सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस-9 : जनवरी, 26, 2019

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भारत है धर्म और आध्यात्म की वसुंधरा. और भारत में ही आयोजित होता है विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संगम, जिसे हम कुम्भ के नाम से जानते हैं. प्रयागराज 2019 है वह स्थान और वह वर्ष जहां इस बार एक अभूतपूर्व कुम्भ देखा जा रहा है

कुम्भ के धार्मिक प्रांगण में संस्कृति के सुन्दर सुमन खिलाये हैं उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग ने और न केवल कुम्भ परिसर में बल्कि सम्पूर्ण प्रयागराज शहर में संस्कृति मंच स्थापित किये हैं. इन मंचों पर प्रतिदिन देश भर के कलाकारों की सांस्कृतिक गतिविधियां प्रदर्शित की जा रही हैं.

सेक्टर ४ के अक्षयवट मंच पर आज कर्नाटक के रवि की ढोलू कुनीथा नामक कलात्मक प्रस्तुति देखी गई. ढोलू कुनीथा के बाद दर्शकों ने मुंबई से आये गायक प्रेम प्रकाश दुबे के मीठे भजन सुने. इसके बाद श्रद्धालु दर्शकों को प्रेम और भक्ति के रंगों से सराबोर किया कृष्णलीला ने, जिसे दिल्ली के श्रीराम भारती कला केंद्र द्वारा मन्चित किया गया.

सेक्टर 6 के भारद्वाज मंच पर उड़ीसा की एक प्रभावशाली प्रस्तुति देखी गई. उड़ीसा के लोक-कलाकार श्री पवित्र ने दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया – शंख रणप्पा एवं चढ़ैया. उनके उपरान्त लखनऊ की दीपिका का अवधि लोक-नृत्य देखा गया. फिर जयपुर के नटराज मिश्र की विशेष प्रस्तुति देखी गई जो थी एक नृत्य नाटिका – ऋतु श्रंगार. इनके उपरान्त वाराणसी की सरोज वर्मा के कजरी गायन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

सेक्टर १७ के यमुना मंच पर कोलकाता की मोनालिसा रॉय का सुन्दर नृत्य सम्मिश्रण देखा गया. मोनालिसा ने बड़ी ही कुशलतापूर्वक कत्थक-बैले नृत्य की सुन्दर प्रस्तुति से मंच की शोभा बढ़ाई. उनके बाद मुंबई के कलाकार विष्णु मिश्रा के सुन्दर भजनों ने दर्शकों को भक्ति-भाव में डुबो दिया.
तत्पश्चात देखा गया लम्बाडी लोक-नृत्य जिसे प्रस्तुत किया तेलंगाना के कलाकार श्रीधर ने. फिर हुई आज इस मन्च की सबसे मनमोहक प्रस्तुति. यह था महारास जिसे वृन्दावन के देवकीनंदन शर्मा के द्वारा मन्चित किया गया.दर्शकों ने महारास का स्वागत और सराहना प्रारंभ व अन्त में तालियाँ बजाकर की.

सेक्टर 13 के सरस्वती मंच पर बस्ती के कलाकार पी एल मिश्रा का कबीरा गायन हुआ. उनके बाद उरई से आये मेवालाल गुप्ता ने बुंदेली लोक गायन की प्रस्तुति दी. बुन्देली लोक गीतों के उपरान्त प्रयागराज के पंडित विजय चंद्र की सांगीतिक प्रस्तुति हुई जिसमें उन्होंने सिंथेसाइज़र पर संगीत के
निराले चित्र प्रस्तुत किये. उनके बाद चंदौली के अभिषेक कुमार गुप्ता के मनमोहक भजन सुने गए. फिर उत्तरप्रदेश के ही नारायण पांडेय का नाटक – संघम शरणम गच्छामि का दर्शकों ने आनंद लिया.  उसके बाद लखनऊ की निर्देशिका सीमा मोदी के निर्देशन में एक नाटक का मन्चन किया. जिसे देखने के लिये दर्शक रात ग्यारह बजे तक रुके रहे.

अब बात करते हैं प्रयागराज शहर में स्थित बीस कला-मंचों की जहां होने वाली सांस्कृतिक व कलात्मक गतिविधियां आगंतुकों और दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहीं. लेटे हनुमान जी मन्दिर कला-मंच, किला चौराहा कला-मंच और सेक्टर ६ स्थित कला मंच पर मध्यप्रदेश के कलाकार रमेश मरावी ने गुदुमबाजा लोक-नृत्य प्रस्तुत किया. वहीं हरियाणा के सुरेंद्र सिंह ने हरियाणवी लोकनृत्य की प्रस्तुति दी.

केपी इंटर कॉलेज कला-मंच, लेप्रोसी मिशन चौराहा कला-मंच और हाथी पार्क कला-मंच पर बैतूल के लोक-कलाकार महेश इंग्ले के लोकनृत्य की प्रस्तुति देखी गई. वहीं प्रयागराज के अशोक कुमार कुशवाहा ने लोकगीत सुनाये.संस्कृति ग्राम चौराहा कला-मंच, श्री सच्चा आश्रम अरैल कला-मंच और
वल्लभाचार्य मोड़ कला-मंच पर दिल्ली के मोहम्मद आलम ने कच्ची-घोड़ी की प्रस्तुति दी. इस प्रस्तुति के उपरान्त दिल्ली के ही साबिर हुसैन ने कठपुतली का खेल दिखा कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया.

बैंक चौराहा कला-मंच, हिन्दू महिला इंटर कॉलेज कला-मंच और पत्थर वाला चर्च कला-मंच पर नई दिल्ली के मुहम्मद गुलजार के निर्देशन में नाटक का मंचन किया गया. इनके उपरान्त दिल्ली के ही जादूगर अरुण गुप्ता ने जादू का कार्यक्रम प्रस्तुत कर के दर्शकों को हैरानी में डाल दिया.

बालसन चौराहा कला-मंच, इंद्रमूर्ति चौराहा कला-मंच औ र सुभाष चौराहा कला-मंच पर लखनऊ के कलाकार सुदीप्त कुमार चक्रवर्ती निर्देशित नाट्य-प्रस्तुति सम्पन्न हुई. उनके बाद सुल्तानपुर के दयाशंकर पांडेय ने लोकगीत सुनाये.  इन लोकगीतों की मीठी धुन ने दर्शकों का मन मोह लिया.

विश्वविद्यालय चौराहा कला-मंच और राजापुर ट्रैफिक चौराहा कला-मंच प्रयागराज के लोकगायक त्रिभुवन नाथ गौड़ ने लोकगीत प्रस्तुत किये.  उनके बाद लखनऊ के विद्याभूषण सोनी ने घूमर लोकनृत्य प्रस्तुत किया. घूमर नृत्य को दर्शकों की बहुत वाहवाही मिली.

हीरा हलवाई चौराहा कला-मंच, सरस्वती घाट कला-मंच और प्रयागराज रेलवे जंक्शन कलामंच पर प्रयागराज के लोकगायक शिव प्रसाद ने अवधी लोकगीत प्रस्तुत किये. उनके उपरान्त प्रयागराज के नाटककार दिनेश कुमार ने नाटक का मंचन किया. दिनेश कुमार के नाटक का अंत दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सम्पन्न हुआ. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये पारिजात त्रिपाठी.

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