गई जिसमें बताया गया कि साउथ अफ्रीका के डर्बन की एक अदालत
ने गाँधी जी की 56 वर्षीय परपोती आशीष लता रामगोबिन को 7 साल की सजा सुनाई है.
आशीष पर एक बिजनेसमैन एसआर महाराज को 3 करोड़ 22 लाख की धोखाधड़ी का आरोप था जिसके लिए वो 2015 से जमानत पर थी.
आशीष लता मशहूर एक्टिविस्ट इला गाँधी और दिवंगत मेवा रामगोबिन की बेटी हैं –इला जी को भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों ही देशों में राष्ट्रीय सम्मान प्रदान चुके हैं.
सवाल ये उठता है कि अगर गाँधी जी की परपोती का केस भारत में चल रहा होता तो क्या सजा होती सकती थी -यहां के लचर कानून के चलते ट्रायल कोर्ट ही 15 साल लगा देता और तब आशीष की उम्र 71 साल हो जाती.
फिर हो सकता है, या तो ट्रायल कोर्ट सबूतों के अभाव में बरी कर देता या 3 साल की सजा दे कर तुरंत ही बेल दे दी जाती -जैसे हाल ही में तरुन तेजपाल को 8 साल के बाद बरी कर दिया.
फिर अपील पर फैसला हाई कोर्ट को करने में 5 साल लगते और यदि सजा कायम रहती तो सुप्रीम कोर्ट 5 साल और लगा देता –तब लता की आयु हो जाती 81 वर्ष –फिर सजा कैसी होती, हॉस्पिटल में ही रहती.
सलमान खान के एक केस में 20 साल हो गए, ट्रायल कोर्ट से फैसला नहीं हुआ, दूसरे केस में सड़क पर लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए गैर इरादतन हत्या के आरोप में बरी हो गए.
अब सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र सरकार की अपील लिए बैठा है 5 साल से -कोरोना की सुनवाई दौड़ दौड़ कर रोज करते हैं मगर सलमान मौज में है –और क्या फैसला होगा, अनुमान लगा सकते हो
लालू को साढ़े 27 साल की सजा के बाद भी वो मौज में है –भला कभी हो सकता है कि अस्पताल में बिताये हुए समय को सजा का भुगतना मान लिया गया –लालू की पहली सजा के खिलाफ अपील 2013 में दायर हुई थी मगर अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हुई.
अनेक मसले मिलेंगे जिनके फैसले ही नहीं होते और सजा होती है तो उम्र के कारण जेल नहीं जाते अभियुक्त हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री सुखराम ऐसे ही व्यक्तियों में एक हैं.
नेशनल हेराल्ड के भवन के अधिग्रहण के केस में, 4 महीने में दिल्ली हाई कोर्ट की 2 बेंचों ने फैसला कर दिया मगर सुप्रीम कोर्ट ने 2 साल से सुनवाई नहीं की.
इसलिए ऐसा माना जा सकता है कि महात्मा गाँधी की परपोती होने की वजह से ही काम हो जाता –यहां तो बड़े बड़े लोग बच निकलते हैं.
(सुभाष चन्द्र)

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