6 फरवरी को क्या फिर हो सकती है हिंसा? किसान देश भर में करेंगे चक्का जाम

कमाल की बात ये भी है कि किसान संगठनों ने फैसला किया है कि ये देशव्यापी चक्का जाम तीन ही घंटों का होगा..

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किसान आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. अब यह देशव्यापी स्तर पर अपना शक्तिप्रदर्शन करने जा रहा है. तारीख चुनी गई है आज से चार दिन बाद की अर्थात 6 फरवरी की. सरकार भी जानती है कि आंदलोलनकारी चुप बैठने वाले नहीं हैं. लेकिन इस बार सरकार मूर्ख बनने के मूड में नहीं है और जिस तरह से किसान कर रहे हैं 6 फरवरी के आंदोलन की तैयारी उसी तरह सरकार भी कर रही है अपनी तैयारी क्योंकि वो नहीं चाहती कि 6 फरवरी को छब्बीस जनवरी की पुनरावृत्ति हो.

तीन कारणों से हो रहा है 6 फरवरी का बंद

इस देशव्यापी चक्काजाम का असली मकसद सरकार को चुनौती देना, आंदोलन को देश भर में फैलाना और सरकार विरोध सभी ताकतों को लामबन्द करना हो सकता है. और इस दौरान 26 जनवरी की घटना की पुनरावृत्ति भी हो जाये तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. यद्यपि इस बार सरकार कोई गलती नहीं करेगी और अपनी तैयारी पूरी रखेगी.

सरकार के खिलाफ देशव्यापी मोर्चे की तैयारी

किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि आन्दोलन को कमजोर नहीं पड़ने देंगे और सरकार के खिलाफ देशभर के किसानों को एकजुट करेंगे. सरकार के तीनों कृषि कानूनों के विरुद्ध दो माही से ज्यादा वक्त से दिल्ली के चारों तरफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने फैसला लिया है कि 6 फरवरी को देशभर में चक्का जाम करेंगे. यह चक्का जाम दिन भर नहीं होगा बल्कि केवल तीन घंटे चलेगा. चक्का जाम की घोषणा करते हुए किसान संयुक्त मोर्चा का वक्तव्य आया है कि 6 फरवरी को आंदोलनकारी किसान दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक प्रत्येक नेशनल और स्टेट हाइवे पर चक्का जाम करेंगे.

सरकार पर लगाया उत्पीड़न का आरोप

किसानों ने सरकार पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है और बीच में कमजोर पड़ गए आंदोलन में जान फूंकने की कोशिश की है. दरअसल सरकार ने दिल्ली के सिंघु, टिकरी और गाजीपुर प्रदर्शनस्थल के आसपास इंटरनेट कनेक्टिविटी बंद कर दी है. इसी को मुद्दा बना कर अब किसानों का कहना है कि वो इंटरनेट शटडाउन और प्रशासन द्वारा किसानों के उत्पीड़न के साथ ही कुछ और भी मुद्दों पर सर्कार के विरुद्ध प्रदर्शन करेंगे.

ये हैं चक्का जाम के कारण

किसानों ने पुलिस और प्रशासन पर कई आरोप लगा कर उनको चक्का जाम का मुद्दा बना दिया है. सिंघु बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया है, आंदोलन के ट्विटर अकॉउंट बंद कर दिए हैं और इस तरह उनकी अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगा दी है. इतना ही नहीं अनोलंकारियों का कहना है कि पुलिस ने मनमाने ढंग से 122 FIR दर्ज की हैं जो गैरकानूनी है.

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