प्रधान सेवक ने तबियत से धुलाई की लोकसभा में

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मगर विपक्ष में गन्दगी इतनी है कि साफ़ पूरी हो नहीं पाती है..

दो दिन पहले 2 फरवरी 2019 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधान सेवक, नरेंद्र मोदी ने विपक्ष की तबियत से धुलाई की मगर उस तरफ मैल इतना है कि बिना घड़ी डिटर्जेन्ट के सफाई पूरी नहीं हो सकती — कहा भी गया है कि चिकने घड़ों पर तो पानी भी नहीं ठहरता.

पीएम मोदी ने कांग्रेस की झूठ की इमारत पूरी तरह ढहा दी मगर उनके झूठ की फैक्ट्री से बने प्रोडक्ट फिर भी अभी चुनाव के बाजार में आते रहेंगे.

इसलिए मोदी को दुबारा वापस लाने के लिए देश की जनता को सोशल मीडिया पर और सतर्क रहना होगा – ये कौरव पक्ष तो वैसे भी दुनियाभर में अपने फरेब के लिये जाना जाता है.

विपक्ष के महा गठबंधन को मिलावटी सरकार बनाने का प्रयास कह कर प्रधानमन्त्री मोदी का उपहास उचित ही था कि लोग सेहत की चिंता अब ज्यादा करते हैं, इसलिये मिलावटी उत्पाद अब सहन नहीं करेंगे.

बस दो बातें और पूछ लेते तो सोने में सुहागा हो जाता –पहली –इस मिलावटी उत्पाद में  मायावती कहाँ फिट होंगी और दूसरा –दीदी की नाक कहाँ लगेगी.

पीएम मोदी ने आज विपक्ष की घंटी बजाते हुए खड़गे को चुनौती दे दी कि अगली सरकार हमारी ही होगी और 2023 में अविश्वास प्रस्ताव लाने की शुभकामनायें भी एडवान्स में ही दे दीं.

शायद उस रात खड़गे जी को नींद नहीं आई होगी और ना ही सोनिया जी सो पायी होंगी क्यूंकि प्रधान सेवक ने अपना धर्म बता दिया कि चोर लुटेरों को डराने के लिए ही जनता ने मुझे भेजा है. उन्हें डरना ही चाहिए –जिन्होंने देश को लूटा है, उन्हें मैं चैन से सोने नहीं दूंगा.

उस दिन संसद के सदन में राहुल गाँधी और उनके दोनों बड़बोले साथी ज्योतिरादित्य सिंधिया और हूडा नहीं बैठे थे — बस सोनिया को जब कुछ समझ नहीं आ रहा था तो खड़गे उनको समझाने में लगे नजर आ रहे थे.

इसके अलावा शशि थरूर मुंह लटकाये बैठे थे –थोड़ा करीब शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले, (मोदी जी जब कांग्रेस और खड़गे की बखिया उधेड़ रहे थे)  मुंह पर हाथ रख कर हंस रही थीं, जैसे उनको मजा आ रहा हो –जबकि शरद पवार तो मिलावटी ब्रिगेड में घुसे ही हुए हैं.

कुल मिला कर देश के प्रधान सेवक के भाषण के बारे में कहा जा सकता है कि आज उन्होंने एक बड़ा चुनावी भाषण लोक सभा में ही दे दिया जिसमे वो छक्के पे छक्के मारते गए मगर विपक्ष रोक नहीं पाया –पूरी तरह फ्रंट फुट पर बैटिंग इसे ही कहते हैं.

(सुभाष चन्द्र)

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