इस भेड़चाल से बचिए !!

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सातवें आठवें दशक में एक घटना की बहुत चर्चा हुआ करती थी..

घटना यह थी कि दिल्ली से मुम्बई की हवाई यात्रा के दौरान विमान में जेआरडी टाटा के बगल वाली सीट पर अभिनेता दिलीप कुमार बैठा हुआ था। उड़ान शुरू होते ही जेआरडी टाटा अपनी फाइल देखने में व्यस्त हो गए थे। उन दिनों शोहरत की बुलंदियों पर चढ़े हुए दिलीप कुमार के अहं को चोट लगी थी कि इस आदमी ने मेरी तरफ एकबार देखा भी नहीं।

कुछ देर बाद दिलीप कुमार से जब नहीं रहा गया तो उसने स्वयं ही हेलो कहकर जेआरडी से बातचीत शुरू करने का प्रयास किया था। लेकिन उसकी हेलो का जवाब हल्की सी मुस्कुराहट के साथ गर्दन हिलाकर देने के बाद जेआरडी पुनः अपनी फाइल देखने में व्यस्त हो गए थे। अतः दिलीप कुमार से नहीं रहा गया था। उसने जेआरडी से पूछ लिया था कि क्या आप मुझे नहीं पहचानते.?

उसके सवाल का जवाब जेआरडी ने हल्की सी ना के साथ दे दिया था। तब दिलीप कुमार ने उनको अपना परिचय देते हुए बताया था कि मैं हिन्दी फिल्मों का मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार हूं। इसपर जेआरडी ने टका सा जवाब देते हुए कहा था कि मैं “फिल्में नहीं देखता” और पुनः अपनी फाइल में व्यस्त हो गए थे।

आज उपरोक्त घटना का जिक्र इसलिए क्योंकि आज शाम से BJP की IT Cell के गुर्गों ने TATA के खिलाफ एक सुनियोजित प्रचार अभियान इसलिए प्रारम्भ किया क्योंकि उनके अनुसार TATA की तरफ से The Wire नाम की वेबसाइट को 1 करोड़ 16 लाख रूपये का चंदा दिया गया।
ऐसा करते समय ये गुर्गे यह भूल गए कि केवल देश नहीं विदेशों तक में, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुक्त कंठ से प्रशंसा जितनी रतन टाटा करते रहे हैं, सम्भवतः उतनी प्रशंसा कभी किसी उद्योगपति ने नहीं की। टाटा द्वारा मोदी प्रशंसा का यह सिलसिला लगभग एक दशक से अधिक पुराना है और तबसे चल रहा है जब कांग्रेसी गैंग हर उस आदमी के खून का प्यासा हो जाता था जो मोदी समर्थक हो।

अतः उन रतन टाटा का TATA ग्रुप मोदी और हिंदुत्व का विरोध कराने के लिए एक करोड़ रुपये का चंदा एक वेबसाइट को देगा.? कम से कम ऐसा सोचने की मूर्खता मैं नहीं कर सकता क्योंकि रतन टाटा उसी जीवन शैली/कार्य संस्कृति के वारिस हैं जिसका जिक्र पोस्ट की शुरुआत में जेआरडी से सम्बन्धित घटना में किया है।

लाखों करोड़ की हैसियत वाला उद्योग समूह किसी सरकार या समाज के विरोध की ठान लेता है या कोई मुहिम चलाता/चलवाता है तो इसके लिए वो किसी टुटपुंजिया लम्पट वेबसाइट पर एक करोड़ रुपये नहीं लुटाता है। बल्कि सुनियोजित तरीके से सैकड़ों हज़ारों करोड़ रूपये खर्च कर संगठित अभियान चलाता है। यदि एक करोड़ रूपये का चंदा वेबसाइट को मिला भी है तो निश्चित तौर पर ग्रुप के वेलफेयर फाउंडेशन के कर्मचारियों अधिकारियों की गलती या अज्ञानतावश ही हुआ होगा। इसलिए TATA विरोध की इस भेड़चाल से दूर रहिये। बहुत स्वर्णिम इतिहास है TATA का।

अन्त में यह भी स्पष्ट कर दूं कि TATA विरोध की यह आग भड़काने वाले IT CELL के गुर्गे वही हैं जिन्होंने 2 वर्ष पूर्व फेसबुक के करोड़ों समर्थकों में से 150 मुश्टण्डों को सुपर 150 का तमगा पहनाकर प्रधानमंत्री निवास तक पहुंचा दिया था।

देश के प्रधानमंत्री से लेकर हिन्दू धर्म पर होते रहे असंख्य अराजक हमलों के दौरान गधे के सिर से सींग की तरह गायब रहने वाले यह गुर्गे आज अचानक TATA के खिलाफ विद्युत गति से सक्रिय क्यों हो गए हैं इसका कारण भी लिखूंगा। फिलहाल इतना जान लीजिए कि… अकाल मौत के 4 कारण चाणक्य लिख गए हैं…
कुलटा स्त्री
घर में सांप
मुंहलगा नौकर
मूर्ख मित्र।

ये गुर्गे उपरोक्त सूची के अन्तिम दो (मुंहलगा नौकर,मूर्ख मित्र) के ज्वलंत उदाहरण हैं। उनकी भड़कायी इस आग का शिकार कई प्रबुद्ध मित्रों को भी बनते हुए देखा तो यह लेख लिखना आवश्यक समझा।

(सतीश चन्द्र मिश्र)

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