सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस- 49 : 3 मार्च 2019

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अंतिम दो दिन हैं ये प्रयागराज कुम्भ 2019 के..कल की महाशिवरात्रि के स्नान के बाद कुम्भ विदा लेगा अगले छह वर्षों बाद फिर वापस आने के लिये. प्रयागराज स्टेशन पर उतर कर संगम पहुँचने वाला आगंतुकों का रेला सड़कों पर भारी भीड़ के रूप में नज़र आ रहा है.

कुम्भ के समापन तक कुल पच्चीस करोड़ लोगों के गंगा स्नान का अनुमान है. कुम्भ पधारे श्रद्धालु इस बार उत्तर प्रदेश सरकार के समर्पित योगदान से सफल हुए इस भव्य आयोजन के लिये योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देना नहीं भूल रहे. ठीक इसी तरह उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक विभाग के विशेष परिश्रम से प्रयागराज और कुम्भ में तैयार किये गए सांस्कृतिक पंडालों के दर्शक भी इस अभूतपूर्व शुरुआत की सराहना करते नहीं थकते.

कुम्भ स्थित सांस्कृतिक मंच नित्य की भाँति आज भी अपने सांस्कृतिक आलोक से प्रकाशित होते रहे. कुम्भ परिसर के सेक्टर 4 स्थित अक्षयवट मंच पर अक्षयवट मंच पर रविवार को प्रयागराज की संगीता राय ने अपने सुमधुर भजनों से सभी का दिल जीत लिया . अपने होली गीत “रंग फागुन बसंती रंगा गइले” से फागुनी बयार बहाई . इसके पहले उन्होंने “शंकर तेरी जटा से बहती है गंग धारा” का गंगा गीत सुनाया . इसी क्रम में “बजरंग बली शरण तुम्हारे आयी…” का हनुमान भजन सुनाया . लखनऊ से आयी कत्थक नृत्यांगना अर्चना तिवारी ने कत्थक नृत्य में “धा” के विभिन्न स्वरूपों व्वा उसमें छिपे भावों को दर्शाने को कोशिश अपने नृत्य से की . बनारस से आयी रेवती सकलकर ने “चलो रे मन गंगा जमुना तीर” की भजन सुनाई .

उन्होंने शिव बाँध जटा खेलें होली का होली गीत भी सुनाया . लखनऊ से आयी बालिका वालिनी ने पारम्परिक कत्थक नृत्य किया . लखनऊ से ही आयीं रेनू श्रीवास्तव ने डमरू हर कर बाजे के गीत पर शिव नृत्य किया . उन्होंने कन्हैया घर चलो गवइयान्न आज खेलें होली के होली गीत पर सात सदसिये सामूहिक नृत्य किया . जौनपुर नसे आये भोजपुरी गायक रविंद्र सिंह ने शिव विवाह के भजन सुनाये. बसा -बासा भोले बाबा हमर नगरी का शानदार गीत सुनाया . दिल्ली से आये पंडित रविशंकर म्यूजिकल फाउंडेशन के गौरव मजूमदार ने अपने सितार वादन से लोगों का मन मोह लिया.इसी ग्रुप की अर्चना महैस्कर ने सूफी गायन किया . पंडित रविशंकर के पौत्र आर्यन चटर्जी ने सरोद वादन पर राग विहाग बजाया. पूरा पंडाल खचाखच भरा हुआ था .

सेक्टर 6 स्थित भारद्वाज मंच पर कानपुर की कलाकार सुमति मिश्रा ने कुंभ आधारित कत्थक बैले प्रस्तुत किया. गोन्डा के शिवपूजन शुक्ला और लखनऊ की संगीता दुबे ने भजन सुनाये. वाराणसी की संगीता पंडित ने उपशास्त्रीय गायन किया तो प्रयागराज की प्रभा सिंह मधुर लोक गीत प्रस्तुत किये, जिसके बाद भोजपुरी लोक गायन कार्यक्रम को दर्शकों की बहुत तालियां मिली. ये भोजपुरी लोक गीत भदोही के गायक शेषमणि सरोज ने पेश किये थे. सेक्टर 17 के यमुना मंच पर सर्वप्रथम मथुरा से आयी लोकनृत्य की टीम द्वारा ढिमरई नृत्य प्रस्तुत किया गया. इस नृत्य ने मथुरा की लोक कला की पहचान कराते हुए दर्शको का मनोरंजन किया.

अगले क्रम में उत्तराचंल के लोकनृत्य की टीम मंच पर उपस्थित हुई और उत्तरांचल में त्योहारों पर होने वाले लोकनृत्य को प्रस्तुत कर अपने ईश्वर को याद किया. लोकनृत्य के बाद अब बारी लोकगायन की थी। इस कड़ी में अनुमा राय द्वारा कई लोकनृत्यों की प्रस्तुतियाँ की गयी जिसमें केबी गीत एवं गंगा गीत ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. मंच पर अगली प्रस्तुति वंदना पाण्डेय का लोकगायन रहा. वन्दना पाण्डेय द्वारा लोकगीतों का प्रारम्भ देवी गीत से करते हुए सामाजिक गीतों के साथ साथ कुम्भ का भी बखान किया.अगले क्रम में मच पर उपस्थित हुए अर्जित उपाध्याय. इन्होने अपने भोजपुरी अंदाज एवं भोजपुरी गायन से दर्शकों की भरपूर तालिया बटोरी। इन्होने अपने गायन से सभी को प्रभावित किया.

सेक्टर 13 स्थित सरस्वती मंच पर शुरुआत लखनऊ की कलाकार संगीता चौबे के भरतनाट्यम नृत्य से हुई. नृत्य के पश्चात एक के बाद एक दो नाटकों का मंचन हुआ जिन्हें क्रमशः प्रयागराज के विजय कुमार और लखनऊ के विवेक मिश्रा ने प्रस्तुत किया. नाटकों के बाद गोन्डा के गायक राम शब्द चौधरी ने आल्हा गायन की ओजपूर्ण प्रस्तुति दी. फिर ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ विषय पर नाटक का मंचन किया गया जिसे लखनऊ के राजबीर रतन ने प्रस्तुत किया. अंत में गायन एवं नृत्य का एक विशेष कार्यक्रम हुआ जिसे नटराज कला केन्द्र, लखनऊ के कलाकारों ने प्रस्तुत किया. आजमगढ़ के अजय मिश्रा के भोजपुरी लोकगायन ने धूम मचा दी और इसे दर्शकों की प्रशंसा भी बहुत प्राप्त हुई.

केपी इंटर कॉलेज, लैप्रोसी मिशन चौराहे और सरस्वती घाट-नैनी ब्रिज के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज मथुरा की कलाकार सुधा ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया तो जवाब में अनुभव सांस्कृतिक दल लखनऊ के कलाकार राजेंद्र त्रिपाठी ने भी मनोहारी लोक नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया. संस्कृति ग्राम चौराहे, अरैल सेक्टर 19 और वल्लभाचार्य मोड़ के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आगरा के कलाकार राम बाबू ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया लखनऊ के भानु ने लिल्ली घोड़ी की परम्परागत प्रस्तुति दे कर इस कला के अस्तित्व को आधुनिकता के इस युग में सजीव रखने की भूमिका अदा की.

बालसन चौराहे, इंद्रमूर्ति चौराहे और बैंक चौराहे (प्रयाग स्टेशन) के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर आज पीलीभीत के नाटककार गुलाम गौस ने नाटक का मंचन किया तो उनके जवाब में प्रयागराज की शिव लोकगीत एंड पार्टी ने लोक गीतों की मनोहारी प्रस्तुति से समा बाँध दिया. सुभाष चौराहे, सिविल लाइंस बस स्टॉप और पत्थर वाले चर्च के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर प्रयागराज के अमित मिश्रा ने लोक नृत्य की प्रस्तुति दी तो वहीं प्रयागराज की ही कलाकार कंचन लाल ने अपने लोकगीतों के कार्यक्रम से दर्शकों का दिल जीत लिया.

विश्वविद्यालय तिराहे और राजापुर ट्रैफिक चौराहे के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर बदायूं के राजन-साजन म्यूज़िक ग्रुप ने लोक गायन किया तो लखनऊ की गायिका पूनम सिंह ने भी लोक गीतों की सुरीली प्रस्तुति से दर्शकों की सराहना अर्जित की. हीरालाल हलवाई चौराहे, हाथी पार्क और प्रयागराज जंक्शन के निकट स्थित सांस्कृतिक मंचों पर शाहजहांपुर के शिवम सिंह ने नाटक का मंचन किया तो लखनऊ की कलाकार जागृति पाल ने अपने लोकनृत्य के सुंदर प्रदर्शन से दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये पारिजात त्रिपाठी.

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