किन्तु परन्तु अगर मगर लगा कर न श्रद्धांजलि चाहिए और न सरकार को समर्थन

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मोदी जी के साथ सारा देश खड़ा है ..

पाकिस्तान के जैश ने भारत के 42 जवानों की निर्मम हत्या कर दी लेकिन देश के राजनीतिक दलों ने सियासत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी — एक भी नेता का बयान दिखा दीजिये जिसने बिना किन्तु परन्तु और अगर मगर के श्रद्धांजलि दी हो या सरकार को समर्थन की बात की हो.

पहले ही दिन कांग्रेस के सुरजेवाला, सिब्बल और शिंदे ने हमले की निंदा तो की मगर सरकार के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया -तब राहुल गाँधी और अन्य नेताओं की तरफ से गलती का सुधार किया गया और सरकार के साथ खड़े होने की बात कही गई मगर फिर भी सिद्धू जैसे नेता पाकिस्तान के साथ खड़े हैं और सरकार पर हमला कर रहे हैं.

अधिकांश नेता एक बात तो ऐसे बोल रहे हैं जैसे उसके बिना उनकी हज ही पूरी नहीं होगी  –और वो ये है कि पाकिस्तान से बातचीत जारी रखनी चाहिए. मैं इन जरूरत से ज्यादा सेक्युलर और अपने को समझदार समझने वाले नेताओं से पूछता हूँ कि 65 साल से तो सभी सरकारें बात करती रही पाकिस्तान से, उससे क्या मिल गया ? क्या पाकिस्तान आतंकी हमले तभी से कर रहा है जब से मोदी आये हैं और उसके पहले सब शांति थी?

फारूक अब्दुल्ला तो खुली धमकी दे रहे हैं कि जब तक कश्मीर समस्या नहीं सुलझेगी, ये हमले होते रहेंगे जबकि कश्मीर समस्या देने वाले खुद उनके तथाकथित पिता और कांग्रेस के दादा नेहरू थे.

शनिवार, 15 फरवरी की सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने TMC और कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार के प्रस्ताव को ही बदल कर रख दिया जिसका मतलब निकला कोई दल सरकार के साथ नहीं है जबकि कुछ दल ढोल पीट रहे थे बैठक के बाद कि वो सरकार के साथ हैं.

सरकार ने प्रस्ताव के मसौदे की अंतिम लाइन में लिखा था — ‘आज हम सभी अपने सुरक्षा बलों के साथ खड़े हैं और केंद्र व राज्य सरकार को ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम दृढ़तापूर्वक उठाने के लिए अधिकृत करते हैं ’

लेकिन TMC के डेरेक ओ ब्रायन इसके विरोध में खड़े हो गये और सपा और कांग्रेस ने उनको समर्थन दे दिया जबकि तेलंगाना समिति और बीजू जनता दल ने विरोध किया. नतीजा ये हुआ कि अंतिम लाइन बदल दी गई और लिखा गया — ‘आज हम सभी देश की एकता और अखंडता के लिए अपने सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हैं’.

इस कदर घटिया मानसिकता का परिचय दिया विपक्ष ने संकट काल में केवल एक डर से कि कहीं सरकार को  समर्थन के प्रस्ताव से मोदी को ब्लेंक चेक ना मिल जाये जिससे वो पाकिस्तान पर हमला कर दें, इमरजेन्सी लगा दे और चुनाव स्थगित कर दें और विपक्ष विरोध करने का अधिकार ना खो दे — देश पर संकट है और विपक्ष 30 साल में बनी पहली पूर्ण बहुमत की सरकार को ब्लैकमेल कर गया.

मगर विपक्ष को ये नहीं पता आज कि आज वो बेशक मोदी के साथ न हों मगर सारा देश मोदी के साथ है.आप सुरक्षा बलों के साथ खड़े होने की बात करके ये भूल गए कि सेना मोदी का ही आदेश मानेगी, जो देश के लिए मोदी को करना है, वो वही करेंगे और उसके लिए मोदी को किसी प्रस्ताव में विपक्ष की मंजूरी की जरूरत नहीं है.

विपक्ष को पता होना चाहिए कि जो आग जनता के दिल में लगी है वो मोदी के दिल में भी लगी है, मगर शायद विपक्ष के दिल में नहीं है.

सरकार के प्रस्ताव के बारे में अधिकांश चैनल और अख़बार गोल कर गए जो ऊपर लिखा गया है, वो अमर उजाला में छपी रिपोर्ट से लिया गया है.

(सुभाष चन्द्र )

(19/2/2019)

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