पूछता है देश: बैंक-निजीकरण पर कांग्रेस की तड़प का कारण क्या है?

जो खुद बैंकों को प्राइवेट करना चाहते थे, वो आज क्यों बिलबिला रहे हैं -बैंकर्स बस वामपंथी यूनियनों से बचें..

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जो खुद बैंकों को प्राइवेट करना चाहते थे, वो आज क्यों बिलबिला रहे हैं -बैंकर्स बस वामपंथी यूनियनों से बचें.

मुझे पता है कि इस लेख से हो सकता है मेरे बैंकर मित्र मुझसे प्रसन्न नहीं होंगे लेकिन फिर भी कुछ बातें कहना चाहूंगा.
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कहा था कि 2 सरकारी बैंकों को प्राइवेट करने पर विचार हो रहा है –जिसे ले कर कांग्रेस, वामपंथी, अन्य विपक्षी दल और पूर्व रिज़र्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन बहुत उद्वेलित हैं.
कुछ मीडिया में बेकार बैठे पत्रकारों को भी  काम मिल गया है लोगों को भ्रमित करने का -वो बता रहे हैं सब कुछ लुट जायेगा जी.
कांग्रेस की तरफ से राहुल गाँधी और वामपंथी सीताराम येचुरी विलाप करने से पहले सुन लें कि उनके चहेते रघुराम राजन ने “द हिन्दू” में प्रकाशित 22 सितम्बर, 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक कहा था.
“कुछ चुनिंदा राष्ट्रीयकृत बैंको का निजीकरण कर दीजिये और Department of Financial Affairs (DFA) को बंद कर देना चाहिए”.
यही विद्वान रघुराम राजन आज कह रहे हैं कि “बैंकों को कॉर्पोरेट हाउसेस को बेचना भयंकर भूल होगी” –अभी प्राइवेट करने की वकालात किये हुए इन्हे 6 महीने ही हुए हैं और तब बैंक की किसी यूनियन ने विरोध नहीं किया था.
आज राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या केवल 12 है जो कांग्रेस के समय में 28 होती थी और इतने ज्यादा बैंकों में अपने गुलाम चेयरमैन  और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बिठा कर अपनी मर्जी से धन को प्राइवेट कॉर्पोरेट हाउसेस को लुटाया जाता था.
आज 12 बैंक रह गए और लूट बंद हो गई और यही कांग्रेस की तड़प का कारण है. विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी  कुछ खास उदहारण हैं सैंकड़ों उद्योगपतियों में जिन्हें कांग्रेस ने बैंकों के पैसे को अपने बाप का माल समझ कर लुटाया था और आज भी उनके ही दबे हुए घोटाले सामने निकल निकल कर बाहर आ रहे हैं –
जो बैंकों में पुराने लोग हैं, उन्हें पता होगा इंदिरा गाँधी ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद करोड़ो रुपये कैसे डुबोये थे IRDP योजना  में जिसका नाम ही पड़ गया था — “इतना रुपया डुबोना पड़ेगा”.
आज बैंक कर्मचारियों को पता नहीं है कि  पेंशन ना बढ़ने में रोड़ा अटका कर वामपंथी यूनियन ही बैठी हैं क्यूंकि पेंशन धारकों से  पेंशन बढ़ने पर कोई “लेवी” नहीं मिलेगी  जैसे उन्हें मिलती है कर्मचारी वर्ग से जब 10 से 12 प्रतिशत सैलरी बढ़ती है और  वो भी 5 साल बाद –
2 बैंक प्राइवेट हो भी गए तो उससे बस एक असर तो होगा कि लोगों की जॉब  सिक्यूरिटी नहीं रहेगी और यूनियन वालों की चौधराहट बंद हो जाएगी –पेंशन  धारक किसी नुकसान में नहीं होंगे जो  घटते जा रहे हैं बढ़ने वालो के मुकाबले.
सरकार को जब अगस्त, 2020 में बैंकों में  अपनी हिस्सेदारी रिज़र्व बैंक ने 51% पर  लाने को कहा अगले 12 – 18 महीने में, तब ही कुछ दिन बाद रघुराम राजन ने  चुनिंदा बैंकों को प्राइवेट करने के लिए कहा था.
भरोसा रखिये मोदी पर, वो जो कुछ करेंगे, सोच समझ कर करेंगे –एक बात जरूर  सोचें बैंकर्स, 100 – 100 दिन से  ज्यादा शाहीन बाग़ वालों और किसानों की जब  मोदी ने नहीं सुनी तो वो 2 दिन की बैंको की हड़ताल से क्या घबराएगा और 2 दिन से ज्यादा बैंकर्स हड़ताल नहीं कर सकते.

(सुभाष चन्द्र)

 

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