सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस-26 : 12 फरवरी 2019

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सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रकाश में जगमगाता कुम्भ क्षेत्र वास्तव में इस बार श्रद्धालु आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. पूरे कुम्भ परिसर में पांच विशाल मंच और पूर्ण प्रयागराज शहर में बीस मन्च देश और प्रदेश की सांस्कृतिक छटा बिखेर रहे हैं और दर्शकों से उन्हें पूर्ण समर्थन व प्रशस्तियाँ प्राप्त हो रही हैं. उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग ने न केवल इन मंचों को जीवंत रूप में यहां प्रस्तुत किया है बल्कि अपनी अन्य तमाम सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से भी योगदान करके इस बार कुम्भ को सांस्कृतिक कुम्भ की सुन्दर संज्ञा से सम्मानित किया है.

कुम्भ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण गतिविधि के तौर पर आज उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी (संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश) तथा संस्कार भारती / परमार्थ निकेतन के संयुक्त तत्वावधान में चित्रकला प्रदर्शनी का आयोज हुआ जिसमे पश्चिम बंगाल के राजयपाल माननीय केशरी नाथ त्रिपाठी, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष श्री चिदानंद मुनि जी महाराज, फिल्म निर्माता एवं निर्देशक सुभाष घई, संस्कार भारती संरक्षक पद्मश्री कला ऋषि बाबा योगेंद्र तथा उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी अध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र सिंह पुंढीर की गरिमामय उपस्थिति शोभायमान रही.

राज्य ललित कला अकादमी ने कुम्भ मेला २०१९ के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला कला प्रतियोगिता का आयोजन किया है जिसमे महिला सशक्तिकरण पर आधारित चित्र, रेखांकन, ग्राफिक्स एवं रंगोली की प्रीतयोगिताएं आयोजित की गईं. राज्य ललित कला अकादमी द्वारा आज ही कला कुम्भ पांडाल (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) में छात्र छात्राओं को जलरंग चित्रण चित्रण के प्रशिक्षण का शुभारम्भ भी किया. इस आयोजन के मुख्य अतिथि पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉक्टर नरेंद्र सिंह गौर द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करते हुए अकादमी की ओर से छात्र छात्राओं कला सामग्री वितरित की गईं. यह कार्यशाला दिनांक आज १२ फरवरी से १६ फरवरी तक चलेगी. इस कार्यशाला के माध्यम से लगभग ४०० छात्र छात्राओं को जलरंग चित्रण का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा.

नित्यप्रति की भाँति कुम्भ के पाँचों मंचों पर आज सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची रही. सेक्टर ४ के अक्षयवट मंच पर आज दिल्ली की कलाकार जोड़ी रीतेश और रजनीश मिश्र ने उपशास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया. उपशास्त्रीय गायन के उपरान्त अयोध्या के कलाकार प्रभाकर मौर्या ने अवधी लोकगीत प्रस्तुत किया. इन लोकगीतों के बाद मुंबई के अशोक हमराही ने कुंभम नृत्यनाटिका का मंचन किया. इस नृत्य नाटिका के बाद इस मंच की सबसे ख़ास कार्यक्रम आयोजित हुआ जो था बांग्लादेश की रामलीला. कुम्भ के विशेष अवसर पर विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, बांग्लादेश के कलाकारों ने इस मंच पर बांग्लादेश की रामलीला का मंचन किया जिसे दर्शकों का भरपूर स्वागत प्राप्त हुआ.

सेक्टर 6 के भारद्वाज मंच पर आज आजमगढ़ के गायक गरुड़ मिश्रा का उपशास्त्रीय गायन हुआ. इस उपशास्त्रीय गायन के उपरान्त अयोध्या के लोक-कलाकार प्रेमचंद तिवारी ने लोकगीत प्रस्तुत किया. इन लोकगीतों के पश्चात लखनऊ की नर्तकी दीपशिखा का कत्थक नृत्य देखा गया जिसकी दर्शकों ने तालियों से सराहना की.

सेक्टर 17 के यमुना मंच पर आज वाराणसी के कलाकार अजय गुप्ता का शहनाई वादन प्रस्तुत हुआ. शहनाई वादन के बाद लखनऊ की कलाकार अनीता विश्वकर्मा ने लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किये जिसके उपरांत रायबरेली के रामप्रकाश यादव का आल्हा गायन ने पांडाल के वातावरण में वीर रस का संचार किया. आल्हा गायन के बाद प्रयागराज के गायक पंकज श्रीवास्तव के सुगम संगीत ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया.

प्रयागराज शहर के अंतर्गत स्थित बीस सांस्कृतिक पांडालों में नित्य प्रति की भांति आज भी सांस्कृतिक गतिविधियों की धूम देखी गई. किला चौराहे, अक्षयवट मंच और भारद्वाज मंच के निकट स्थित कला-मंच पर आज लखनऊ के अमर सिंह ने नाटक का मंचन किया. नाटक के बाद आगरा के बृज लोकगीत पार्टी के महावीर सिंह चहर ने लोकगीतों की प्रस्तुति की. प्रयागराज के जादूगर रविशंकर केसरवानी ने जादू का खेल दिखा कर जनता का भरपूर मनोरंजन किया.

केपी इंटर कॉलेज, लेप्रोसी मिशन चौराहे और सरस्वती घाट के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज कौशाम्बी के विपत कुमार भारतीया ने लोक नृत्य प्रस्तुत किये. लोकनृत्यों के बाद मध्य्प्रदेश के करन राणा ने कठपुतली शो प्रस्तुत कर दर्शकों की सराहना अर्जित की.

संस्कृति ग्राम चौराहा, अरैल सेक्टर 19 कला-मंच और वल्लभाचार्य मोड़ के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर मध्यप्रदेश के रीतेश चौरसिया ने लोक नृत्य प्रस्तुत किये. लोक नृत्यों के बाद बिहार के संतोष कुमार झा ने कच्छी घोड़ी नृत्य की प्रस्तुति दे कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी.
कच्छी घोड़ी नृत्य भारतीय राज्य राजस्थान का एक लोकनृत्य है. यह राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से आरम्भ हुआ नृत्य है. यह केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि भारत के अन्य भागों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात आदि में भी प्रसिद्ध है. इसमें नर्तक नकली घोड़ों पर सवारी करते है. इसका प्रदर्शन सामाजिक एवं व्यावसायिक दोनों तरह से होता है. यह नृत्य दूल्हा पक्ष के बारातियों के मनोरंजन करने के लिए व अन्य खुशी के अवसरों पर भी प्रदर्शित किया जाता है.

सुभाष चौराहे, सिविल लाइंस बस स्टॉप कला-मंच और पत्थर वाले चर्च के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज गाजीपुर के संजय कुमार ने लोकनृत्य प्रस्तुत किये. उन्नाव के कलाकार रामप्रकाश ने अपने लोकगीतों से समा बाँध दिया.

बालसन चौराहे, इंद्रमूर्ति चौराहे और बैंक रोड चौराहे के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज उन्नाव के कलाकार साई दृष्टि ने नाटक मन्चित किया. उनके बाद प्रयागराज के कुलदीप कुमार पटेल ने अपने बिरहा गान से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया. बिरहा लोकगायन की एक विधा है जो पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा पश्चिमी बिहार के भोजपुरीभाषी क्षेत्र में प्रचलित है. बिरहा प्रायः अहीर लोग गाते हैं. इसका अतिम शब्द प्रायः बहुत खींचकर कहा जाता है. बिरहा, ‘विरह’ से उत्‍पन्‍न हुई लोकगीत शैली है जिसमें लोग सामाजिक वेदना को आसानी से कह लेते हैं और श्रोता मनोरजंन के साथ-साथ छन्‍द, काव्‍य, गीत व अन्‍य रसों का आनन्‍द भी ले पाते हैं.

विश्वविद्यालय तिराहे और राजापुर ट्रैफिक चौराहे के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज कौशांबी के मुन्शीलाल सोनकर ने कजरी और बिरहा गायन प्रस्तुत किया. वहीं प्रयागराज के दीपेश कुमार ने सुन्दर लोक नृत्य करके दर्शकों का मन मोह लिया.

हीरालाल हलवाई चौराहे, हाथी पार्क चौराहे और प्रयागराज जंक्शन के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज भदोही की तारा कला संगम द्वारा लोक नृत्य प्रस्तुत किया गया जिनके बाद नई दिल्ली की कलाकार सीमा शर्मा ने एक नाटक का मन्चन कर दर्शकों को मनोरंजन के साथ सार्थक सन्देश भी दिए. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये पारिजात त्रिपाठी.

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