MP में चौथी बार भी शिव-राज

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आज है 10 नवंबर, 2018.

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव परिणाम के संकेत मिलने प्रारम्भ हो गए हैं. विभिन्न सर्वेक्षण बता रहे हैं कि चौथी बार भी शिव-राज होगा.

इसकी संभावना भी थी. कांग्रेस ने हल्ला मचाने और अकारण हल्ला बोलने के अतिरिक्त कुछ नहीं किया. देश की तरह ही प्रदेश में कांग्रेस का चेहरा सुन्दर नहीं है और न ही इस दिशा में कोई प्रयास किया गया. जनता को मूर्ख मान कर एन्टीइन्कम्बेंसी को उम्मीद की किरण मान कर बैठा था कोंग्रेसी विपक्ष. पर जनता सदा ही मूर्ख नहीं बनाई जा सकती.

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सींच चौहान के शासन के विगत 13 वर्ष सफलताओं से भरे हुए हैं. न केवल सरकार ने लोक कल्याणकारी कार्य किये बल्कि अपनी पार्टी के संगठन को भी अपने विश्वास में लिया. हालत तो ये हो गई कि कई विरोधी नेता बेरोजगार हो गए, कई राजनीति छोड़ गए. सिर्फ थोड़ी समस्या पार्टी को टिकट बंटवारे को लेकर अपने कुछ कार्यकर्ताओं के क्षोभ से उत्पन्न हुई है.

व्यापम को लेकर विपक्ष को उम्मीद थी कि वे शिवराज सिंह चौहान को घेर लेंगे लेकिन उस मोर्चे पर भी कोई अधिक उम्मीद नज़र नहीं आती. राहुल गाँधी की छवि भी कोई इतनी महान नहीं कि वे यहां जनसभाएं करके लोगों में कांग्रेस प्रेम जागृत कर सकें. कमलनाथ की छवि महाघोटालेबाज़ की बनी हुई है और ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए मध्यप्रदेश ग्वालियर नहीं बन सकता कि वे मुख्यमंत्री बनने की घोषणा कर दें और प्रदेश की जनता उनको उनके चरणों में गिर कर उनको अपना महाराजा मान ले.

(पारिजात त्रिपाठी)

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