कृषि कानून वापसी के एलान से विधानसभा चुनाव में मोदी का मास्टर स्ट्रोक, पंजाब से यूपी तक बदलेंगे समीकरण

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प्रकाश पर्व पर मोदी सरकार के मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष चारों खाने चित्त हो गया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया. किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने से पहले ही पीएम ने नाराज किसानों का घर जाने का रास्ता साफ कर दिया तो वहीं चुनाव से पहले कई राज्यों में चुनावी समीकरण भी बदल दिया. पंजाब, हरियाणा के साथ ही यूपी में भी बीजेपी की मुश्किलें कम होंगी. कानून की वापसी के फैसले को बीजेपी देशहित में लिया गया फैसला बता रही है. इसके साथ ही बीजेपी ने थैंक्यू मोदी का कैंपेन शुरू कर दिया है.

पंजाब में बीजेपी की होगी वापसी

प्रधानमंत्री ने श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव पर कृषि कानून को वापस लेकर सिखों को भावनात्मक तौर पर बीजेपी के साथ जोड़ने की कोशिश की है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इसे बीजेपी के मास्टर स्ट्रोक के तौर पर भी देखा जा रहा है. कृषि कानून की वजह से अपनी पुरानी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ टूटे रिश्ते को बीजेपी एक फिर से गठबंधन कर जोड़ने का काम कर सकती है. संभावना इस बात की भी है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं. यदि ऐसा हुआ तो चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है.

पश्चिमी यूपी में बदले समीकरण   

कृषि कानूनों से नाराज किसानों ने पश्चिमी यूपी में बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी थी. चुनावी सरगर्मी में डूबे सबसे बड़े राज्य यूपी में बीजेपी को सबसे ज्यादा किसानों की नाराजगी झेलनी पड़ रही थी. लखीमपुर-खीरी की घटना के बाद से यह मसला और गरमा गया था. तो वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने भी यहां पर माहौल को बीजेपी के खिलाफ बनाकर रखा. लेकिन कानून वापस लेकर बीजेपी एसपी और आरएलडी को तगड़ा झटका दे दिया है. दोनों को उम्मीद थी आगमी चुनाव में किसानों की नाराजगी का फायदा सत्ता वापसी के लिए मिलेगा. पिछले चुनावों में बीजेपी को पश्चिमी यूपी में ही सबसे बड़ी जीत मिली थी एसे में बीजेपी ने बूथ कॉन्फ्रेंस की जिम्मेदारी अमित शाह को सौंप दी है.

हरियाणा में खट्टर सरकार को मिलेगी मजबूती

किसान आंदोलन की आंच में हरियाणा भी जल रहा था. हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार को भी बड़े संकट का सामना करना पड़ रहा था. यहां पर बीजेपी नेताओं के काफिले पर हमले और गांवों में एंट्री पर बैन तक झेलना पड़ रहा था. लेकिन कृषि कानून की वापसी से खट्टर सरकार को नाराजगी से छुटकारा मिलेगा. साथ ही किसानों की नाराजगी की वजह से बीजेपी से कतरा रही सहयोगी दल जननायक जनता पार्टी के नेताओं की चिंता भी कम होगी. क्योंकि उनका बड़ा जनाधार जाटों के बीच ही था, जिसे कृषक समुदाय माना जाता है.

अगले साल पांच राज्यों यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में चुनाव हैं. बीजेपी नेताओं का मानना है कि यह फैसला पंजाब, यूपी के साथ उत्तराखंड में भी गेमचेंजर साबित होगा. तो वहीं विपक्ष इसे सरकार की नाकामी और किसानों की जीत बताकर भुनाने की कोशिश कर रही है. ये पहली बार है जब मोदी सरकार ने कोई कानून बनाया, और उसे अपने कार्यकाल में ही खत्म करना पड़ा. लेकिन कहा जा रहा है कि इसका फायदा बीजेपी को आगामी चुनाव में मिलेगा.

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