उल्टे पड़ गये थरूर को बोल -‘अच्छा हिन्दू मंदिर नहीं चाहता’

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कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने फिर से बैठे ठाले मुसीबत मोल ले ली है. अपने एक विवादित बयान से जहां उनको मीडिया हाईलाइट मिल रही है वहीं वे देश के बहुसंख्यक हिन्दुओं के खलनायक भी बन गये हैं.

मूलरूप से भारतीय किस्म के सेक्युलरिस्ट शशि थरूर ने कह डाला है कि एक अच्छा हिन्दू अयोध्या में मंदिर बनाना नहीं चाहेगा. उनके इस बयान को सीधा करके देखें तो जो ध्वनि आती है वह ये है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का समर्थन कर रहे हिन्दू अच्छे हिन्दू नहीं हैं. अब इस बयान को बिलकुल ही सीधा कर लिया जाये तो जो दिखता है उससे साफ जाहिर है कि शशि थरूर कहते हैं कि राम मंदिर समर्थक बुरे हिन्दू हैं.

जाहिर है, उल्टे बयान का सीधा असर हुआ. भाजपा ने कांग्रेस से सफाई मांगी तो कांग्रेस फ्रंट पर खेलने की कोशिश करते करते एकदम से ही बैकफुट पर आ गई. आदमकद बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने जब थरूर के इस बयान को लेकर उन पर आक्रमण किया तो उनको बच निकलने की पतली गली नजर नहीं आई. हालात और खराब न हो जायें, इस डर ने थरूर को सफाई देने के लिये मजबूर कर डाला. और अगले ही दिन थरूर ने बताने की कोशिश की कि राम मंदिर पर दिया गया  उनका बयान भाजपा वालों ने गलत तरीके से लपक लिया है, और उसे तोड़-मरोड़कर पेश कर दिया है. थरूर की यह सफाई ट्वीट कर के आई. थरूर का ट्वीट कुछ इस प्रकार था –  ‘‘मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। मैंने सिर्फ यह कहा था कि बहुत से हिंदू इसलिए वहां पर मंदिर चाहते हैं, क्योंकि वहां पर श्रीराम की जन्मभूमि है। लेकिन एक अच्छा हिंदू नहीं चाहेगा कि ऐसी जगह मंदिर बने जहां किसी और के धार्मिक स्थल को गिराया गया हो.‘‘ उन्होंने यह भी कहा, ‘यह मेरा व्यक्तिगत बयान था, मैं अपनी पार्टी का प्रवक्ता नहीं हूं इसलिए मेरे बयान को पार्टी से ना जोड़ें।’‘

उधर उनकी पार्टी ने कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण न ढूंढ पाने की विवशता में जैसा हमेशा करती है, वही किया और थरूर के बयान से किनाराकशी कर ली. थरूर का बयान कांग्रेसी सफाई के अनुसार थरूर का निजी बयान है, ये उनकी निजी सोच है.

मजबूरन शशि थरूर को अपने बयान की और भी सफाइयां देनी पड़ रही हैं और वे अब स्वयं को भी अच्छा हिन्दू दर्शाना चाह रहे हैं.

वस्तुतः मामला यूं हुआ कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर रविवार को चेन्नै के ‘द हिंदू लिटरेचर फेस्टिवल’ नामक एक कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे. बोलते बोलते बोल गये कि राम मंदिर निर्माण उचित नहीं है औऱ अच्छे हिन्दू मंदिर नहीं चाहते. भाजपा के अंध विरोध में प्रायः ऐसा ही होता है कि कुछ से कुछ बोल जाते हैं कांग्रेस के नेता. इस तरह के बक-बोल जिसे जन भाषा में बकलोल कहा जाता है, के शिकार दिग्गज कांग्रेसी दिग्गी राजा भी हो चुके हैं. कांग्रेस हाई कमान ने उनकी बोलती ऐसी बंद कराई है कि अब जब उनका दम घुटने लगा तो पार्टी विरोध में ही उनके दबे दबे सुरों के अंकुर फूटने लगे. अब लगता है बहुत जल्दी थरूर पर भी लगाम लगाई जायेगी और कम बोलने वाला यह कांग्रेसी नेता बिलकुल ही चुप रहने को मजबूर हो जायेगा.

(पारिजात त्रिपाठी)

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