इसलिए मोदी को हटाने के लिए बना रहे हैं “महागठबंधन”

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आतंकी हमलों से दहल उठे देश –कांग्रेस / वामपंथी साजिश है – इसलिए मोदी को हटाने के लिए बना रहे हैं “महागठबंधन”

देश को आतंकी हमलों से दहलाने की और गृहयुद्ध करवाने की,कांग्रेस और वामपंथियों की साजिश सामने आ रही है –NIA ने 26 दिसंबर 2018 को आतंक के पनप रहे मॉडूयल को ध्वस्त कर बहुत ही सराहनीय कार्य किया है –मगर अफ़सोस है कि कुछ लोग मोदी को 2019 के चुनाव में “सबक” सिखाने की फिराग में हैं -इस साजिश का पर्दाफाश होने के पीछे कई प्रश्न हैं, जिन पर विचार 
किया जाना जरूरी है —

2 दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपनी टिपण्णी में माना है कि “भीमाजी कोरेगाव बहुत गहरी साजिश है जिसकी सम्पूर्ण जांच जरूरी है” –इस साजिश में कांग्रेस और कम्युनिस्ट दोनों बराबर के भागीदार हैं और जब “शहरी नक्सल” पकड़ में आये तो ये ही लोग छातियाँ पीटते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए –दुर्भाग्य से अदालत भी उनके बचाव में खड़ी हो गई और “शहरी नक्सल” की सोच को “असहमति” बता कर उनकी गिरफ़्तारी रोक दी –मतलब प्रधानमंत्री की हत्या करने की भी 
छूट है “असहमति” रखने वालों को –

अब देखिये कांग्रेस पूरी तरह पाकिस्तान की भाषा बोलती है और आतंकियों का समर्थन करती है, कल उसके कश्मीर के नेता हाजी सगीर खान ने कांग्रेस की सरकार बनने पर मरने वाले आतंकियों के परिवारों को एक एक करोड़ मुआवजा देने की बात कही –कांग्रेस ने पहले ये उसका निजी बयान बताया लेकिन अब पार्टी से निकाल दिया –मगर ये बात यह दर्शाती है कि पार्टी में सोच क्या है –

एक हफ्ते पहले हाफिज सईद ने एक इंटरव्यू में 3 बार अल्लाह का नाम और 17 बार मोदी का नाम लेते हुए शायद कल 26 दिसंबर 2018 को ध्वस्त हुए मॉडूयल को ध्यान में रख कर ही कहा था –अबकी बार हम हिंदुस्तान के हर शहर में युद्ध करेंगे – हाफिज को भी पता है भारत में पाकिस्तानी आतंकियों के चाहने वाले लोगों की कमी नहीं है और कांग्रेस तो उसके कब्जे में है ही —

ये भी हो सकता है कि नसीरुद्दीन शाह को इस साजिश का इल्म हो और उससे ध्यान भटकाने के लिए “डर” का शोर मचाया हो जिसे इमरान खान से तुरंत समर्थन मिल गया और वो समर्थन उसे कांग्रेस और उसके साथियों से भी मिला –

बटािला हाउस हमले से से पहले भी ऐसे ही ध्यान भटकाने का काम शबाना आज़मी ने 17 अगस्त 2008 को शोर मचाया कि उसे और उसके पति को मुंबई में कोई किराये पर घर नहीं दे रहा क्यूंकि वो मुस्लिम हैं जबकि वो वर्षों से मुंबई में रह रही थी –उसके बाद 13/9/2008 को दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट हुए जिनमे 30 लोग मारे गए और एक हफ्ते बाद 19 /9 /2008 को बटाला हाउस मुठभेड़ हुई जिसके तार शबाना के गृहनगर आजमगढ़ से जुड़े —

कल पकडे गए गिरोह के पास 150 से ज्यादा सिम कार्ड मिले जो फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर लिए गए थे –चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को अपने फैसले पर कुछ लाज आती है कि नहीं जिसमे उन्होंने आधार कार्ड को फ़ोन के सिम के लिए जरूरी नहीं बताया था –मतलब आतंकियों को छूट दे दी थी सिम प्राप्त करने के लिए –इसके पहले भी एक व्यक्ति के पास झारखण्ड में 10000 सिम कार्ड मिले थे –

मई, 2019 चुनाव के बाद अगर लोग मोदी को सबक सिखाते हैं तो जैसे आज वो मध्यप्रदेश और राजस्थान में लाइने लगा कर खड़े है यूरिया के लिए –फिर खड़े होंगे ISIS वालो की गोलियां खाने के लिए –ये चेतावनी है और इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है –

(सुभाष चन्द्र)


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