मध्यप्रदेश में दिग्विजय ने बनाई चुनाव-प्रचार से दूरी, बोले कि ‘भाषण दूंगा तो कटेंगे वोट!’

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मध्यप्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह की वरिष्ठता के मुकाबले में बीजेपी में भी नेता नहीं हैं. इसके बावजूद दिग्विजय सिंह के प्रति कांग्रेस की उदासीनता से मध्यप्रदेश के चुनाव में एक नया संघर्ष भी दिखाई दे रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के एमपी दौरे में उनके साथ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ ही मौजूद रहते हैं जबकि होर्डिंग-पोस्टरों से लेकर रोड शो तक दिग्विजय सिंह नदारद हैं. ऐसे में दिग्विजय सिंह ने चुनाव प्रचार से खुद के दूर रहने की वजह बताई है. दिग्विजय सिंह ने कहा है कि ‘मेरे भाषण देने से कांग्रेस के वोट कट जाते हैं, इसलिए मैं अब जाता ही नहीं.’
दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंचे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा कि कि ‘जिसको टिकट मिले, चाहे वह दुश्मन ही क्यों ना हो, उसे जिताओ. मेरा काम तो केवल एक है कि कोई प्रचार नहीं, कोई भाषण नहीं.’दिग्विजय सिंह के इस बयान का वीडियो वायरल हो गया है. दिग्विजय सिंह के इस बयान के जरिए उपेक्षा को लेकर उनकी नाराजगी को सार्वजनिक रूप से देखा जा सकता है.
दिग्विजय सिंह के इस बयान पर राजनीति भी तेज हो गई है. मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधा है कि ‘कांग्रेस के लोग अपने नेता की इज्जत करें. मैंने सोचा नहीं था कि कांग्रेस अपने नेता की यह दुर्दशा करेगी.’
वहीं कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह के बयान पर कहा कि उन्हें मालूम नहीं है कि किस संदर्भ में दिग्विजय सिंह ने ये बात की.
बहरहाल, दिग्विजय सिंह के चलते एमपी की राजनीति में कभी तूफान पैदा होता है तो कभी उनके बयान से भूचाल. हाल ही में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस के साथ गठबंधन न होने के पीछे दिग्विजय सिंह को ही जिम्मेदार ठहराया था. मायावती ने दिग्विजय सिंह को आरएसएस का एजेंट तक कहा था. वहीं दिग्विजय सिंह ने कहा था कि मायावती सीबीआई और ईडी के डर की वजह से कांग्रेस के साथ गठबंधन में शामिल नहीं हो रही हैं.
लेकिन अब दिग्विजय सिंह के हल्के-फुल्के अंदाज में कही इस बात को लेकर भी बीजेपी को एक मुद्दा मिल गया है. अभी तक कांग्रेस लगातार बीजेपी पर मार्गदर्शक नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाती रही है तो अब बीजेपी दिग्विजय सिंह के मामले में कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर सकती है. खास बात ये है कि हाल ही में दिग्विजय सिंह छह महीने की नर्मदा यात्रा पूरी कर वापस लौटे हैं और ये माना जा रहा था कि मध्यप्रदेश चुनाव प्रचार में उनकी बड़ी भूमिका रहेगी लेकिन अब धीरे धीरे दिग्विजय सिंह की भूमिका सीमित होती जा रही है. गोवा, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों के प्रभार छिने जाने के बाद दिग्विजय सिंह को राहुल गांधी की बनाई कांग्रेस वर्किंग कमिटी की नई टीम में भी जगह नहीं मिली.

(भुवन चंद्र जोशी)

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