सिद्धू की पाकिस्तान यात्रा : एक सोची-समझी रणनीति

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ये है कांग्रेस की सिद्धू-नीति.. राहुल गाँधी अपनी समझदारी पर मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं और ऊपर से खामोशी का जनेऊ पहने हैं.

हैरानी की बात तो ये है कि लोग हैरान क्यों हैं..क्योंकि हैरान होने जैसी कोई बात नहीं. अगर कोई कांग्रेस को जान जाएगा तो ये भी जान जाएगा कि सिद्धू या सिद्धू जैसा कोई नेता पाकिस्तान क्यों जाएगा..

सिद्धू पाकिस्तान नहीं गए, ये गलत होगा कहना कि सिद्धू पाकिस्तान गए. सिद्धू न पाकिस्तान गए न बाजवा, चीमा या चावला से मिले. पाकिस्तान गई है कांग्रेस और उसका प्रतिनिधि मिला है इमरान से, चीमा से बाजवा से और चावला से.

किसी भी तरह यह सम्भव नहीं कि यदि  पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पाकिस्तान जाने को ‘न’ कहते हैं तो सिद्धू पाकिस्तान जाने को हाँ कैसे कह सकते हैं? यह समझने की बात है. चित भी मेरी पट भी मेरी. एक तरफ कैप्टन अमरिंदर सिंह के माध्यम से कांग्रेस ने देश को सन्देश दिया कि कांग्रेस पाकिस्तान जाने के पक्ष में नहीं है. वहीं सिद्धू को पाकिस्तान भेज कर दुहरी चाल चली कांग्रेस ने. यहां फिर एक तीर से दो शिकार किये. देश के मुसलमानों को बताया कि कांग्रेस के वोटर बने रहिये, कांग्रेस को पाकिस्तान से प्यार था, प्यार है और प्यार रहेगा. हमारा नुमाइंदा पाकिस्तान न सिर्फ जा रहा है बल्कि बार-बार जा रहा है. और सिर्फ बार-बार जा ही नहीं रहा है बल्कि पाकिस्तान के नेताओं को गले भी लगा रहा है.

और क्या चाहिए जी, सेना सीमा पर पाकिस्तानी गोलीबारी की शिकार होती रहे या कश्मीर में पाकिस्तान के भेजे आतंकी हमारे सैनिकों की जान लेते रहें, पाकिस्तान को कांग्रेस का सन्देश बिलकुल साफ है – ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे.. चाहे वो आतंकी नेता हो या गैर आतंकी नेता याने वह पाक हो या नापाक नेता, पाकिस्तान में हम सबके गले लगेंगे और सबको अपने भावी ‘सहयोगियों’ के तौर पर जोड़े रखेंगे.

इस रणनीति के मास्टर-माइन्ड बन कर महामहिम राहुल गाँधी जी अपनी समझदारी पर मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं और ऊपर से खामोशी का जनेऊ भी पहने हैं.

ये है कांग्रेस की शातिर चाल. सिद्धू तो सिर्फ मोहरे हैं..वरना मज़ाल है सिद्धू की या किसी भी दूसरे कोंग्रेसी नेता की कि पाकिस्तान जाने का नाम भी ले लेता ..ये जानते हुए कि लोकसभा चुनाव सिर्फ पांच महीने दूर हैं!

एक तरफ इमरान का जोशीला जुमला सुनाई दिया – मेरा दोस्त सिद्धू !! तो दूसरी और सिद्धू की जान लगा कर पढ़ी गई शायरियाँ जो पाकिस्तान की शान में उन्होंने पढ़ी..उनका बस चलता तो इमरान के सामने बाकायदा गा भी देते – ‘आपको देख कर देखता रह गया..’ और गाते-गाते नाच भी देते..भले ही लोगों को दिखा नहीं पर सिद्धू ने यही किया मगर दूसरी तरह से किया..

सिद्धू ने देश के स्वाभिमान की परवाह नहीं की, देश की सेना के अपमान की परवाह नहीं की, देश की भावना को ठुकराया और दुश्मन देश के नेताओं को गले लगाया. अगर पाकिस्तानी नुमाइन्दे या नेता  हिन्दुस्तान में होते और आप उनसे मिलते तो भी शायद बात इतनी बड़ी न होती जितनी बड़ी अब हो गई है जब आप पाकिस्तान जा कर आडवाणी जी वाला कार्य कर रहे हैं. जिन्ना के पुजारी आडवाणी जी की गति क्या हुई, सबको पता है. अब सिद्धू भी आडवाणी बनने वाले हैं कांग्रेस के.

अब भाजपा के सामने सुनहरा मौक़ा है कि वह देश को बताये कि कांग्रेस का चरित्र सत्ता के लिए कितना पतित हो सकता है, उसकी मिसाल देखिये. जिन खालिस्तानी आतंकियों ने राहुल की दादी जी को गोलियों से भून डाला था, उन्हीं खालिस्तानियों से मिलने के लिए कांग्रेस नेता को भेज रहे हैं राहुल गाँधी. कांग्रेस अध्यक्ष ने हिन्दुस्तानी वोटर को ‘पप्पू’ समझ कर बड़ी भूल कर दी है शायद. उनको जान लेना चाहिये कि इस देश की जनता जान गई है उनका और उनकी कांग्रेस का गोत्र.

(पारिजात त्रिपाठी)

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