सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस-10 : जनवरी, 27, 2019 (न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल)

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रूस से आयी रामलीला का कुंभ में हुआ मंचन..कुम्भ में विदेशी दलों द्वारा रामलीलाओं की प्रस्तुतियों में जुडी एक नई कड़ी..

एक वक्त पर भारत में भारत-रूस मैत्री के गीत गाये जाते थे और उस समय ही ‘सिर पर लाल टोपी रूसी’ भारत में लोकप्रिय हुआ था. आज रविवार को कुंभ के प्रमुख सांस्कृतिक मंचों में से एक अक्षयवट मंच पर पर मास्को से आए रामलीला दल की प्रस्तुति ने श्रोताओं के ह्रदय में देश के आध्यात्मिक गौरव की अनुभूति कराई.

उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के सौजन्य से कुंभ में की जा रही सांस्कृतिक गतिविधियों ने इस भव्य कुम्भ दिव्य कुम्भ को सांस्कृतिक कुम्भ की गरिमा से भी युक्त कर दिया है. आज रविवार को मास्को के पद्मश्री गेन्नादी पिचनिकोव मेमोरियल दिशा रामलीला द्वारा अक्षयवट मंच पर रामलीला का मंचन हुआ जिसका अभिवादन दर्शकों ने तालियों से किया. अत्याधुनिकता की दिशा में भाग रही इस दुनिया में भारत के आध्यात्मिक इतिहास की यह जीवंत उपस्थिति है जो न केवल रूस बल्कि दुनिया के कई देशों में मंचित की जा रही है. और इस तरह यह भी सिद्ध होता है की विदेशों में भी में रामकथा और रामलीला की लोकप्रियता दिनों दिन बढ़ रही रही.

संस्कृति विभाग के सहयोगी अयोध्या शोध संस्थान के प्रयासों से विश्व के विभिन्न रामलीला दल कुंभ में रामलीला की प्रस्तुतियों के लिए आ रहे हैं. संस्थान के प्रयासों से 10 जनवरी से 16 फरवरी के मध्य भारत सहित 12 देशों के कलाकारों की रामलीला प्रस्तुतियां कुम्भ के विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर मंचित की जा रही हैं. इन रामलीला दलों में इंडोनेशिया, त्रिनिदाद, थाईलैंड, रूस, मलेशिया, श्रीलंका, मारीशस, सूरीनाम, नेपाल, बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के कलाकार रामलीला की प्रस्तुतियां दे रहे हैं. इन रामलीलाओं में भारत का प्रतिनिधित्व दिल्ली स्थित श्रीराम भारती कला केंद्र का दल कर रहा है.

रूस से आया दल उस प्रसिद्ध रामलीला कलाकार पद्मश्री गेन्नादी पिचनिकोव की स्मृति में गठित है जो रूस में रामलीला के चर्चित कलाकार थे जो रामलीला में राम की भूमिका निभाते थे. पिछले वर्ष दिवंगत हुए पिचनिकोव को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया है. पिछनिकोव मास्को में रामलीला का प्रशिक्षण देते थे. जैसा कि हम सभी जानते हैं रूस में भारतीयों और भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयाम बहुत लोकप्रिय हैं. उन्हीं में से एक रामकथा की लोकप्रियता काफी पहले से से रूस में देखि जा रही है. रामकथा को लेकर भारत और रूस की मैत्री आज रविवार 27 जनवरी 2019 को कुंभ में रूसी दल द्वारा रामलीला के मंचन से और भी पुष्ट हो गई है.

रामलीला के अतिरिक्त अक्षयवट मंच पर कोलकाता के अरुपा लाहिरी ने भरतनाट्यम, जयपुर के नटराज मिश्र ने अष्टनायिका नृत्य बैले और लखनऊ के दीपक त्रिपाठी के भोजपुरी लोकगायन ने दर्शकों का मन मोह लिया. उधर भारद्वाज मंच पर आंध्रप्रदेश के श्रीधर ने मयूर एवं अग्नि नृत्य, राजस्थान की ममता देवी ने चकरी लोकनृत्य, नई दिल्ली की राधिका चोपड़ा ने उपशास्त्रीय गायन और लखनऊ की प्रीति लाल ने अवधी लोकगायन की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी.

कुंभ के अन्तर्गत दुसरे प्रमुख मंच, यमुना मंच पर सिक्किम की शर्मिला गादले ने सिंघी याकक्षम नृत्य, लखनऊ की रेखा मिश्र ने अवधी लोकगायन, वृंदावन के देवकीनंदन शर्मा ने महारास की प्रस्तुति की और उपस्थित दर्शकों को भारतीय कलाओं के इस संगम में भी स्नान कराया.

वहीं सरस्वती मंच पर उड़ीसा के लोक-कलाकार पवित्र ने शंख रणप्पा एवं चढैया, गोरखपुर के हरिप्रसाद सिंह ने भोजपुरी लोकरंग और वाराणसी के जितेन्द्र मोहन ने चित्रकूट नाटक के मंचन से दर्शकों का दिल जीत लिया.

संस्कृति विभाग द्वारा प्रयागराज के विशिष्ट स्थलों पर तैयार किये गए 20 अन्य कला – मंचों पर भी रोज़ की तरह आज भी विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी रहे. विभाग ने ये मंच लोक सेवा आयोग चौराहा, ट्रैफिक चौराहा, दरभंगा चौराहा, यमुनापुल के नीचे गऊघाट, मेडिकल चौराहे के निकट, प्रयाग जंक्शन चौराहा, के.पी.इंटर कालेज के निकट, किला चौराहा, अक्षयवट एवं लेटे हुए हनुमान मंदिर के सामने, यूनिवर्सिटी चौराहा, बालसन चौराहा, कीडगंज नैनी ब्रिज इनफारमेशन सेंटर, लैप्रोसी मिशन चौराहा, झूसी के निकट, अरैल के निकट, वल्लभाचार्य मोड़, बहुगुणा चौराहा, चर्च के निकट बिशप जानसन कालेज, प्रयाग बस स्टैंड के सामने हिन्दू महिला डिग्री कालेज तथा एपी कालेज निकट काली मंदिर में तैयार किये गए हैं.

आज रविवार को इन मंचों पर उषा कुमारी (बिहार) ने कच्ची घोड़ी, जाह्नवी पांडेय (अंबेडकरनगर) ने लोकगायन, त्रेतिमा कुमारी (प्रयागराज) ने अवधी लोकनृत्य, परशुराम (महोबा) ने लोकगीत, अनादि संस्थान (लखनऊ) द्वारा लोकनृत्य, लोकांजलि (लखनऊ) ने लोकनृत्य, मनोज कुमार (नई दिल्ली) द्वारा नाटक, सुमंगल कुमार झा (बिहार) द्वारा जादू, सूर्यप्रकाश तिवारी (प्रयागराज) ने ब्रज लोकनृत्य, सुजाता डे (पश्चिम बंगाल) ने कठपुतली, अजुग नारायण (प्रयागराज) द्वारा लोकगीत, रामबाबू यादव (प्रयागराज) ने लोकनृत्य, दिशा क्रिएशन (वाराणसी) ने नाटक, उमेश कुमार सिंह (प्रयागराज) ने लोकनृत्य की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति देखी गईं. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये पारिजात त्रिपाठी


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