पंचमुखी हनुमान जी के रूप का रहस्य

(इन्दिरा राय)

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कहते हैं कि बजरंगबली के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं। घर में आई हर तरह की विपदा को दूर करने के लिए हनुमान जी की पूजा की जाती है या फिर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। यहां तक की शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए भी हनुमान जी की पूजा-अर्चना की जाती है। हम सबने हनुमान जी के पंचमुखी रूप के दर्शन तो किए ही होंगे।

लेकिन क्या आप जानते हैं इस पंचमुखी रूप का राज़। इसके पीछे एक बहुत ही खास कथा जुड़ी जिसके बारे में आज हम आपको रूबरू करवाएंगे। तो चलिए जानते हैं उस पौराणिक कथा के बारे में।

पौराणिक कथा के अनुसार लंका में जब राम और रावण की सेना के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था। तभी रावण को लगा कि अब उसकी हार करीब है। तो उसने इस समस्या से उबरने के लिए अपने मायावी भाई अहिरावन को याद किया जोकि मां भवानी का परम भक्त होने के साथ-साथ तंत्र-मंत्र का बड़ा ज्ञानी था। जब वह युद्ध में आया तो उसने अपने माया से भगवान राम की सारी सेना को गहरी नींद में डाल दिया और राम व लक्ष्मण का अपरहण कर उन्हें पाताल लोक ले गया।

कुछ समय बाद जब माया का प्रभाव कम हुआ तब विभिषण ये बात जान गया कि ये काम केवल अहिरावन का है। तभी उन्होंने हनुमान को श्री राम और लक्ष्मण की सहायता करने के लिए पाताल लोक जाने को कहा। पाताल लोक पहुंचने पर मुख्य द्वार पर उन्हें उनका पुत्र मकरध्वज मिला और युद्ध में उसे हराने के बाद बंधक बने श्री राम और लक्ष्मण मिले।

लेकिन अचानक हनुमान जी की नजर वहां जल रहे पांच दीपक पर पड़ी जोकि पांच अलग-अलग दिशाओं में थे। उन दीपकों को अहिरावण ने मां भवानी के लिए जलाए थे। विभीषण ने बताया था कि अगर उन पांचों दीपक को एक साथ बुझा दें तो अहिरावन का वध हो जाएगा। इसलिए हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धरा।

उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख और पूर्व दिशा में हनुमान मुख। इस रूप को धरकर उन्होंने वे पांचों दीप बुझाए और अहिरावण का वध कर राम, लक्ष्मण को उससे मुक्त किया। तभी से ही हनुमान जी का पंचमुख रूप प्रचलित हुआ है।

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