West Bengal Polls 2021: बंगाल के दंगल में पीएम मोदी का लुक गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की याद दिलायेगा

बीजेपी को पूरी उम्मीद है कि बंगाल का राजनीतिक दंगल वो वैसे भी जीतने जा रही है और ऐसे भी जीतने वाली है. पीएम मोदी के नए लुक से टैगोर की धरती के बंगाली भाई प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाएंगे..

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पीएम मोदी समय से पहले चलते हैं. आज जो आप सोच रहे हैं, वो पहले ही सोच चुके होते हैं और उससे कहीं बहुत आगे बढ़ भी चुके होते हैं. आज से चौथे महीने है बंगाल का राजनीतिक दंगल लेकिन आज से चार माह पहले से ही मोदी इसके लिए अपनी तैयारी पूरी कर चुके हैं. बंगाल के मल्ल्युद्ध हेतु अखाड़े के उस्ताद के तौर पर उनका गेटअप रेडी है और मई महीने में जब वे बंगाल के लोगों को अपने भाषण से मंत्रमुग्ध कर रहे होंगे, उनका व्यक्तित्व भी उन्हें उतना ही मोहित कर रहा होगा.

रेशमी गोरे बाल और लम्बी लहराती दाढ़ी

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर बंगाल की धरती पर पितामह की भांति आदर से देखे जाते हैं. आज वे दुनिया में नहीं हैं किन्तु आज दुनिया में उनकी तरह ही एक दूसरा तेजस्वी व्यक्तित्व है जिसका नाम है नरेंद्र मोदी. पीएम मोदी के बाल भी रेशमी और गोरे अर्थात श्वेत हैं और उनके लम्बे हो चुके बाल भी गुरुदेव के मुखमंडल का स्मरण कराती है. बंगाल की धरती पर जब मई माह में पीएम मोदी उतरेंगे तो उनमें लोगों को गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ही दिखाई देने वाले हैं.

भाषा भी बंगाली बोल सकते हैं प्रधानमंत्री

ममता के गढ़ में उनको जबरदस्त पटखनी देने के लिए भाजपा का रथ तैयार है और उसके सेनापति नरेंद्र मोदी के तरकश में सारे तीर हैं जो न केवल ममता को हैरान कर सकते हैं बल्कि उनको बुरी तरफ परेशान भी कर सकते हैं. मोदी अपने मुखमंडल, अपनी लम्बी दाढ़ी और बालों से बंगाल के वोटर को गुरुदेव का स्मरण कराने वाले तो हैं ही साथ ही उसकी आत्मा को गदगद कर देने के लिए सम्भव है बांग्ला भाषा का इस्तेमाल करें और अपने भाषण से बंगाल की जनता का हृदय जीत लें.

परिधान भी गुरुदेव जैसा हो सकता है

पीएम मोदी स्वयं भी गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर से प्रभावित हैं विशेषकर उनके द्वारा रचित ऐतिहासिक महाकाव्य ‘गीतांजलि’ का दर्शन मोदी को बहुत प्रिय है. मोदी अपने भाषणों के दौरान अपना परिधान भी गुरुदेव जैसा ही रख सकते हैं और उनकी ‘गीतांजलि’ की पंक्तियों से अपने भाषण की शुरुआत भी कर सकते हैं. ‘आमार शोनार बंगाल’ और ‘मोरिते चाहिना आमी शुंदर भुबने’ जैसी मीठी और अमर काव्य पंक्तियों को भी मोदी उद्धृत कर सकते हैं जिसके बाद बजने वाली तालियों की गड़गड़ाहट ममता की रातों की नींद छीन लेगी, इसकी संभावना पूरी है.

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