उन्नाव कांड: सुप्रीम कोर्ट के सख्त फैसले की 10 बड़ी बातें

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    उन्नाव रेप केस और पीड़िता के साथ हुई सड़क दुर्घटना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बरती है. सुप्रीम कोर्ट में गुरूवार को इस मामले में तीन बार सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने इस मामले में 7 दिन में जांच और 45 दिन में फैसला करने का आदेश दिया है. उन्नाव कांड के मामले में कोर्ट के ‘सुप्रीम’ न्याय से पीड़िता के परिवारवालों में इंसाफ़ की उम्मीद जगी है.

    ‘सुप्रीम’ न्याय की 10 बड़ी बातें

    1-उन्नाव रेप कांड से जुड़े सभी पांच केस लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किए गए

    2-पीड़िता के एक्सीडेंट के मामले की जांच सीबीआई को सात दिन में पूरी करनी होगी.

    3-पीड़िता के परिवार को CRPF की सुरक्षा दी जाएगी और पीड़िता के वकील को भी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी

    4-यूपी की योगी सरकार को पीड़िता के परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवज़ा देने का आदेश

    *पीड़िता के वकील को भी 20 लाख रुपये का अंतरिम मुआवज़ा देने का आदेश दिया है

    *सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ शब्दों में यूपी सरकार को आर्थिक मदद 2 अगस्त तो मुहैया कराने का आदेश दिया

    5-पीड़िता को लखनऊ के अस्पताल से दिल्ली में एम्स शिफ्ट करने की तैयारी करने को कहा.

    *सुप्रीम कोर्ट ने परिवार से पूछकर पीड़िता को शिफ्ट करने पर फैसला लेने को कहा

    6-रेप पीड़िता की कार और ट्रक की टक्कर के मामले की जांच सीबीआई को 7 दिनों में पूरी करने का आदेश दिया है

    7-उन्नाव कांड से जुड़े ट्रायल को 45 दिन में पूरा किया जाए.

    *इन सभी मुकदमों के जज भी सुप्रीम कोर्ट तय करेगा

    8-चीफ जस्टिस ने पूछा कि अगर पीड़िता के चाचा को जेल से शिफ्ट किया जाना है तो बताएं और रिपोर्ट दें

    9-अगर पीड़िता को कोई भी शिकायत करनी हो तो वो सीधा सुप्रीम कोर्ट के पास आए.

    10-सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि 1 अगस्त को जो आदेश पारित किए गए हैं उनमें किसी भी प्रकार के बदलाव या वापस लेने के अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा.

    *सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की बात सुनें बिना ये आदेश इसलिए लिया जा रहा है ताकि केस की सुनवाई में तेजी आ सके. सुप्रीम कोर्ट ने इसके अलावा चीफ जस्टिस तक पीड़िता की चिट्ठी न पहुंचने के मामले में भी सख्ती दिखाई है. चीफ जस्टिस ने इस मामले में जांच के आदेश दिए कि आखिर काफी दिनों पहले लिखी गई चिट्ठी उन तक क्यों नहीं पहुंची?

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