पूछता है देश: नवनीत कौर राणा मामले में क्या कहता है कानून?

प्रमाणपत्र भी यदि अंततः फर्जी निकला तो उनकी लोकसभा की सदस्यता तो जाएगी ही, साथ में आपराधिक केस भी चलेगा --लेकिन तब तक 5 साल की टर्म शायद संसद में पूरी हो जाएगी.

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नवनीत कौर राणा का जाति प्रमाणपत्र, लोकसभा सीट तो जाएगी ही -साथ में आपराधिक केस भी चलेगा- देखने वाली बात ये है कि इस मामले में क्या कहता है कानून ?
SC के लिए आरक्षित अमरावती सीट से लोकसभा सांसद नवनीत कौर राणा का जाति प्रमाणपत्र 8 जून को बॉम्बे हाई कोर्ट ने निरस्त करते हुए उन पर 2 लाख का जुर्माना लगाया है.
ये आदेश जस्टिस आर डी धानुका और जस्टिस वी जी बिष्ट की खंडपीठ ने दिए –जिसके खिलाफ राणा ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है आज.
उनके SC प्रमाणपत्र को शिव सेना के पूर्व सांसद आनंदराव अडसुल ने नकली बताते हुए शिकायत की थी – हाई कोर्ट द्वारा प्रमाणपत्र निरस्त करने का मतलब है कि वो पहली नज़र में में नकली है.
नवनीत का जन्मदिन 3 जनवरी,1986 है और उसने जाति प्रमाणपत्र लिया 30 अगस्त 2013 को यानि 28 वर्ष बाद, जो अपने आप में संदेह पैदा करता है.
नवनीत कौर राणा के पति रवि राणा भी SC के लिए आरक्षित बडनेरा विधान सभा सीट से 3 बार से MLA हैं – रवि और नवनीत की शादी 3 फरवरी, 2011 को हुई थी और उसी वजह से शायद नवनीत ने भी SC सर्टिफिकेट बनवा लिया.
हाई कोर्ट ने पाया कि नवनीत कौर के मूल जन्म प्रमाणपत्र में उसकी जाति “मोची” नहीं लिखी –और नवनीत कौर ने 2 तरह के दस्तावेज जमा किये जो परस्पर विरोधी हैं.
इतना ही नहीं, नवनीत ने अपनी 2 जातियों का दावा किया –एक “सिख चमार” और दूसरी जाति है “रविदासिया मोची”.
वैसे हाई कोर्ट में बस इतना आरोप लगाया गया कि उन्हें प्रमाणपत्र पति के प्रभाव के कारण मिला लेकिन ये नहीं कहा गया कि पति के SC होने की वजह से प्रमाणपत्र दिया गया.
सरकार के नियमों के अनुसार पिता की जाति से उसके बच्चों की जाति निर्धारित होती है.
-कोई जनरल केटेगरी का आदमी यदि SC लड़की से शादी कर ले तो वो जनरल ही रहे और उसके बच्चे भी जनरल रहेंगे -पत्नी SC रहेगी.
-लेकिन SC आदमी जनरल लड़की से शादी करता है तो लड़की जनरल ही रहेगी परन्तु उनके बच्चे SC होंगे.
–कोई भी SC/ST मुस्लिम या ईसाई हो जाता है तो उसके आरक्षण के लाभ समाप्त हो जाते हैं –इसलिए ईसाई और मुस्लिम मांग कर रहे हैं कि ऐसे धर्म बदलने वालों का आरक्षण जारी रहे -जिससे वो अपना “धर्मान्तरण” का प्रोग्राम चालू रख सकें.
कांग्रेस के अजित जोगी ईसाई थे मगर किसी को बताये बिना ST का लाभ लेते रहे –अंत समय से पहले फर्जी प्रमाणपत्र निरस्त हुआ और आपराधिक केस दर्ज हुआ मगर उसके पहले ही जीसस ने उनको बुला लिया.
लेकिन मर कर भी घोटाला कर दिया -हुए दफ़न मगर “अस्थियां’ विसर्जित कर दी गईं.
नवनीत कौर राणा का प्रमाणपत्र भी यदि अंततः फर्जी निकला तो लोकसभा की सदस्य्ता तो जाएगी ही, साथ में आपराधिक केस भी चलेगा –लेकिन तब तक 5 साल की टर्म शायद संसद में पूरी हो जाएगी.
(सुभाष चन्द्र)

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