Israel के NSO ग्रुप वाले पेगासस स्पाईवेयर ने मचाया संसद में कोहराम

0
216
संसद के मॉनसून सत्र से पहले फोन हैकिंग से जुड़ा मामला सामने आया है. इस मुद्दे को लेकर कई भारतीयों के सर्विलांस का आरोप लगाया गया है. मीडिया सूत्रों के अनुसार ऐसे भारतीयों नामों की सूची बहुत लंबी है जिनमें पत्रकारों से लेकर कारोबारियों, मंत्रियों और सुप्रीम कोर्ट जज का तक के नाम हैं जो डेटा लीक हुए उसमें पचास हजार से भी अधिक फोन नंबरों की सूची है.

‘भारतीय फोन नंबर्स को बनाया है निशाना’

पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए भारतीय मोबाइल नंबर्स को निशाना बनाए जाने का ये खुलासे सामने आया है. संसद के मॉनसून सत्र में विपक्षी दलों द्वारा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया है. हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला सोमवार सुबह होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में होने की बात भी सामने आई है. केंद्रीय सरकार इस पूरे मामले में कहीं भी कमजोर नही. इस मामले की गहराई से तहकीकात के लिये सरकार ने एक मजबूत डिफेंस नियुक्त किया है जो विपक्ष के हमलों को निष्क्रिय करेगा.

कांग्रेस को मिला है मौका

कांग्रेस इस मामले को उठाने के लिये बेकरार नजर आ रहा है जो बड़ा ही असामान्य लग रहा है. देश की संपति भगौड़े विदेशों में ले जाते हैं तब ऐसे मामलों पर कांग्रेस चुप्पी साध जाती है परन्तु पैगासस विवाद में इसकी उत्सुकता का अभिप्राय सर्वविदित है.इसकी आड़ में बस सरकार को निशाना बनाये जाने का प्रयास है परन्तु इस कांग्रेसी विरोध से सरकार बिल्कुल भी प्रभावित नही है.

‘उच्चन्यायालय करे जाँच’

आनंद शर्मा ने पैगासस मामले में उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच करने की बात रखी है. उन्‍होंने ये भी कि “विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, संपादकों, सुप्रीम कोर्ट जजों, बड़े कारोबारी नेताओं के फोन टैप हो रहे हैं. जो कुछ भी सामने आ रहा है, उस बारे में संसद के पटल पर आशंकाएं पहले ही व्‍यक्त की जा चुकी हैं. यह चर्चा या बहस का सवाल नहीं है. इसकी खुली जांच होनी चाहिए, कोई सरकारी जांच नहीं. कानून और संविधान के तहत जवाबदेही तय होनी चाहिए. हम इसी के लिए लड़ेंगे.”

कॉमरेडों ने उठाई आवाज

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेता विनय विश्‍वम ने बताया कि राज्‍यसभा में बाकी सभी काम बंद कर वे इस मसले पर चर्चा के लिए नोटिस भेजेगें. उन्‍होंने ये भी कहा कि “फासीवाद का इतिहास बताता है कि अपने डर से पार पाने के लिए फासीवादी किसी भी हद तक जा सकते हैं. मैं संसद में स्‍थगन प्रस्‍ताव का नोटिस दूंगा.” असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि “सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने NSO ग्रुप की सेवाएं ली हैं या नहीं. पेगासस सॉफ्टवेयर NSO का ही उत्‍पाद है”.

‘सरकारी सर्विलांस है ये’

कांग्रेस ने इस मसले को ‘सरकारी सर्विलांस’ बताया है और ये भी कहा कि यह संवैधानिक लोकतंत्र के ढांचे और लोगों की प्राईवेसी पर करारा प्रहार है. कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि , “सरकार यह कहकर बच नहीं सकती कि उन्‍हें वेरिफाई करना होता है या कुछ और. ये बेहद गंभीर मसले हैं. कौन-सी एजेंसियां हैं जिन्‍हें  स्पाईवेयर मिला है? किन एजेंसियों ने पेगासस खरीदा? यह कोई ऐसी बात नहीं है जिससे सरकार भाग सके.”

सरकार ने दिया पूरे संयम का परिचय

विपक्ष की विरोधी प्रतिक्रियाओं से  सरकार के संयम में कोई परिवर्तम नहीं दिख रहा है. सरकार ने बातों को दोहराते हुए बताया कि किसी प्रकार का ‘अनाधिकृत इंटरसेप्‍शन’ नहीं हुआ है. मीडिया सूत्रों के अनुसार इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना मंत्रालय (MEITY) ने ये दावा किया है कि “हमें किसी बात का डर नहीं है, सरकार के पास छिपाने को कुछ नहीं. हम हर सवाल का जवाब देंगे। न्‍यूज आर्टिकल से कुछ साबित नहीं होता। असल में, पेगासस को सरकार से जोड़ने के लिए पिछले प्रयास फेल हो गए हैं.”

आरोप आधारहीन हैं

रविवार को जारी रिपोर्ट को खारिज़ करते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि “‘इन बातों का कोई ठोस आधार नहीं है.” आधारहीन तथ्यों को नकारते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि ‘भारत एक लचीला लोकतंत्र है और वह अपने सभी नागरिकों के निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के तौर पर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

 

पूछता है देश: क्या रफायल और स्टेन स्वामी की भेंट चढ़ जायेगा ये संसद सत्र भी?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here