मोदी जैसा कोई नहीं !

लोकसभा 2019 चुनाव परिणामों के आने से दो दिन पहले से ही माहौल जश्न का है - जनता में भी और भारतीय जनता पार्टी में भी..

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आधुनिक राजनीति के महाभारत में अर्जुन हैं नरेंद्र मोदी और उनका गांडीव है राष्टवाद साथ में उनके सारथी हैं अमित भाई शाह

आज है 21 मई, 2019. दो दिन बाद 17वीं भारतीय लोकसभा चुनाव के परिणाम आ रहे हैं. अभी सामने आये कुल 13 एक्ज़िट पोल्स के नतीजों ने ज़ाहिर कर दिया है कि मोदी का सामना कर पाने में विपक्ष बुरी तरह से नाकाम रहा है और हद से हद 122 के आंकड़े को ही मोदी का विपक्षी गठबन्धन छू सकेगा.

मोदी के विपक्षी कितने बौखलाए हुए हैं यह उनकी प्रतिक्रियाओं से पता चलता है. एक तरफ उनका कहना है कि एक्ज़िट पोल फ़र्ज़ी हैं, निकम्मे हैं; वहीं दूसरी तरफ वे ये मान कर भी चल रहे हैं कि मोदी ही जीत रहे हैं और अगले प्रधानमंत्री के तौर पर कुर्सी पर वो ही बैठने वाले हैं. इसी डर से सम्मिलित हो कर विपक्ष ने ईवीएम का अरण्यरोदन भी शुरू कर दिया है.

आज चुनाव आयोग के सामने मोदी के विपक्षी अपने भय को शिकायत का मुलम्मा चढ़ा कर पेश किया है. लेकिन सब जानते हैं कि ढाक के तीन पात. या अंग्रेजी में कहें तो बैक टू स्क्वेयर वन.  कोई फर्क नहीं पड़ना है. फर्क तो तब पड़ता जब कोई मुद्दा होता. आप जीतें तो आपका कमाल, मोदी जीते तो ईवीएम की धांधली.

अब विपक्ष को अपने भय से निजात पाना होगा वरना एक जुमला और तैयार हो जाएगा – डर के आगे हार है!  और अपने भय से निजात पाने के लिए उनको हकीकत से समझौता करना होगा. मोदी को आने से कोई नहीं रोक सकता.  वैसे भी मोदी नहीं जीतते तो भी विपक्ष हार ही जाता क्योंकि इस तरफ तो एक ही प्रधानमंत्री हैं विपक्ष में तो सारे ही प्रधानमंत्री हैं. प्रधानमंत्रियों से भरपूर विपक्ष नेस्तनाबूद होता नज़र आ रहा है. एक अकेले मोदी ने सबको परास्त कर दिया है.

आधुनिक राजनीति के महाभारत में अर्जुन हैं नरेंद्र मोदी. राष्ट्रवाद उनका गांडीव है और सारथी हैं अमित भाई शाह. उनके पास कृष्ण नहीं हैं, उनके पास चाणक्य हैं. अमित शाह गीता का ज्ञान नहीं देते, राजनीति के रण में विजय की नीति देते हैं. वे दार्शनिक नहीं हैं, शुद्ध व्यावहारिक हैं. राजीनीति के व्यवहार में वे शुद्ध व्यवसायी हैं जिन्हें नुकसान कमाना नहीं आता.

और मोदी-शाह की ये जोड़ी संपूर्ण विपक्ष पर भारी पड़ी है. वो भी तब जब घाट घाट का पानी पिये विपक्ष के विभिन्न नेतागण सारे एक ही छतरी के नीचे आ गये. भाजपा नामक मोदी का रथ निरंतर प्रगतिमान है. कहा तो ये गया है कि अब की बार मोदी सरकार..पर जो हालात हैं उससे तो ये लग रहा है कि बार बार हर बार – मोदी सरकार, मोदी सरकार!!

कहने का मतलब ये है कि 2014 के  बाद 2019 में भी वही चुनाव परिणाम रिपीट होने वाले हैं जो कि और भी भारी हो कर सामने आने वाले हैं. कारण यही है कि चुनावी तराजू का एक बांट तो बहुत भारी है और दूसरा हल्के से हल्का होता जा रहा है.

एक तरफ मोदी हैं तो दूसरी तरफ सारे कच्चे खिलाड़ी. जंग बराबर की नहीं है इसलिये मोदी को वाकओवर का मिलना हर बार तय है जब तक कि मोदी के सामने कोई मोदी जैसा न आ जाये. लेकिन आज का सच तो है बस यही कि – मोदी जैसा कोई नहीं !!!!

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