सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस-38 : 20 फरवरी 2019

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कुम्भ की भव्यता जहां धर्म और अध्यात्म के सुन्दर संगम से जाज्वालयमान है वहीं वह धर्म धरा प्रयागराज में पवित्र नदियों गंगा जमुना और सरस्वती के संगम पर अविस्मरणीय हो जाती है क्योंकि भव्यता के साथ दिव्यता का संगम भी यहीं देखने को मिलता है.

प्रयागराज के इस संगम में आध्यात्मिक सौंदर्य की सृष्टि सहित भारतीय जीवन के एक और मनोहारी तत्व का योगदान दर्शनीय है और वह है सांस्कृतिक सौंदर्य. उत्तरप्रदेश संस्कृति विभाग ने कुम्भ परिसर में भारतीय संस्कृति की झलकियां देश-विदेश के दर्शकों के लिए प्रस्तुत की हैं. और ये सांस्कृतिक गतिविधियां विभाग द्वारा कुम्भ परिसर में स्थापित पांच प्रमुख सांस्कृतिक मंचों पर प्रतिदिन गतिमान हैं.

रोज़ की तरह आज भी कुम्भ स्थित सभी सांस्कृतिक मंच संस्कृति के विविध रंगों से गुलजार रहे. कुम्भ परिसर के सेक्टर 1 स्थित गंगा मंच पर संगीत के कार्यक्रम ने समा बाँध दिया. मुंबई के सांस्कृतिक दल के कलाकारों ने इंडियन ओशन बैंड की सांगीतिक प्रस्तुति देकर मंच को सुर-ताल के सुन्दर रंगों से रंग दिया.

सेक्टर 4 स्थित अक्षयवट मंच पर राजस्थान के कलाकार दीन मोहम्मद ने चकरी लोक नृत्य प्रस्तुत किया. चकरी नृत्य राजस्थान के लोक नृत्यों में से एक है जो कि हाड़ौती अंचल (कोटा, बारां और बूंदी) में विवाह आदि शुभ अवसरों पर युवतियों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है. चकरी लोक नृत्य के बाद वाराणसी के राजेंद्र न्याती ने भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुति किया. दिल्ली से आईं गायिका निशि सिंह के गायन का कार्यक्रम हुआ और गायन के इस सिलसिले को आगे बढ़ाया मुंबई के गौरव पाराशरी ने. गौरव पाराशरी ने सूफी गायन की प्रस्तुति दी. सूफी गायन के बाद लखनऊ की कलाकार कुमकुम आदर्श ने कुम्भ पर आधारित कत्थक बैले नृत्य द्वारा दर्शकों को मंत्र मुग्ध किया.

सेक्टर 6 स्थित भारद्वाज मंच पर कानपुर की कलाकार सौम्या गुप्ता के कत्थक नृत्य की प्रस्तुति हुई. लखनऊ की कलाकार संतोष शिप्रा ने लोक गायन एवं नृत्य प्रस्तुत किया. लोक गायन एवं नृत्य के इस कार्यक्रम के उपरान्त लखनऊ की ही लोक गायिका ममता सक्सेना ने लोक गीत प्रस्तुत किये. गोरखपुर की कलाकार आकांक्षा के लोकगीत व नृत्य का कार्यक्रम प्रस्तुत हुआ जिसके बाद वाराणसी की गायिका आराधना सिंह ने अपने सुरीले लोक गीतों से दर्शकों की सराहना अर्जित की.

सेक्टर 17 के यमुना मंच पर वाराणसी की कलाकार ममता टंडन ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी तो रायबरेली की उमा उपाध्याय ने लोक गायन प्रस्तुत किया. वाराणसी के गणेश पाठक ने भजन प्रस्तुत किये और मुंबई की गायिका यशस्वी गुप्ता ने सूफी गायन की प्रस्तुति दी. गायन के इसी क्रम में वाराणसी के कलाकार सियाराम यादव ने बिरहा गायन की मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया.

सेक्टर 13 स्थित सरस्वती मंच पर दिल्ली के नाटककार उमेश दीक्षित द्वारा अंबपाली नाटक का मंचन किया गया. बौद्ध युग की सुप्रसिद्ध नारी चरित्र आम्रपाली पर आधारित इस नाटक ने दर्शकों को जहाँ मनोरंजन की सौगात दी वहीं इतिहास के कुछ पुराने पन्ने पलट कर उनको बौद्ध युग की झलिकियाँ भी दिखाईं.

रोज़ की तरह आज भी कुम्भ स्थित सभी सांस्कृतिक मंच संस्कृति के विविध रंगों से गुलजार रहे. कुम्भ परिसर के सेक्टर 1 स्थित गंगा मंच पर संगीत के कार्यक्रम ने समा बाँध दिया. मुंबई के सांस्कृतिक दल के कलाकारों ने इंडियन ओशन बैंड की सांगीतिक प्रस्तुति देकर मंच को सुर-ताल के सुन्दर रंगों से रंग दिया.

सेक्टर 4 स्थित अक्षयवट मंच पर राजस्थान के कलाकार दीन मोहम्मद ने चकरी लोक नृत्य प्रस्तुत किया. चकरी नृत्य राजस्थान के लोक नृत्यों में से एक है जो कि हाड़ौती अंचल (कोटा, बारां और बूंदी) में विवाह आदि शुभ अवसरों पर युवतियों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है. चकरी लोक नृत्य के बाद वाराणसी के राजेंद्र न्याती ने भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुति किया. दिल्ली से आईं गायिका निशि सिंह के गायन का कार्यक्रम हुआ और गायन के इस सिलसिले को आगे बढ़ाया मुंबई के गौरव पाराशरी ने. गौरव पाराशरी ने सूफी गायन की प्रस्तुति दी. सूफी गायन के बाद लखनऊ की कलाकार कुमकुम आदर्श ने कुम्भ पर आधारित कत्थक बैले नृत्य द्वारा दर्शकों को मंत्र मुग्ध किया.

सेक्टर 6 स्थित भारद्वाज मंच पर कानपुर की कलाकार सौम्या गुप्ता के कत्थक नृत्य की प्रस्तुति हुई. लखनऊ की कलाकार संतोष शिप्रा ने लोक गायन एवं नृत्य प्रस्तुत किया. लोक गायन एवं नृत्य के इस कार्यक्रम के उपरान्त लखनऊ की ही लोक गायिका ममता सक्सेना ने लोक गीत प्रस्तुत किये. गोरखपुर की कलाकार आकांक्षा के लोकगीत व नृत्य का कार्यक्रम प्रस्तुत हुआ जिसके बाद वाराणसी की गायिका आराधना सिंह ने अपने सुरीले लोक गीतों से दर्शकों की सराहना अर्जित की.

सेक्टर 17 के यमुना मंच पर वाराणसी की कलाकार ममता टंडन ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी तो रायबरेली की उमा उपाध्याय ने लोक गायन प्रस्तुत किया. वाराणसी के गणेश पाठक ने भजन प्रस्तुत किये और मुंबई की गायिका यशस्वी गुप्ता ने सूफी गायन की प्रस्तुति दी. गायन के इसी क्रम में वाराणसी के कलाकार सियाराम यादव ने बिरहा गायन की मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया.

सेक्टर 13 स्थित सरस्वती मंच पर दिल्ली के नाटककार उमेश दीक्षित द्वारा अंबपाली नाटक का मंचन किया गया. बौद्ध युग की सुप्रसिद्ध नारी चरित्र आम्रपाली पर आधारित इस नाटक ने दर्शकों को जहाँ मनोरंजन की सौगात दी वहीं इतिहास के कुछ पुराने पन्ने पलट कर उनको बौद्ध युग की झलिकियाँ भी दिखाईं. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये पारिजात त्रिपाठी.

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