आगस्ता वेस्टलैंड का सावन और माँ-बेटे को रैनकोट पहनाने में जुटे कांग्रेसी

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वर्ष 2018 का सुभाष चंद्र जी का अंतिम लेख 

आगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में मिसेज गाँधी, इटैलियन लेडी का बेटा, और वो अगला प्रधानमंत्री होगा – जैसे शब्द मिशेल के मुख से पूछताछ में सामने आने के बाद  सदमे में आये कांग्रेस के नेता माँ-बेटेको अब रैनकोट पहनाने में लगे हैं. 

उस समय के रक्षामंत्री अंटोनी कह रहे हैं कि गाँधी परिवार का सौदे में कोई दबाब नहीं था –तो भाई साहब ये बता दो फिर मिशेल ने कांग्रेस के किस “शीर्ष नेतृत्व” की बात की है अपने पत्र में -क्या माँ-बेटे केअलावा भी किसी और के हाथ में कांग्रेस की सत्ता थी जिसने हेलीकाप्टर सौदे के लिए 
दबाब डाला था?

फिर किस इटैलियन लेडी और उसके किस बेटे की बात कर रहा है मिशेल और किसे वो अगला पीएम बता रहा है – भारत की जनता सब समझ रही है. 

उधर माँ-बेटे का नाम मिशेल के मुंह से सुन कर चिदम्बरम भी खासा परेशान हैं –क्या उन दोनों के तार पीसी से भी जुड़ने वाले हैं ? पीसी ने कहा है — यदि सरकार, ई डीऔर मीडिया का बस चले तो इस देश में मामलों की सुनवाई टी वी चैनलों पर ही होने लगेगी.

चिदम्बरम ने आगे कहा –“ये सब कंगारू अदालतों से भी आगे निकल  गए हैं — कानून के विशेषज्ञ चिदंबरम को पता होगा ही कि कंगारू अदालत कुछ लोगों के समूह द्वारा लगाईं जाने वाली अनाधिकृत अदालते होती हैं जो बिना किसी प्रमाण के किसी को दोषी या अपराधी ठहराने का काम करती हैं.”

चिदम्बरम को अब याद आ रहा है मीडिया ट्रायल क्या होता है जबकि  अधिकांश मीडिया-मंच अभी भी कांग्रेस के कब्जे में ही हैं. पीसी को याद रखना चाहिए कि अभी 2 दिन पहले सोहराबुद्दीन मामले का फैसला सुनाने वाले जज एसजे शर्मा ने क्या कहा –कि “उस मामले में सी बी आई नेताओं को 
फ़साना चाहती थी.”

जांच राजनीति से प्रेरित थी और सीबीआई जांच के नाम पर कुछ और ही कर रही थी. उसके पास पूर्व नियोजित और पूर्व निर्धारित थियोरी थी” –कौन नहीं जानता चिदंबरम जी, आपका मकसद मोदी और अमित शाह को फ़साना था और आपका क्रीत-मीडिया लगातार उनका मीडिया ट्रायल कर रहा था. यहाँ याद दिलाना होगा कि  पूर्व डीजीपी बंजारा के अनुसार तो –अगर सोहराबुद्दीन नहीं मारा जाता तो वो मोदी की हत्या कर देता!

आज चिदंबरम को जांच एजेंसी सीबीआई और ईडी पर शक हो रहा है –उनको  याद तो होगा ही कि किस तरह साधवी प्रज्ञा, असीमानंद और पुरोहित को फंसा कर जेल में ठूंसकर कांग्रेस सरकार ने उन्हें यातनाएं दी थीं और मीडिया ट्रायल करके उन्हें अपराधी दिखा दिया था.

आज चिदंबरम पर कानून की तलवार लटकी है तो उन्होंने देश की माननीय न्यायालयों को कंगारू अदालतों से भी गया गुजरा बताना पड़ रहा है. वे अच्छी तरह जानते हैं कि यह न्यायपालिका का शुद्ध अपमान है और उन पर मुकदमा भी हो सकता है. दुनिया देख रही है कि खुद आप भी अदालतों की मदद से  रैनकोट पहने हुए हो और अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं. आज अगर मिशेल की सुनवाई कर रही अदालत को आप “अनाधिकृत” की उपमा देने वाले चिदंबरम को बताना चाहिये कि जो अदालत उनकी गिरफ़्तारी रोके हुए हैं, वो कैसी अदालतें है ?

(सुभाषचन्द्र)


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