सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस-44 : 26 फरवरी 2019

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धर्म-धरा प्रयागराज में कुम्भ की मशाल अपनी पूरी रवानी पर है. आगंतुक बड़ी संख्या में लगातार आ रहे हैं और त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगा कर आध्यात्मिक पुनर्जन्म की अनुभूति कर रहे हैं.

यहां लाउन्ड स्पीकरों में बजते भजन और आरतियां वातावरण को और भी पवित्र कर रही हैं इसलिए अमूमन पांच छह किलोमीटर चल कर कुम्भ में गंगा जी तक पहुँचने की थकान लोगों को महसूस नहीं होती. और साथ ही हैं सांस्कृतिक उत्सव जो श्रद्धालुओं की पूरी थकान उतार कर उन्हें मुस्कान का उपहार देता है. उत्तरप्रदेश संस्कृति विभाग के इन सांस्कृतिक मंचों पर बिखरी देश की संस्कृति की छटा आज सारी दुनिया देख रही है. 

आज कुम्भ परिसर के मंचों पर सांस्कृतिक गतिविधियां रोज़ की तरह जारी रहीं. सेक्टर 4 स्थित अक्षयवट मंच पर कई प्रदेशों के कलाकारों ने धूम मचाई. मध्य प्रदेश से पधारीं उपशास्त्रीय एवं लोकगायिका रागिनी टरडे ने मंगलवार को अक्षयवट मंच पर संगीत का जादू बिखेरा.  जैसे ही उन्होंने “छाप तिलक सब  छीनी मोसे नैना मिलायके” का गीत छेड़ा हवा में हजारों हाथ उठ गए . होशंगाबाद की इस कलाकार ने इसके पहले सूफी कव्वाली “आज की ये शाम मेरे राम जी के नाम ” सुमधुर भजन सुनाई. 

इसी तरह से “मेरे शम्भू जटाधारी कमाल हो व श्याम तेरे नाम के दीवाने हम” का मनोहारी भजन सुनाया. इसके अलावा गाज़ीपुर से पधारे जीवनराम एवं उनके साथियों ने शानदार “धोबिया” नृत्य किया.  उन्होंने ” गोदाय लिया हम सखी आजादी के गोदनवा….”  का देशभक्ति गीत पर उन्होंने सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया.  इसके साथ ही “उठा हो बहुवा” पारम्परिक गीत पर शानदार समूह नृत्य भी किया.  इसी क्रम में सोनभद्र से पधारे गजाधर आदिवासी एंड पार्टी ने आदिवासियों के पारम्परिक नृत्य “कर्मा” की शानदार प्रस्तुति दी. आदिवासियों के आदि देवता कर्मदेव के लिए यह नृत्य प्रत्येक वर्ष दिवाली के अवसर पर किया जाता है.

आदिवासी समूह ने “हे करम देवता आन चला अंगना , बाजवा पेहेन के’ और  “छनाछन मान करो” के गीतों पर सामूहिक कर्मा नृत्य किया. इसी के साथ बनारस से आये सारंग चौधरी ने मनमोहक संतूर वादन किया. उन्होंने काफी ठाट की झिझाउथी की बंदिश बजाई.  साथ में बंगला एवं होली की धुनें भी बजाईं. इसके बाद बनारस घराने के उपशास्त्रीय गायक पंकज मिश्रा ने अपने राग आधारित “ठुमरी व दादरा” गीतों से लोगों का मन मोह लिया.


पंकज मिश्रा ने ‘अब न बजाओ श्याम बसुरिया राग खमाज’ आधारित ठुमरी सुनाई. इसी के बनारस घराने के उपशास्त्रीय गायक पंकज मिश्रा ने अपने राग आधारित “ठुमरी व दादरा” गीतों से लोगों का मन मोह लिया. उन्होंने अब न बजाओ श्याम बसुरिया राग खमाज आधारित ठुमरी सुनाई. इसी के साथ ही ‘खमाज ठाट’ के ‘राग पीलू’ में दादरा “सांवरिया प्यारा रे टोरी ग्वाइयाँ” का गीत सुनाया. इसके बाद उन्होंने “रंग डालूंगी नन्द के ललन” होली गीत सुनाया.   

सेक्टर 6 स्थित भारद्वाज मंच पर एक विशेष सांगीतिक प्रस्तुति – ताल वाद्य संगम देखी गई जिसे लखनऊ के कलाकार दिनेश प्रसाद और उनके साथियों ने प्रस्तुत किया. भोजपुरी के विख्यात गायक दिनेश प्रसाद दास तिवारी और उनकी सहयोगी गायिका सुश्री श्रेया यादव जी ने कार्यक्रम की शुरूआत ‘हरि सुमिरन हरि का सुमुख किया करो उनके सहारे जिया करो’ से किया,और ‘जेकर चित तीर्थराज तोहरि ओर हो गइल ओकरा अनिहरे घरे अंजोर हो गइल’ के साथ अपना गायन आगे बढ़ाया.

इसके पश्चात भक्ति के ‘आइसं सोर सगरो सहरवा जगल बा’ की प्रस्तुति दी. जब उन्होंने कुंभ गीत ‘2019 का आ गया कुंभ संत, ऋषि,मुनिजन नाचे झूम झूम’ प्रस्तुत किया तो दर्शकों ने भी झूम कर तालियां बजाईं. ताल वाद्य संगम के उपरान्त प्रयागराज की संस्था आरम्भ के कलाकारों ने दिखाया भरतनाट्यम. नृत्य की इस शास्त्रीय प्रस्तुति के बाद बाराबंकी की गायिका रचना श्रीवास्तव के अवधी गीतों और नृत्य पर आधारित सुन्दर  कार्यक्रम ने दर्शकों को रोमांचित किया. 

बाराबंकी की गायिका रचना श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की प्रारम्भि गंगा गीत ‘मैया तेरी लेहरी सभी के मन भायी’ गए कर किया. बसंत गीत ‘देखो आई बसंत बहार’ और तत्पश्चात होली गीत ‘जीन जा बरसाने कनैया राधे पीताम्बर रंग देदे’ तथा ‘होली खेले रघुबीर अवध में होली खेले रघुबीर’ की सुन्दर प्रस्तुति दी. तत्पश्चात रचना जी और उनके ग्रुप ने होली के पारंपरिक गीत रंग डारो ना गिरधारी रे रंग डारो ना तथा फागुन कराते मिलानवा बोलो सरारारारा’ की प्रस्तुति से गायन का समापन किया.

तत्पश्चात अवधी लोकगीत ‘श्रृंगार रस कृष्ण होली’ की प्रस्तुति की जिसमें श्रीकृष्ण गोपियों के साथ मिल  होली खेलते हैं. उन्होंने राम होली की प्रस्तुति भी दी जिसमें मर्यादित तौर पर प्रभु श्री राम अपने परिवार के साथ होली मानते हैं.  इसके बाद हुए रायबरेली के लोक गायक रामरथ पांडेय के ओजस्वी आल्हा गायन ने तो तालियां पीटते दर्शकों में मानो वीर रस का ही संचार कर दिया. 

सेक्टर 13 स्थित सरस्वती मन्च पर मंचित हुआ एक अद्भुत नाटक जिसमे अगर सुन्दर संवाद थे और  ख़ास पटकथा थी तो वहीं एक सकारात्मक  सन्देश भी था जो दर्शकों को बहुत पसंद आया. लखनऊ के नाटककार मुकेश वर्मा द्वारा मंचित इस नाटक को दर्शकों की तालियां भी मिलीं और तारीफ़ भी. लखनऊ की कलाकार वंदना श्रीवास्तव ने बृज का लोक नृत्य प्रस्तुत किया.

यहां आज का विशेष कार्यक्रम रहा कविसम्मेलन जिसमें दिल्ली के बृजेश द्विवेदी, दिल्ली के ही राधाकांत पांडेय, आगरा के अभी आधार,  लखीमपुर के अनिल अमल, लखनऊ के अनिल कुमार वर्मा (बांके), देवास की अमृता  भावसार, प्रयागराज के दिनेश पांडे, प्रयागराज के ही प्रद्युम्न नाथ तिवारी और गोंडा के शिवाकांत विद्रोही ने काव्यपाठ किया और दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं.  

सेक्टर 17 के यमुना मंच पर कार्यक्रम का प्रारम्भ आदिवासी लोकनृत्य से हुआ. नरेश एवं उनके साथी कलाकारों द्वारा आदिवासी लोकनृत्य का प्रस्तुतिकरण बहुत ही सराहनीय रहा. धार्मिक अवसर पर किये जाने वाले नृत्यों से नरेश ने वातावरण का निर्माण किया. अगली प्रस्तुति विरहा की रही. देवी गीत एवं समसामायिक गीतों के साथ बहुत ही मनोहर प्रस्तुति रही विरहा की.  कार्यक्रम के अगले क्रम में मंच पर उपस्थित हुई आयुषी पाण्डेय. अपने लोकगायन से आयुषी पाण्डेय ने पांडाल में उपस्थित दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया. लोकगायन के उपरान्त मऊ के गायक सत्यनारायण राजभर का बिरहा गायन हुआ.

बिरहा के गीतों के बाद दर्शकों ने सुने मीठे-मीठे लोक गीत जिनको प्रस्तुत किया लखनऊ की लोक गायिका मंजुला दिवाकर ने. लोक गायन के बाद लोक गायन की एक और शानदार प्रस्तुति देखी गई जिसे कुम्भ के श्रद्धालुओं के लिए ले कर आयी थीं गोरखपुर की गायिका इंदु गुप्ता.  कार्यक्रम के अंतिम प्रस्तुति के रूप में मंजुला दिवाकर का लोक गायन सुना गया. अपने लोकगायन के दौरान मंजुला ने देवीगीत गंगा गीत सहित कई अन्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों की भरपूर तालिया बटोरी.

सेक्टर 1 स्थित गंगा मंच पर रायबरेली से पधारीं नेहा सिंह एंड पार्टी ने बेहतरीन आल्हा गायन पेश किया. उन्होंने आल्हा को विशेष शैली में “प्रीत करियो तो भले से करियो, पर ओछे से प्रीत करियो कबहुँ न!” का गायन किया.  इसके साथ ही नेहा ने  “बारह वर्ष क्षत्रिय का लरिका कहे  न ऐंठे मूँछ का बार” का आल्हा गायन सुनाया. इसके बाद उन्होंने “जिनका बैरी सुख से सोवए उनके जीवन को धिक्कार” का मनमोहक आल्हा गीत सुनाया.  उनके साथ क्लार्नेट  पर अब्दुल हमीद व ढोलक पर छेदीलाल ने सांगत किया.  पूरे आल्हा के दौरान  जोश और  अभिव्यक्ति  प्रभावकारी रही. पंडाल में तालियां गूंजती रहीं . 

सेक्टर १९ अरैल स्थित संस्कृति विभाग के कलाकुम्भ शिविर में मंगलवार को राज्य ललित कला अकादमी की ओर से मूर्तिकला कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसका शुभारम्भ बालादत्त पांडे ने किया. कार्यशाला में मूर्तिकार डॉक्टर नगीना राम 4 दिनों तक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे. कार्यशाला में टीआरपी स्कूल, नैनी; राधारानी स्कूल, नैनी; डीपीएस, नैनी व इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अस्सी छात्र छात्राएं भाग ले रहे हैं. कार्यशाला का संयोजन सचिव डॉक्टर यशवंत प्रताप सिंह राठौर ने किया.   

आज मंगलवार की अलसुबह भारत की पाकिस्तान आतंकवादी कैम्पों पर हुई सफल सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सारे  देश की तरह ही प्रयागराज के सांस्कृतिक मंचों पर भी देशभक्ति की लहर देखी गई. सभी मंचों पर देशभक्ति पर आधारित कार्यक्रमों ने रंग जमा दिया. किला चौराहे, अक्षयवट मंच और  भारद्वाज मंच के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज मध्यप्रदेश के कलाकार शिवप्रकाश ध्रुवे ने लोक नृत्य का कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसके बाद छत्तीसगढ़ के फूल सिंह कचलाम ने भी लोक नृत्य की शानदार प्रस्तुति से रंग जमा दिया. 

केपी इंटर कॉलेज, लेप्रोसी मिशन चौराहे और सरस्वती घाट -नैनी ब्रिज के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज लखनऊ के सोनल ठाकुर एंड ग्रुप ने नाटक का मंचन किया, वहीं लखनऊ के ही सिकंदर बादशाह ने जादू के कार्यक्रम से  दर्शकों का जितना मनोरंजन किया, उतना ही उनको अचरज में भी डाला. संस्कृति ग्राम चौराहे, अरैल सेक्टर-19 और वल्लभाचार्य मोड़  के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज जन चेतना आदिवासी ग्रामीण विकास समिति ने लोक नृत्य का कार्यक्रम प्रस्तुत किया तो उसके जवाब में लखनऊ के पुनीत मित्तल ने एक संदेशपूर्ण  नुक्कड़ नाटक   का मंचन कर दर्शकों की सराहना अर्जित की.  नुक्कड़ नाटक के माध्यम से उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा देने तथा स्वच्छ्ता को बनाये रखने के लिए जनमानस से अपील की.

बालसन चौराहे, इंद्रमूर्ति चौराहे और बैंक चौराहे (प्रयाग स्टेशन) के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर भारतीय लोकगीत एवं बिरहा कमेटी, जौनपुर के समरजीत यादव ने बिरहा लोक गायन प्रस्तुत किया. समरजीत ने कार्यक्रम का शुभ-आरंभ देवी वंदना ‘लगाल सने हिया के होरिया हे माई कैसे तोहरी सानिया’ के गायन के माध्यम से किया। तत्पश्चात आल्हा गायन करते हुए ‘आल्हा ऊदल के माई’ प्रस्तुत किया और कवि भजन – ‘तानसेन बिरजू के दियलू अगीनिया कवि काली दास भाई गायाल मजीनिया’ प्रस्तुत कर कविता का राग पेश किया. और अंत में  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देके लोगों को बेटी की सुरक्षा का संदेश दिया. 

जवाब में लखनऊ के सर्वेश्वर कला मंच के कलाकारों ने लोकनृत्य की प्रस्तुति दे कर दर्शकों का मन मोह लिया. कलामंच के प्रमुख कलाकार शिव कुमार शर्मा ने कार्यक्रम का प्रारम्भ सरस्वती वंदना के गायन से किया. इसके बाद स्वच्छता पर गीत  – ‘स्वच्छता जन नहीं जिंदगी में चेहरे कैसे कमल से खिलेंगे’ प्रस्तुत किया तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी सम्मान, दहेज प्रथा और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कई पारंपरिक लोक गीतों की प्रस्तुति दी – जैसे,  ‘दहेजवा सुना हे सखा हम ना देबे’, ‘बेटी को बढ़ाना है बेटी को बढ़ना है’ जैसे कई गीतों की प्रस्तुति दी. इसके साथ ही पुलवामा हमले पर देश के शहीदों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए देशभक्ति गीत – ‘दिल दिया है जान भी देंगे एं वतन तेरे लिए’ प्रस्तुत किया. किया. अपनी अंतिम प्रस्तुति में  उनहोंने एक खूबसूरत नृत्य भगवान श्री कृष्ण को समर्पित करते हुए, ‘गीत श्याम बंशी बजाते हो या मुझे बुलाते हो’ की प्रस्तुति एकल नृत्य के माध्यम से देकर कार्यक्रम का समापन किया. 


सुभाष चौराहे, सिविल लाइंस बस स्टॉप और पत्थर वाले चर्च के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर एक तरफ जहां मध्यप्रदेश की कलाकार अनीता कोरी ने लोकनृत्य पेश किया वहीं लखनऊ के पुराने कलाकार शक्ति सिंह ने कठपुतली के खेल की प्रस्तुति के माध्यम से इस पारम्परिक कला को जीवित रखने का प्रयास किया. कार्यक्रम के माध्यम से शक्ति ने कठपुतली नृत्य का प्रदर्शन किया, जिसमें गंदगी और गंगा सफाई के विषय में कठपुतली नृत्य से लोगों को समझाने का प्रयास किया कि हमारा समाज किस तरीके से आगे बढ़ रहा है और हम अपनी स्वच्छता को भूलते जा रहे. इन कार्यक्रमों की प्रस्तुति कठपुतली माध्यम से हुई और जिसमें से कई देश भक्ति गायन थे और कई पारंपरिक लोक गायन.

विश्वविद्यालय तिराहे और राजापुर ट्रैफिक चौराहे के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर प्रयागराज के लोक गायक छेदी लाल के लोकगीतों की प्रस्तुति हुई. कलाकार छेदीलाल ने कार्यक्रम की शुरुआत देवी वंदना – ‘रतिया  हाका मोर भवानी धीर धरण’. इसके पश्चात देश को समर्पित गीत ‘और कुल परिवार रवै पीट के कपरवा भीग ग अचलवा अँसुवन से’. इसके साथ ही होली गीत,देवर भौजी के प्यार मारे देवर के पिचकारियां प्रस्तुत किये और अंततः धार्मिक गीत माँ सीता को समर्पित किया.  छेदीलाल के बाद लखनऊ के दीपक यादव ने भी लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति देकर दर्शकों को तालियां बजाने को विवश कर दिया .  

हीरालाल हलवाई चौराहे, हाथी पार्क और प्रयागराज जंक्शन के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर रायबरेली के कलाकार गौरव कुमार ने महाकुंभ नाटक का मंचन किया.  नाटक के माध्यम से नाटककार ने समझने का प्रयास किया कि  हमारी संस्कृति हमारे लिए कितनी जरूरी है और भले ही हम शहर में जाकर बस जाएं लेकिन हमारे जीवन की शुरुआत हमारी संस्कृति ही है, इसका मजाक उड़ाना ठीक नहीं है.  नाटक के माध्यम से उन्होंने योगी जी और मोदी जी को धन्यवाद किया कि देश में स्वच्छता और महिला सुरक्षा बहुत अच्छी चल रही है और इसका श्रेय उनको ही जाता है.  वहीं प्रयागराज के प्रियांशु श्रीवास्तव ने अपने सुगम संगीत और देशभक्ति के गीतों से की सुरीली प्रस्तुति से समा बाँध ‘दिया.  उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत देशभक्ति गीत – ‘संदेशे आते हैं’  के माध्यम से   किया. तत्पश्चात ‘ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी’ से देशभक्ति की छटा बिखेरी. तत्पश्चात भजन ‘अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो’ प्रस्तुत किया. उन्होंने भजन ‘बोले पिंजरे का तोता राम राम’ प्रस्तुत करके कार्यक्रम का समापन किया. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के  लिये पारिजात त्रिपाठी.


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