नया सीबीआई डायरेक्टर भी “चरणदास” चाहिए था कांग्रेस को

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ऋषि कुमार शुक्ला, 1983 बैच के काबिल आईपीएस अफसर को अभी इसी सप्ताह कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश के राज्य पुलिस महानिदेशक के पद से हटाया था और मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन में चेयरमैन बनाया था..

ऐसे अधिकारी को भला कांग्रेस का मल्लिकार्जुन खड़गे सीबीआई के निदेशक के रूप में कैसे बर्दाश्त करते जिनको उनकी पार्टी की सरकार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक के पद पर बर्दाश्त नहीं किया. इसलिए खड़गे उनके खिलाफ फालतू बहाने बना रहे हैं.

खड़गे ने कहा कि कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करते हुए चयन मापदंड में नरमी बरती गई. खड़गे ने ये भी आरोप लगाया कि सीबीआई  नियमन करने वाले दिल्ली पुलिस विशेष स्थापना अधिनियम का भी उल्लंघन हुआ है.

ऐसा कहते हुए खड़गे को इतना भी याद नहीं रहा कि चयन समिति में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस गोगोई साहब खुद बैठे थे –तीसरे सदस्य, प्रधान मंत्री पर तो कुछ भी आरोप लगा सकते थे लेकिन खड़गे ने तो गोगोई साहब को भी नहीं छोड़ा -कांग्रेस की आदत बन चुकी है कि जब कोई जज उनके मन की बात ना करे तो उसे डरा दो .

यहाँ एक सीधी बात समझ आती है. खड़गे साहब, अगर कानून के इतने ही उल्लंघन हुए हैं तो फिर तो कल ही सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को चुनौती दे देनी चाहिए थी. इस काम के लिए खड़गे साहब, प्रशांत भूषण को लगा देना चाहिए था. चलो कल नहीं तो सोमवार को कर देना -भूषण की “जनहित याचिका” तो तुरंत एडमिट  हो जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट तो प्रशांत भूषण की नागेश्वर राव की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार को फटकार लगाते हुए भूल गया कि अलोक वर्मा का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने ही नहीं दिया, तब तक किसी की डायरेक्टर पद पर नियुक्ति नहीं हो सकती थी  और तब तक किसी को तो सीबीआई का काम काज सम्हालने के लिए निदेशक पद पर बिठाना जरूरी था – और इसलिए अंतरिम बनाया गया राव को.

अब देखते हैं कल प्रशांत भूषण क्या करेंगे. खुराफाती दिमाग के प्रतिनिधि हैं वो, ऋषि कुमार शुक्ला की नियुक्ति को चुनौती तो जरूर देंगे वरना उनको जीवन नीरस लगने लगेगा.

ऋषि कुमार शुक्ला के लिए सीबीआई निदेशक बनने के बाद कई महत्वपूर्ण लंबित कार्य करने के लिए बताये गए हैं. कुछ काम उन्हें और करने चाहिए,जैसे पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के खिलाफ दर्ज चार्ज शीट को अंजाम तक पहुँचाना बहुत जरूरी है जिस पर अलोक वर्मा ने शायद कोई विशेष काम नहीं किया.

रंजीत सिन्हा के बारे में आजकल प्रशांत भूषण कुछ नहीं बोलते जबकि उन्होंने रंजीत सिन्हा स्कैंडल का मसला सुप्रीम कोर्ट में उठाया था. दूसरा, सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग करें कि संस्था द्वारा दायर किये गए मुकदमों  पर ट्रायल कोर्ट्स में समय पर फैसले किये जाएँ और उनकी अपीलों पर हाई कोर्ट्स 6 महीने में फैसले करें –लालू की अपील 5 साल से झारखण्ड हाई कोर्ट में लंबित है.

सीबीआई को डायरेक्टर ऋषि मिले हैं और CAG प्रमुख महर्षि हैं (राजीव महर्षि) मतलब ऋषि और महर्षि हैं मोदी जी के पास –किस प्रकार की साम्प्रदायिकता है ये मोदी जी की ?

(सुभाष चन्द्र)

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