काश्मीर पर राहुल की कांग्रेसी सोच

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संकीर्णता के धनी –राहुल गाँधी -छोटी और अधम सोच ले कर किसी का भला नहीं कर सकते.
वैसे तो अनेक उदहारण हैं राहुल गाँधी की संकीर्ण सोच के मगर अभी हाल ही में उनकी और सोनिया गाँधी की कुछ खास बातें सामने आई हैं.

चुनाव परिणामों के बाद सोनिया गाँधी ने अपने लाड़ले के साथ उन सभी 12 करोड़ वोटरों का धन्यवाद दिया जिन्होंने कांग्रेस को वोट किया यानी सोनिया जी के नज़र में उन वोटरों की कोई हस्ती नहीं है जिन्होंने कांग्रेस को नकार दिया. ये है माँ-बेटे की संकीर्णता -जबकि नरेंद्र मोदी अपने सांसदों से कह रहे हैं कि जिन्होंने भाजपा को वोट नहीं दिया, उनके लिए भी काम करो.

इन 12 करोड़ वोटरों में शायद अधिकांश मुस्लिम होंगे जिन्हें सोनिया ने धन्यवाद दिया क्यूंकि कांग्रेस तो वैसे भी मुस्लिमों की पार्टी है.

राहुल गाँधी ने रवीश कुमार को रेमैन मैग्सेसे अवार्ड पाने के लिए तो बधाई दे दी मगर जिस व्यक्ति ने जीवन भर कांग्रेस की सेवा की, उस प्रणब मुख़र्जी को भारत रत्न मिलने पर न तो बधाई दी और न ही दोनों माँ बेटे उनके पुरस्कार समारोह में शामिल हुए  –ये है माँ बेटे की संकीर्णता.

प्राकृतिक आपदा पर किसी का कोई वश नहीं चलता मगर केरल की पिछली बाढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केरल को पूरी मदद देने के बावजूद मल्लपुरम जैसे कुछ इलाकों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जुलुस निकाल कर नारे लगाए थे –“नरेंद्र मोदी चोर है” -जबकि उन लोगों के इलाकों में मदद न पहुँचती तो उनके ही लोग डूब कर मर गए होते.

मगर बाढ़ तो कई राज्यों में आई हुई है लेकिन राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री मोदी से केवल केरल और खासकर वायनाड के लिए मदद करने का आग्रह किया है जबकि राहुल गाँधी को याद होगा कि वायनाड में उनके मुस्लिम समर्थक उनके रोड शो में पाकिस्तान के झंडे लहराते हुए निकले थे.
राहुल केवल केरल की बात करके प्रधानमंत्री से क्या जताना है कि कांग्रेस केवल एक ही राज्य केरल की पार्टी है, बाकी राज्यों में आई बाढ़ से कांग्रेस और राहुल गाँधी को कोई सरोकार नहीं है — ये है राहुल की संकीर्णता और छोटी सोच.

इसी संकीर्ण सोच के कारण राहुल गाँधी देश की जनता का मिजाज़ समझे बिना जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने पर पाकिस्तान के साथ खड़े हो गये –उनको जम्मू-कश्मीर के केवल मुसलमानों की ही चिन्ता है क्यूंकि कांग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है.

(सुभाष चन्द्र)

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