CBI : आलोक वर्मा बनाम राकेश अस्थाना

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आलोक वर्मा बनाम राकेश अस्थाना ..

इस लड़ाई का सिर्फ़ एक कारण है…कांग्रेस बनाम भाजपा सरकार ।

निदेशक पद पर तीन वर्ष पूर्व सरकार के न चाहने के बावजूद आलोक वर्मा की नियुक्ति कांग्रेस कराने में सफल हो गयी थी।

दो वर्ष पूर्व फिर कांग्रेस के न चाहने के बावजूद सीबीआई मे दो नम्बर पर राकेश अस्थाना की नियुक्ति सरकार करने मे सफल हुयी।

अब झगड़ा किस बात का है ? इन नियुक्तियो का कार्यकाल अमूमन बीच में ख़त्म करके अधिकारियों को हटाया नही जा सकता ।क्योंकि इनकी नियुक्ति पीएम- सीजेआई-विपक्ष के नेता की कमेटी करती है।

और इसलिए जो नियुक्त हो गया सो हो गया । चाहे वह अच्छा हो या बुरा हो। कांग्रेस ने ऐसी ही करप्ट प्रक्रियायें सर्वत्र स्थापित करके रखी है-दशकों से।

फिर , अब नया यह है कि जनवरी में आलोक वर्मा का कार्यकाल ख़त्म होगा तो कोई अप्रत्याशित बात नहीं हुयी तो नम्बर दो की हैसियत के राकेश अस्थाना सीबीआई निदेशक बन जाएँगे । और कांग्रेस यही नहीं होने देना चाहती है।

क्यों ?

क्योंकि अगस्ता वेस्टलैंड ,कोयला घोटाला चारा घोटाला , विजय माल्या समेत अनेक मामले राकेश अस्थाना देखते रहे हैं।

इसलिए वह एक जाल रचती है क़ुरैशी और सतीश सना के मार्फ़त राकेश अस्थाना को फँसाना चाहती है- फँसने पर उनके अधीनस्थ सहयोगी देवेंद्र को क़ुरैशी मामले में रिश्वत दिलवाकर फँसा लेती है।जिसके लिए देवेंद्र को गिरपतार कर लिया गया है।

अब अलोक वर्मा के मार्फ़त कांग्रेस चाहती है कि इसी में राकेश अस्थाना को भी येन केन प्रकारेण फँसा दिया जाए। ताकि उनकी जनवरी में सीबीआई निदेशक की नियुक्ति होने से रोका जा सके।

क्योंकि कांग्रेस लालू को बचाने का ठेका ली हुयी है तभी लालू राहुल के साथ खड़े होंगे। क्योंकि कांग्रेस अगस्ता वेस्ट लैंड, विजय माल्या आदि मसलो से पीछा छुड़ाना चाहती है।

और कांग्रेस कैसे करेगी ?

मास्टर प्लान यह है..,राकेश अस्थाना को निपटा देना। जनवरी में जब नियुक्ति पर विचार के लिये कमेटी बैठेगी तो CJI गोगई और विपक्ष के नेता खड़गे ,दोनो की राय एक होगी , मोदी अकेले रहेंगे।

इस तरह बहुमत से फिर एक बार कांग्रेस के किसी तोता वहाँ बैठाने की साज़िश सफल हो जाएगी।

लेकिन यदि राकेश अस्थाना की छवि ख़राब न हो सकी तो नम्बर दो से नम्बर १ पर नियुक्त होने से उन्हें रोकने की हिम्मत नियुक्ति कमेटी के शेष दोनो मेम्बरान नहीं कर पाएँगे।

वे ऐसा कर सकें इसके लिए अक्तूबर से ही यह जाल बुना जा रहा है। फ़िलहाल जिसे कांग्रेस के चम्मच आलोक वर्मा, बीजेपी और राकेश अस्थाना को खलनायक की तरह पेश करेंगे।

जबकि वास्तविकता यह है की हर संस्थान का पूरी तरह से पिछले कुछ दशकों मे कांग्रेसिकरण किया जा चुका है।

अब जब दीमक साफ़ करने की कोशिश हो रही तो कभी किसी संस्थान में तो कभी किसी खम्भे से, कांग्रेसी जिन्न रुदन करते, तो कभी हल्ला करते बाहर आ रहे हैं।

सीबीआई में भी यही हो रहा है।

(जीपी सिंह)

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