#MeToo के पहले राजनीतिक आरोपी एमजे अकबर ने तोड़ी खामोशी

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा #MeToo कैम्पेन ने भारत में भी अच्छी खासी हलचल को जन्म दिया है. न सिर्फ फिल्मी दुनिया में यौनउत्पीड़न के आरोपों की झड़ी लग गई है बल्कि राजनीति की दुनिया में भी #MeToo ने सनसनी मचा रखी है. और अमेरिका में हार्वी वाइन्सटीन की गिरफ्तारी की भांति ही मीटू ने भारत में भी अपनी गिरफ्तारी तो फिलहाल नहीं पर कानूनी कार्रवाई की स्थिति तो पैदा कर ही दी है.

#MeToo के आरोपों से घिरे भारतीय मंत्री एमजे अकबर को न सिर्फ अपना विदेश दौर बीच में ही रद्द करना पड़ा है बल्कि अब उनको अपनी चुप्पी भी तोड़नी पड़ी है.  यद्यपि उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों पर स्पष्ट तौर पर स्पष्टीकरण नहीं दिया है फिर भी उनकी बौखलाहट उनके शुरुआती बयानों से सामने आ रही है.

दस दस यौनउत्पीड़न के प्रयासों के आरोपों से घिरे विदेश राज्य मंत्री का कहना है कि ‘#MeToo के तहत मुझपर बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं, जिससे मेरी इमेज को नुकसान पहुंचा है. मुझपर झूठे आरोप लगाने वाली महिलाओं कानूनी कार्रवाई करूंगा.’ उनका मानना है कि ‘चुनाव से पहले इतना तूफान’ षडयंत्र की नियत से उठाया जा रहा है.

एमजे अकबर का जो हालिया वक्तव्य सामने आया है उसके अनुसार उन्होंने कहा, ”आम चुनावों से कुछ महीने पहले यह तूफान क्‍यों उठा है? ऐसा लगता है यह कोई एजेंडा है. इन गलत और भद्दे आरोपों से मेरी साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. झूठ के पांव नहीं होते लेकिन इसमें  जहर ज़रूर होता है. मेरे खिलाफ यह उन्‍माद फैलाया जा रहा है औऱ ये आरोप परेशान करने वाले हैं.”

(पारिजात त्रिपाठी)

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