पूछता है देश: परम बीर सिंह का अर्ध-सत्य कैसे बना एटम बम मुंबई में?

परमबीर सिंह आधा सत्य बता कर अपने ऊपर लगे आरोपों के दाग धोना चाहते हैं - परंतु उनके इस अर्धसत्य से भी पवार की कोई दुखती रग दब गई..

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परमबीर सिंह आधा सत्य बता कर अपने ऊपर लगे आरोपों के दाग धोना चाहते हैं – परंतु उनके इस अर्धसत्य से भी शरद पवार की कोई दुखती रग दब गई.
परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को मेल किये पत्र में कहा कि गृहमंत्री अनिल देशमुख ने उन्हें और सचिन वाझे सहित अन्य पुलिस अधिकारियों को मुंबई के बार, रेस्टारेंट आदि स्थानों से हर माह 100 करोड़ की वसूली के निर्देश फरवरी 2021 में दिए.
कल से ये बात कही जा रही है कि मेल से भेजे गए पत्र पर परमबीर सिंह के साइन नहीं हैं –क्या पहले जब भी मेल की है साइन किये हैं क्या ? या कोई भी व्यक्ति मेल करते समय उस पर साइन करता है क्या?
परमबीर के इस मेल-रूपी बयान में ये भी कहा गया कि देशमुख ने कहा कि मुंबई में 1750 रेस्टारेंट हैं जिसने 2 से 3 लाख वसूली से 40 से 50 करोड़ आ सकते हैं और बाकी पैसा अन्य जगहों से आ सकता है.
इन अन्य जगहों में फिल्म इंडस्ट्री भी शामिल हो सकती है जैसा कल कुछ चैनल्स पर कहा गया था लेकिन बाद में केवल 100 करोड़ की बात रह गई.
परमबीर सिंह का कहना कि ये निर्देश फरवरी में दिए गए- किन्तु ये बात अर्धसत्य है -सचिन वाझे को निलंबन ख़त्म करके परमबीर सिंह ने 5 जून, 2020 को वापस नौकरी पर बहाल करने का फैसला लिया था यानि आज से पूरे 9 महीने पहले.
फिर ऐसा कैसे हो सकता है कि शिवसेना और पवार-सेना और सोनिया सेना ने 8 महीने से वसूली न कराई हो और या शिव सेना के साथ मिल कर परमबीर सिंह वाझे के जरिये माल बना रहे थे –ये सब मिल कर सचिन वाझे को आगे रख कर क्या वो खुल्ला खेल रहे थे.
जाहिर है कि सचिन वाझे को इस गोरखधंधे और कई अन्य जगह भी स्टेपनी की तरह उपयोग के लिए लाया गया था और चूंकि यह सब सीएम उद्धव की सहमति के बिना संभव नहीं था, इसलिये ये भी जाहिर है कि सचिन उद्धव ठाकरे को पसंद था.
5 जून, 2020 को वाझे बहाल हुआ था और 8 जून को दिशा सालियन की मौत हुई जिसे परमबीर ने आत्महत्या बता  दिया और उसके बाद 14 जून को सुशांत राजपूत की मौत हुई.
और फिर अनेक जगह से सबूत मिटा दिए गए जिनमे CCTV कैमरे हटाना भी शामिल था जैसे अब भी हिरेन मनसुख के केस में भी गायब मिले जिनका आरोप भी वाजे पर ही लगा – इस तरह अनेक कड़ियाँ जुड़ने की बात भी सामने आती दिखाई दी.
सबसे बड़ी कड़ी तो बॉलीवुड से वसूली की जुड़ती हैं जिसकी वजह से सुशांत और दिशा की हत्या में और अर्णव गोस्वामी एवं कंगना रनौत को निशाना बना कर बॉलीवुड को हर मोड़ पर समर्थन दिया गया उद्धव सरकार में शामिल हर दल द्वारा – यहां तक की न्याय प्रक्रिया का भी चमत्कार किया गया और अर्णव को जेल में रखा गया और उसके चैनल की बोलती बंद करा दी गई.
परमबीर सिंह के अर्धसत्य ने भी शरद पवार की किसी दुखती रग पर हाथ रख दिया है जो आज पवार साहब बिलबिला कर मीडिया में बात करने आ गए –वो केवल अनिल  देखमुख या उद्धव का बचाव करने नहीं आये,वो अपनेआपको बचाने आये थे क्यूंकि इस कलंक की कालिख उन पर भी लग रही है.
शरद पवार के विलाप पर अगले लेख में लिखूंगा लेकिन ये बात फिर कहूंगा कि परमबीर  सिंह के इस अर्धसत्य से इस गड़बडझाला गैंग के पापियों के पाप धुल नहीं सकते.
(सुभाष चन्द्र)

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