सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस-8 : जनवरी, 25, 2019

0
835

कुम्भ की भव्यता जहां धर्म और आध्यात्म के कुम्भ नामक सुन्दर संगम से है और वह भी प्रयागराज के संगम पर तो यह भव्यता स्मरणीय हो जाती है. किन्तु भव्यता के साथ दिव्यता का संगम भी यहीं देखने को मिलता है. इस संगम में सौंदर्य की सृष्टि की है जीवन के एक और मनोहारी तत्व ने और वो है संस्कृति. उत्तरप्रदेश संस्कृति विभाग ने कुम्भ परिसर में संस्कृति की झलकियां देश विदेश के दर्शकों के लिए प्रस्तुत की हैं. और ये सांस्कृतिक गतिविधियां प्रतिदिन सम्पन्न हो रही हैं विभाग द्वारा स्थापित पांच प्रमुख सांस्कृतिक मंचों पर.

सेक्टर 1 के गंगा मंच पर आज सबसे ख़ास आकर्षण रहा बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल का. वर्तमान में मथुरा से सांसद हेमा मालिनी ने एक मनोहारी नृत्य प्रस्तुत किया जिसका सभी दर्शकों ने खड़े हो कर भरपूर स्वागत किया. हेमा मालिनी ने कुम्भ के अवसर को ध्यान रखते हुए इस कला मंच पर गंगा बैले प्रस्तुत किया.

सेक्टर ४ के त्रिवेणी मंच पर शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों ने दर्शकों को एक अलग किस्म की सुन्दर अनुभूति से भर दिया. पंडित विनायक तोरवी के गायन को पूरी गंभीरता से दर्शकों द्वारा सम्मान दिया गया. पंडित तोरवे के बाद हल्दीपुर के पंडित नित्यानंद ने बांसुरी सुना कर दर्शकों का मन मोह लिया. विदुषी अश्विनी भिड़े का गायन ने शास्त्रीय संगीत के वातावरण में चार चाँद लगा दिए. अंत में दर्शकों को उस्ताद बहाउद्दीन डागर की रुद्रवीणा सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

सेक्टर ४ के अक्षयवट मंच पर आज दर्शकों के लिए मणिपुर के एम इबोम्चा ने मणिपुरी नृत्य प्रस्तुत किया. उनके बाद प्रयागराज की तृप्ति शाक्य ने सुन्दर भजन प्रस्तुत किये. फिर मंच पर आई सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तुति कृष्णलीला.नई दिल्ली का श्रीराम भारती कला केंद्र ख़ास तौर पर कुम्भ के दर्शकों के लिए कृष्णलीला का मंचन कर रहा है.

सेक्टर ६ के भारद्वाज मंच पर दर्शकों ने कर्नाटक के रवि की प्रस्तुति देखी. रवि ने ढोलू कुनीथा प्रस्तुत किया. इस पेशकश के बाद दर्शकों ने इस मंच पर मणिपुर के एम इबोम्चा का मणिपुरी नृत्य देखा. उनके बाद मुंबई के लोकप्रिय गायक हेमंत ब्रजवासी का गायन सुनकर दर्शक झूमने लगे.

सेक्टर १७ के यमुना मंच पर मथुरा की सीमा मोरवाल ने भगवान् कृष्ण की ब्रजलीला की याद दिलाई. उन्होंने ब्रज का सुंदर लोकनृत्य प्रस्तुत किया और उसके बाद चरकुला नृत्य किया. फिर कोलकाता की सायोनी चावड़ा ने दर्शकों के लिए कत्थक बैले नृत्य का शास्त्रीय रूप प्रस्तुत किया. गोरखपुर के राकेश उपाध्याय से हृदय को छू लेने वाले भजन सुनाये. इसके बाद मंच पर एक और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति हुई. इस बार हुआ भरतनाट्यम नृत्य जिसे पेश किया कर्नाटक के बाला विश्वनाथ ने.

मेला क्षेत्र के सेक्टर 13 के सरस्वती मंच पर दर्शकों को एक विशेष कार्यक्रम देखने और सुनने को मिला जो खास तौर पर कुम्भ के लिए लाया गया था. यह कविसम्मेलन का कार्यक्रम था जिसमे दिल्ली के गजेंद्र सोलंकी, दिल्ली से डॉक्टर कुंवर बेचैन, सीतापुर के अरुणेश मिश्र, दिल्ली की ही रूचि चतुर्वेदी, उत्तरप्रदेश के डॉक्टर शिवोम अंबर, सीतापुर के पद्मकांत शर्मा, बाराबंकी विकास सिंह बौखल, लखनऊ के अशोक अग्निपथी, बाराबंकी के ही अजय प्रधान और शिवकुमार व्यास, फ़ैजाबाद के अशोक टाटंबरी ने दर्शकों को अपनी कवितायें सुना कर मस्त कर दिया. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये पारिजात त्रिपाठी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here