जिन्ना की प्रेतात्मा धन्य हो जाती है जब चुनाव आने पर वोट प्रेमी उनके नाम का कीर्तन करते हैं ..

शत्रुघन सिन्हा बीजेपी से नफरत में जो न करें वो कम है, लेकिन वे ज्यादा होशियार बनने के चक्कर में अक्सर अपना ही नुकसान कर बैठते हैं. उनकी ‘समझदारी’ से जितना नुक्सान उनको नहीं होता उससे अधिक उनका नुकसान हो जाता है जिनकी पार्टी में वे होते हैं. अब ताज़ा कारनामा जो शत्रुघन सिन्हा ने कर दिखाया है वो ये है कि उन्हें इन चुनावों में अचानक मुहम्मद अली जिन्ना की याद आ गई है.

जिन्ना का नाम सुनते ही अन्य वोटवादी दल और वोटकामी नेता अचानक जाग से गए. देखते ही देखते दो चार और तथाकथित बड़े नेता जिन्ना की शान में कशीदे पढ़ने लगे. जिन्ना का नाम सुन कर एनसीपी के नेता माजिद मेमन ख़ुशी से फूले नहीं समाये और फिर वे जिन्ना की तारीफ़ में जमीन पर बिछ गए. उधर कांग्रेसी हरीश रावत ने भी ये उड़ता तीर पकड़ लिया और लगे जिन्ना की प्रशंसा करने.

मुस्लिम वोट कबाड़ने की कोशिश में पहली बार ऐसा नहीं हुआ है. हर बार चुनाव आते ही इस तरह के उलूलजुलूल प्रयास देखे जाते हैं. देश विभाजन के लिए जिम्मेदार त्रिमूर्ति में गाँधी नेहरू के बाद एक जिन्ना भी हैं जिन्होंने अकेले ही देश की बंदर बाँट करके अपनी अपनी प्रधानमंत्री की कुर्सी पकड़ ली थी.

वोट-प्रेमी गैंग्स को समझ लेना चाहिये कि बीजेपी में ऐसा ही एक जिन्ना प्रेमी शख्स था, उसका जो हश्र हुआ है, इतिहास में दर्ज हो गया है. भारत-वर्ष के विभाजन के अपराधी जिन्ना का नाम मनहूसियत की वो मिसाल है कि उनकी शरण में जाते ही नेता न घर के रह जाते हैं न घाट के.

लेकिन आज राजनीति के इन समझदारों को ये समझ नहीं आता कि जितना आप मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की कवायद करेंगे उतना ही हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण होता चला जाएगा और हर हिन्दू वोट एक ही व्यक्ति को जाएगा जिसका नाम है मोदी.

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