पूछता है देश : मीडिया चन्नी पर खामोश क्यों है?

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चरणजीत सिंह चन्नी अगर ईसाई हो गए, तो अनुसूचित जाति के कैसे ? मीडिया क्यों खामोश है ?
सोशल मीडिया पर इस बात का चर्चा आम है कि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने ईसाई धर्म अपना लिया है –उनके फोटो क्रॉस के साथ प्रकाशित हो रहे हैं.
सुदर्शन टी वी पर उनकी पत्नी ने भी स्वीकार किया है वो ईसाई हो गई हैं और उनके एक NGO को विदेश से धन भी मिलता है.
चन्नी और सिद्धू चमकौर साहब के गुरूद्वारे में हलाहुलाई के नारे लगा रहे थे –2017 में सिद्धू ने कहा था ईसाइयों के लिए कोई समस्या न खड़ी की जाये.
सवाल ये खड़ा होता है कि चन्नी को दलित सिख मुख्यमंत्री कह कर गद्दी सौंपी गई है मगर मीडिया उसके ईसाई बन जाने पर खामोश क्यों है?
कांग्रेस की तरफ से सिख मुख्यमंत्री बनाने का घटिया खेल ले कर सामने आई अम्बिका सोनी जबकि सत्य तो यही है कि 1 नवम्बर, 1966 से अब तक पंजाब में सिख ही मुख्यमंत्री रहे हैं जैसे हिन्दुओं की सूबे में कोई औकात नहीं है.
अगर ये सत्य है कि वो ईसाई बन चुके हैं, तो वो विधानसभा की SC के लिए सुरक्षित सीट से MLA नहीं रह सकते क्यूंकि ईसाई और मुस्लिम समुदाय में परिवर्तित हुए हिन्दुओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता.
लेकिन माना जा रहा है कि सोनिया गाँधी के निर्देशन में पंजाब को ईसाई राज्य बनाने के लिए षड़यंत्र चल रहा है और चरणजीत सिंह चन्नी उस षड़यंत्र की एक कड़ी हो सकते हैं.
जालंधर में एशिया का सबसे बड़ा चर्च परिवर्तन का खेल खेल रहा है और किसी को धर्म परिवर्तन के बाद न कोई प्रमाणपत्र देता है और न उनका नाम बदलता है और यही सबसे बड़ा फ्रॉड खेला जा रहा है.
ताज्जुब की बात है कि बिना किसी प्रमाणपत्र जारी हुए भी, सुप्रीम कोर्ट ने दलित ईसाईयों को आरक्षण देने की मांग पर विचार के लिए याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली -कैसे पता करेंगे कि दलित ईसाई बन गया जब चर्च बताएंगी ही नहीं.
ये चुनाव आयोग को पता लगाने की जरूरत है कि क्या चन्नी ईसाई धर्म अपना चुके हैं? और यदि हां तो उन्हें तुरंत प्रभाव से विधायक पद से हटा दिया जाये.

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