अन्याय & न्याय : कहानी पद्मभूषण वैज्ञानिक नांबी नारायणन की

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आज मिले पुरस्कारों में सबसे मुख्य वैज्ञानिक #नांबीनारायणन को #पद्मभूषण पुरस्कार मिलना है.नांबी नारायणन की कहानी पर्फ़ेक्ट उदाहरण है कांग्रेस पार्टी के देश के साथ किये गये विश्वास के प्रति घात की..

नब्बे के दशक में भारत तेज़ी से मिसाइल पर मिसाइल बना रहा था, मिसाइलों की मारक क्षमता लगातार बढ़ रही थी। भारत को ज़रूरत थी क्रायोजेनिक इन्जन की, जिसका उपयोग कर भारत ऐसी मिसाइलें बना सकता था जिनकी मारक क्षमता हज़ारों किमी दूर दुनिया के किसी भी देश तक पहुंच रखती हो। अमेरिका सशंकित हो गया। अमेरिका ने रूस पर दबाव डाल कर भारत रूस के बीच समझौते को रद्द कर दिया। ऐसे में इसरो ने फ़ैसला लिया कि वह भारत में ही ये इन्जन बनाएगा और इस प्रोजेक्ट का हेड बनाया नांबी नारायणन को।

उस समय केरल में करुणाकरण मुख्य मंत्री थे, ऐंटोनी नेता नम्बर दो थे – वही ऐंटोनी जो कालांतर में मनमोहन सरकार में भारत के रक्षा मंत्री बने और पॉलिसी पैरालिसिस का पर्फ़ेक्ट उदाहरण बने। ऐंटोनी का ख़्वाब था केरल का मुख्य मंत्री बनना। एक बड़े स्तर की साज़िश रची गई। केरल पुलिस में ऐन्टोनी खेमे के पुलिस वालों ने दो मालदीवियान महिलाएँ पकड़ी और आरोप लगाया इन महिलाओं और पैसे के चक्कर में नांबी नारायणन सीक्रेट बेच रहे हैं। नांबी नारायणन को गिरफ़्तार कर लिया गया साथ में इस प्रोजेक्ट के और कई वैज्ञानिकों को गिरफ़्तार कर लिया गया। इस साज़िश के तार अमेरिका से भी जुड़े थे और अकस्मात् प्रदेश सरकार के कई विभाग, यहाँ तक कि इंटेलिजेन्स ब्यूरो भी इस साज़िश में शामिल हो गया और नांबी नारायणन तथा सभी वरिष्ठ वैज्ञानिक कई महीने जेल में रहे। मीडिया के लिए यह बिलकुल एक्सीलेंट स्टोरी थी, सेक्स, मनी, जासूसी, वैज्ञानिक, और क्या चाहिए। ज़बरदस्त हेडलाइन चली।

ज़ाहिर सी बात थी, प्रोजेक्ट के सारे बड़े वैज्ञानिक जासूसी के आरोप में जेल में तो ISRO में चल रहा यह प्रोजेक्ट भी समाप्त हो गया, ठंडे बस्ते में चला गया। बाद में नांबी नारायणन ने लम्बी क़ानूनी लड़ाई लड़ी, हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में अपने को निर्दोष साबित किया। लेकिन इस सबमें पचीस वर्ष लग गए, वैसे भी निर्दोष तो अदालत ने साबित किया उनके पचीस वर्ष कौन लौटाएगा। साथ ही देश ने भी पचीस वर्ष खोए। भारत २०१७ में ही क्रायोजनिक इन्जन का सफल परीक्षण कर पाया।

नांबी नारायणन क़ानून की चौखट पर जीतने के बाद भी जनता की निगाहों में ग़द्दार ही माने गए, जनता कहाँ इतना फ़ॉलो करती है। इसी बीच भारत के क्रायोजनिक प्रोग्राम को चौपट करने में मुख्य हाथ होने वाले नेता श्री ऐन्टोनी जी तरक़्क़ी होते होते भारत के रक्षा मंत्री तक बन गए।

वर्ष २०१८ में सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार पर पचास लाख रुपए हर्ज़ाना देने का आदेश दिया नांबी नारायणन को। वर्ष २०१९ में मोदी सरकार ने नांबी नारायणन को पद्म भूषण देकर उनके साथ हुए अन्याय को काफ़ी हद तक मिटाने की कोशिश की।

लेकिन देश ने जो अनमोल वैज्ञानिक खोए, पचीस वर्ष खोए और मिसाइल टेक्नॉलजी में दशकों का अनुभव खोया – इसकी सज़ा जनता ही दे सकती है!

(साभार)

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