30 अप्रेल को होने वाली अगली सुनवाई में जवाब देना होगा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को.

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल को भेजे अपने नोटिस में पूछा है कि चौकीदार कौन है ?
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है.
वजह ये है कि राहुल गाँधी ने कोर्ट के पिछले सवाल का जवाब बड़े ही लापरवाह तरीके से दिया था.

प्रधानमंत्री को चोर कहने पर उनसे स्पष्टीकरण माँगा था सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी ने अपने जवाबी पत्र की तमाम पंक्तियों में से एक पंक्ति में ही खेद जता कर अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया था. चूंकि राहुल गाँधी ने कोर्ट के प्रति अपने जवाब को गंभीरता से नहीं लिया इसलिये उनका जवाब सुप्रीम कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर सका. अपने जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ लापरवाही जताते हुए मामूली सा एक खेद प्रगट किया था.

ये मामला बड़ी अदालत अर्थात सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना का है. राहुल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कल कहा था कि हमें तो नोटिस भी नहीं हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात का संज्ञान ले लिया और जवाब में आज सुप्रीम कोर्ट ने एक नोटिस कांग्रेस अध्यक्ष को भेज दिया है. ये नोटिस राहुल गांधी को आपराधिक अवमानना का नोटिस है.

कांग्रेस की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं. मामूली अवमानना पर ही जेल की सजा मिल सकती है
यहां तो आपराधिक अवमानना का मामला है. यदि अगली सुनवाई में राहुल गाँधी सर्वोच्च न्यायालय को अपने जवाब से संतुष्ट कर सके तो ठीक है वरना उन्हें जेल की रोटी खानी पड़ सकती है
चूंकि इस मामले में ज़ाहिर ही है कि राहुल गाँधी के पास कोई संतुष्टिजनक जवाब नहीं है
इसलिए उनके जेल जाने की संभावना नज़र आती है.

क्या होती है न्यायालय की आपराधिक अवमानना
अदालत की अवमानना से तात्पर्य आम तौर पर उस आचरण का उल्लेख है जो अदालत के निर्णय और आदेश की अवहेलना करता है, अदालत के अधिकार का अपमान करता है या अदालत की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाता है.

क्या हो सकती है सजा
माननीय न्यायाधीश ऐसे दोषी को अदालत के आदेश का उल्लंघन करने के लिए दण्डित करते हैं
और नागरिक अवमानना प्रतिबंधों का उपयोग असामाजिक या अवैधानिक नागरिकों को अदालत के अधिकार एवं सम्मान के लिए विवश करते हैं. अवमानना के मामले पर दंड दो दशाओं पर निर्भर करता है :
एक तो मामले की गंभीरता पर दूसरा अदालत के स्तर पर. मामला गंभीर हो, या स्पष्ट हो कि दोषी ने जानबूझ कर ऐसा किया है तब आर्थिक दंड या जेल अथवा दोनों भी हो सकते हैं. अदालत यदि छोटी हो, स्थानीय अदालत हो तो आर्थिक दंड की संभावना अधिक होती है. और यदि उच्च न्यायायलय हो तो जेल की संभावना अधिक होती है. किन्तु सर्वोच्च न्यायालय के मामले में जेल और अर्थ दंड दोनों की संभावना पूर्ण होती हैं.

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