परख की कलम से: जितिन प्रसाद का कांग्रेस पर क्षेत्रीय पार्टी होने का आरोप

स्थिति ये है कि आज बीजेपी कांग्रेस से करीब 7 गुना शक्तिशाली बन चुकी है जबकि स्वस्थ लोकतंत्र में लड़ाई बराबरी की होनी चाहिए..

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जितिन प्रसाद ने कांग्रेस पर क्षेत्रीय पार्टी होने का आरोप लगाया है। अब यक्ष प्रश्न यह है कि क्या अब बीजेपी एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी बची है। यदि आकलन करे तो आज बीजेपी कांग्रेस से करीब 7 गुना शक्तिशाली बन चुकी है जबकि स्वस्थ लोकतंत्र में लड़ाई बराबरी की होनी चाहिए।
2011 के बंगाल चुनाव में कांग्रेस जब पराजित हुई तो बीजेपी ने काँग्रेस पर ज्यादा रियेक्ट नही किया मगर अब जब बीजेपी पराजित हुई तो कांग्रेस अपना अस्तित्व ढूंढने के बजाए जश्न मनाने लग गयी।
कही ना कही कांग्रेस ने यह मान लिया है कि 22 राज्यो में उसका अस्तित्व अब नही रहा। आज कांग्रेस का अस्तित्व सिर्फ पंजाब, छत्तीसगढ़, केरल और राजस्थान में रह गया है। महाराष्ट्र में कुछ हद तक है मगर वहाँ वो चौथे नम्बर पर है और उद्धव ठाकरे के टुकड़ों पर टिकी है।
वही बीजेपी कश्मीर से कन्याकुमारी कही ना कही अपने सांसद या विधायक बैठा चुकी है। किसी भी राज्य के चुनाव में यह नही लगता कि यहाँ तो बीजेपी का कोई रोल था ही नही। बीजेपी एक बड़ी कंटेस्टेंट है इसका ऐलान कांग्रेस खुद जश्न मनाकर करती है।
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस जीतना तो दूर उल्टे तीसरी पार्टी बनने से बची है। संभव है 2024 में यदि बीजेपी बहुमत से चुके भी तो जो भी गठबंधन बनेगा वह बहुत बड़ा होगा और इसमें कई बिकाऊ लोग होंगे। वही आज बीजेपी को पैसे की कोई दिक्कत नही है।
बीजेपी की पूँजीवादी नीतियों ने पश्चिमी देशों को बहुत आकर्षित किया है। अमेरिका और यूरोप जानते है कि यदि भारत मे बने रहना है तो बीजेपी आवश्यक है। कांग्रेस बार बार कम्युनिस्टो को गले लगाकर लोकतांत्रिक देशो से दुश्मनी ले रही है।
यदि 2024 में बीजेपी को बहुमत नही भी मिला तो ऐसा लगता है कि बीजेपी अबकी बार नेता नही बल्कि पूरी पार्टी ही खरीद लेगी। क्या ठाकरे, ममता, अखिलेश, रेड्डी और लालू बिकाऊ नही है??
ये सभी किसी समय बीजेपी के सहयोगी रह चुके है वे स्वार्थ सिद्धि के लिए अलग हुए है ना कि विचारधारा से। स्वार्थ कैसे भी समाप्त हो सकता है। मूल समस्या कांग्रेस के अस्तित्व की है।
यदि गांधी परिवार अब सन्यास ले और थोड़े अच्छे नेता कांग्रेस में ऊपर आये तो ही लोकतंत्र आप महसूस कर सकेंगे अन्यथा भारत मे कम से कम अगले 15 वर्षो के लिये वन पार्टी रूल ही समझिए।
(परख सक्सेना)

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