तीन नेताओं की जिद ने अटकाईं भोपाल इंदौर की सीटें

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आज है 6 नवम्बर, 2018.

मध्यप्रदेश के चुनावों को टिकट बंटाई ने भी दिलचस्प बना रखा है. प्रदेश की राजधानी भोपाल और मिनी बॉम्बे याने कि इंदौर. दोनों ही शहर मध्यप्रदेश के सबसे अहम शहरों में हैं. और दोनों ही शहरों के भाजपाई प्रत्याशी अभी तक तय नहीं हो पाए हैं.

दरअसल दोनों बड़े शहरों के तीन बड़े भाजपाई नेता इस स्थिति के जन्मदाता हैं. सुमित्रा महाजन को वैसे भी सुमित्रा ताई बना कर इंदौर की जनता ने सम्माननीय बना रखा है. भजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय भी इंदौर से ही हैं और यहां एक समय के लोकप्रिय भजन गायक के रूप में जाने जाते थे. और तीसरे अहम नेता हैं बाबूलाल गौर जो प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. तीनों की मांग अपने-अपने प्रत्याशियों को इंदौर और भोपाल से टिकट दिलाने की है. ज़ाहिर तीनों की ही मांग एक साथ पूरी नहीं कि जा सकती.

प्रदेश भाजपा में टिकट बंटवारे की टीम अब किंकर्तव्यविमूढ़ है. एक की मानें तो दूसरा रूठ सकता है, फिर तीसरा भी है, उसका क्या किया जाए. स्थिति यह है कि तीनों में से कोई एक भी कोप भवन में चला गया तो प्रदेश चुनाव में भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकता है.

ऐसी हालत में पार्टी को ट्रम्प कार्ड इस्तेमाल करना पड़ रहा है. अब इन दो शहरों के भाजपाई टिकटों के वितरण की जिम्मेदारी दे दी गई है पार्टी प्रमुख अमित शाह को. ज़ाहिर है अनुशासनप्रिय मोदी और शाह के नेतृत्व में पार्टी के नेताओं को अनुशासन का प्रदर्शन न केवल अपेक्षित कर्तव्य है बल्कि उनकी विवशता भी है.

कल सोमवार को भाजपा की तरफ से अपने प्रत्याशियों की जो द्वितीय सूची जारी की गई है उसमें भी इंदौर को लेकर प्रत्याशी का नाम रिक्त रखा गया है. 17 प्रत्याशियों की इस सूची में इंदौर के अतिरिक्त भोपाल की गोविंदपुरा व उत्तर सीट पर भी निर्णय नहीं हो सका है.

इसकी वजह लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटों की दावेदारी है जो इंदौर में प्रत्याशियों के फैसले को लेकर सहमति नहीं बनने दे रही है. इन सीटों में इंदौर की क्षेत्र क्रमांक एक से पांच, महू, राऊ, देपालपुर और सांवेर की सीट भी सम्मिलित है.

तीसरे नेता बाबूलाल गौर भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के बीच प्रदेश के सर्वोच्च नेताओं में एक हैं. उनकी अनदेखी भी नहीं की जा सकती. इस कश्मकश को मद्देनज़र रख कर पार्टी अब इंदौर की इन 9 सीटों और भोपाल की एक सीट के प्रत्याशी के चयन का काम राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सौंप दिया है.

सुमित्रा ताई चाहती हैं कि इंदौर में उनके बेटे मंदार को टिकट मिले जबकि कैलाश विजयवर्गीय अपने बेटे आकाश को टिकट दिलाना चाहते हैं. इसके पहले रविवार को मुख्यमंत्री आवास में हुई मीटिंग भी इन सीटों को लेकर बेनतीजा ही रही. तब यह निर्णय किया गया कि अमित शाह और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल इस पर गौर करें.

इधर भोपाल में गोविंदपुरा की सीट के लिए बाबूलाल गौर और उनकी बहू कृष्णा गौर नाराज चल रहे थे. इन्होने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ने की धमकी दे डाली है. लेकिन कल बाबूलाल गौर का बयान आया कि मैंने फैसला पार्टी पर छोड़ दिया है. यदि पार्टी टिकट देगी तो ठीक है नहीं तो कोई बात नहीं.

उनकी बहू ने भी पार्टी के निर्णय को शिरोधार्य कर लिया है, ऐसा लगता है. कृष्णा गौर के नए वक्तव्य के अनुसार – पार्टी जो भी निर्णय लेगी वे उसी हिसाब से काम करने को तैयार दिख रही हैं. बताया जाता है कि रविवार की संध्या नरेंद्र सिंह तोमर ने उन्हें काफी गौर से समझाया था.

(पारिजात त्रिपाठी)

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