राहुल का दौरा और दिग्गी की दूरी

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इस लेख में कहानी है एक राजा और एक राजकुमार की. अब राजकुमार बन गया है राजा और तथाकथित राजा रंक हो गया है. जी हाँ, मध्यप्रदेश के इस चुनावी ड्रामे की पटकथा में राहुल गांधी हैं राजकुमार और दिग्विजय सिंह हैं राजा.

राहुल न होते तो पता ही नहीं चलता की मध्यप्रदेश में चुनाव हो रहे हैं. राहुल के आनेजाने से कांग्रेस पार्टी की थोड़ी गहमागहमी नज़र आई और जनता में न सही, प्रदेश के कांग्रेसियों के मन की अंदर यह आशंका जागने लगी है कि कहीं हम जीत न जाएँ!

राष्ट्रीय स्तर पर उबरने की कोशिश करती कांग्रेस मध्यप्रदेश में भी मृतप्राय स्थिति में ही थी. किन्तु अब विधानसभा चुनाव के दौर में उसका संघर्ष उसमे आत्मविश्वास पैदा करने का प्रयास कर रहा है. इसी सिलसिले में राहुल गांधी मध्यप्रदेश के दौरे पर पधारे हुए हैं.

उज्जैन में अपने दौरे के दौरान राहुल ने भोलेनाथ की पूजा अर्चना कर मन ही मन उनसे प्रदेश में जिताने की मांग भी की. किन्तु उनके साथ वो बड़े चेहरे नहीं नज़र आये जो एक ज़माने में प्रदेश के राजा हुआ करते थे. जब राजा जी से पूछा गया तो वे बोले कि आदेश नहीं है!

जी हाँ, हम उसी व्यक्ति की बात कर रहे हैं जिसकी अनुमति के बिना प्रदेश में पत्ता भी नहीं खड़कता था, वही व्यक्ति जो कि किसी राजपरिवार से सम्बंधित है. जी हाँ हम दिग्गी राजा की बात कर रहे हैं. दिग्गी राजा दस साल मध्यप्रदेश के भी राजा रहे हैं. दस साल के अपने मुख्यमंत्रित्व काल में प्रदेश में कोई काम हुआ हो या न हुआ हो, दिग्गी राजा ने कुख्याति जम कर कमाई. और इसी वजह से जनता ने उनसे कुर्सी छीन कर उनको धराशाई कर डाला.

उसके बाद दिल्ली आ गए दिग्गी. केंद्र में नेतागिरी की और मीडिया ने उनको वरिष्ठ नेता बोल बोल कर उनका आत्मविश्वास प्रबल करती रही. पर हुआ कुछ ख़ास नहीं. अपने उलूल जुलूल बयानों से जम कर बदनाम हुए दिग्विजय सिंह और फिर वे मीडिया में भी दिग्गी राजा से दिग्गी ही रह गए.

अब जब उनकी पार्टी के राजकुमार राहुल जो कांग्रेस में आलाकमान बन चुके हैं, मध्यप्रदेश चुनाव प्रचार की कमान सम्हाले हुए हैं और उज्जैन में हैं, तब दिग्गी उनके साथ नहीं हैं. पूछने पर उन्होंने बताया कि – मुझे क्षमा करें, अध्यक्ष जी ने दूसरे जरूरी काम सौंपे हैं.

और इससे बड़ी दुःख की बात दिग्विजय सिंह के लिए क्या हो सकती है कि उन्हें खुद ही ट्वीट करके दुनिया को बताना पड़ा कि वे मध्य प्रदेश में कांग्रेस और राहुल गांधी की चुनावी रैलियों से दूर रहेंगे.

अब इस ट्वीट के बाद राजा के रंक होने का पूर्वानुमान लगाना मूर्खता होगी क्योंकि अब साफ़ है कि राजा तो रंक ही है. सिर्फ राहुल से दूरी होती तो भी बात ठीक थी कि जुबान फिसल जाती है दिग्गी राजा कि इसलिए राजकुमार ने ख़तरा नहीं उठाया. किन्तु कांग्रेस से भी दूर रहेंगे पूर्व महाराज – ये महराज की फकीरी की इंतेहा नहीं तो और क्या है!

कहा जाता है कि हर बारह साल में तो किसी राजा के भी दिन फिर जाते हैं.. लेकिन दिग्गी राजा के दिन तो पंद्रह साल बाद भी नहीं फिरे. और आज इस प्रदेश का राजा अपने ही प्रदेश में अजनबी बन कर रह गया है.

(पारिजात त्रिपाठी)

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