दिल्ली में ये है Kejri-हाल : ऑक्सीजन-घोटाले वाली चाल

सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी ने किया है ये दावा - दिल्ली ने जरूरत से चार गुना अधिक ऑक्सीजन की मांग की..

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दिल्ली के मुखिया का ये है हाल..नाम है केजरीवाल. बहुत पुरानी बात नहीं है, अभी कुछ माह पहले की ही स्थिति है ये – जब कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर थी और पूरे देश में ऑक्सीजन की कमी थी. ऐसे में ऑक्सीजन की इस कमी को लेकर सबसे ज्यादा हायतौबा दिल्ली में मचा था. उस समय हालत ये थी कि देश भर में ऑक्सीजन की कमी के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार बताया जा रहा था और मोदी सरकार पर हल्ला बोल करने वालों में सबसे आगे थे केजरीवाल.

पैनल की रिपोर्ट आई

कोरोना की दूसरी लहर जब उफान पर थी तब दिल्ली समेत सारे देश में ऑक्सीजन को लेकर चीखपुकार मची हुई थी. मोदी सरकार को निकम्मा साबित करने के लिए दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचाया गया था. इसको सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया और इस पर जांच के लिए एक पैनल गठित की थी. अब इस पैनल का दावा है कि दिल्ली सरकार ने जरूरत से चार गुना अधिक ऑक्सीजन का मांग की थी.

अरविन्द केजरीवाल हैं कठघरे में

अपनी जांच रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी ने किया है ये खुलासा. इस कमेटी का दावा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री जितनी जरूरत थी उससे दुगुना या तिगुना नहीं बल्कि चार गुना अधिक ऑक्सीजन की डिमांड कर ली थी. सीधे सीधे कहें इस बात को तो ऑक्सीजन ऑडिट टीम ने कोरोना की दूसरी लहर यानी 25 अप्रैल से 10 मई के बीच दिल्ली में ऑक्सीजन की जरूरत को चार गुना अधिक बढ़ाने को लेकर दिल्ली के मुख्यंत्री अरविन्द केजरीवाल को कटघरे में खड़ा किया है. इस पैनल ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है और बताया है कि दिल्ली को ऑक्सीजन की आपूर्ति के कारण दूसरे बारह राज्यों में ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित हो सकती थी

केजरीवाल की हरकत का अर्थ

इसका अर्थ ये है कि केजरीवाल ने केंद्र सरकार से झूठ बोलै था. इसका ये भी अर्थ है कि ऐसा करके उन्होंने पक्का कर लिया था कि ऑक्सीजन को लेकर केंद्र सरकार और विशेषकर मोदी पर चढ़ाई का अवसर उनको मिल जाएगा. इतना ही नहीं इसका ये भी अर्थ है कि इस तरह ज्यादा ऑक्सीजन ले कर दूसरों का हिस्सा मारने की कोशिश की थी दिल्ली के मुख्यमंत्री ने. और इसका अर्थ तो ये भी है देश के दुसरे हिस्सों में में कोरोना से मर रहे जरूरतमंदों को मारने की तैयारी कर ली थी केजरीवाल ने. अब सवाल ये है कि न्यायिक अदालत में इसे केजरीवाल का झूठ माना जाएगा या इसे धोखाधड़ी कहा जाएगा या फिर इसे षड्यंत्र की तरह लिया जाएगा – क्योंकि जो केजरीवाल ने किया है वह सामान्य श्रेणी का धोखा नहीं है – हो सकता है देश में कई लोग भी इस कारण जान से हाथ धो बैठे हों.

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