प्रदेश में कांग्रेस की हमसफर ‘जयस’ : 28 सीटों पर समझौता संभव

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प्रदेश में कांग्रेस कँपकँपाई हुई है. अकेले दम पर लड़ने की कोई सूरत नहीं दिखी तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को साथ आने के लिए मनाया किन्तु बात बन नहीं पाई. बात बन न पाने की वजह सारी दुनिया जानती है. चाहे प्रदेश गठबंधन हो या राष्ट्रीय गठबंधन अब ड्राइविंग सीट पर कांग्रेस नहीं बैठ पा रही है. कांग्रेस की खस्ताहालत को भांप कर हर दूसरी पार्टी उसे अपनी शर्तों पर नचाना चाहती है जो कि कांग्रेस को बेइज्जती जैसा लगता है. पर कांग्रेस इस सच को हजम कर पाने में अभी भी नाकाम है कि अब हालात बदल गए हैं.

लेकिन लगता है ऊपर वाले ने कांग्रेस की थोड़ी सी सुन ली. कांग्रेस को प्रदेश के चुनाव सफर में अपना हमसफर मिल गया है. जयस ने हामी सी भर दी है. हालांकि ये भी कांग्रेस के लिए कम बेइज्जती नहीं है कि उसे इस बार नई बनी जयस (जय आदिवासी युवा संगठन) को अपने साथ आने के लिये मेहनत से मनाना पड़ा है और दोनों दलों में 28 सीटों पर आपसी समझ तय करने की बात तय हो गई है.

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए यह विधानसभा चुनाव बहुत अहम है. छोटे छोटे क्षेत्रीय दलों से समझौते को मजबूर कांग्रेस पंद्रह साल बाद अब सत्ता में वापसी चाहती है, कांग्रेस की यह चाहत अभी भी उसके लिए दूर की कौड़ी ही नज़र आ रही है. लेकिन कांग्रेस प्रदेश में भाजपा से नाराज़ हर वस्तु, मनुष्य, दल और घटना से हाथ मिला कर उसे साथ ला कर और उसके साथ चल कर भाजपा को हराने की उम्मीद कर रही है.

समाचारों के अनुसार जयस के अध्यक्ष हीरालाल अलावा की दिल्ली में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया से भेंट हुई है. इस भेंट-वार्ता के दौरान राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा भी मौजूद थे. इसके बाद यह अनुमान पक्का हो गया लगता है कि राज्य में जयस और कांग्रेस का गठबंधन हो सकता है.

अगर सीटों की बात करें तो कांग्रेस जयस को दे सकती है 28 सीटें. और ऐसा करना उसकी मजबूरी भी है. इन कमजोर सीटों पर कांग्रेस के मुकाबले जयस की पकड़ ज्यादा है और जयस इसी शर्त पर समझौता करना चाहती है. वैसे तो इस बैठक के दौरान जयस ने बाबरिया को 40 सीटों की लिस्ट सौंपी है. लेकिन कांग्रेस जयस को इतनी सीटें नहीं देना चाहती है. कांग्रेस ने जयस को 28 सीटों पर गठबंधन के लिए आश्वासन दिया है. इन 28 सीटों में से 22 सीटें रिजर्व और 6 सीटें सामान्य कोटे की होंगी.

इस गठबंधन की घोषणा अगले दो से तीन दिनों में होने की संभावना है. 30 अक्टूबर को राहुल गांधी मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले झाबुआ के दौरे पर जाने वाले हैं. उसके पहले ही ये घोषणा हो जायेगी.

(पारिजात त्रिपाठी)

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