सांस्कृतिक कुंभ – कला उत्सव : दिवस-7 : जनवरी, 24, 2019

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कुम्भ की भव्यता जहां धर्म और आध्यात्म के कुम्भ नामक सुन्दर संगम से है और वह भी प्रयागराज के संगम पर तो यह भव्यता स्मरणीय हो जाती है. किन्तु भव्यता के साथ दिव्यता का संगम भी यहीं देखने को मिलता है. इस संगम में सौंदर्य की सृष्टि की है जीवन के एक और मनोहारी तत्व ने और वो है संस्कृति. उत्तरप्रदेश संस्कृति विभाग ने कुम्भ परिसर में संस्कृति की झलकियां देश विदेश के दर्शकों के लिए प्रस्तुत की हैं. और ये सांस्कृतिक गतिविधियां प्रतिदिन सम्पन्न हो रही हैं विभाग द्वारा स्थापित पांच प्रमुख सांस्कृतिक मंचों पर. 

मेला क्षेत्र के सेक्टर ४ स्थित त्रिवेणी मंच पर पद्मश्री पंडित वसीफुद्दीन डागर ने ध्रुपद गायन प्रस्तुत किया. पंडित वसीफ़ुद्दीन की घनगर्जन आवाज़ में शास्त्रीय संगीत ने वातावरण में दिव्यता की सृष्टि कर दी.  उनके बाद पंडित शशांक सुब्रम्मण्यम की बांसुरी ने दर्शकों का मन मोह लिया.

सेक्टर ४ के अक्षयवट मंच पर आज दर्शकों के लिए सरोद वादन लेकर आई दिल्ली की चंद्रिमा मजूमदार. चंद्रिमा के सरोद वादन को दर्शकों की खूब तालियां मिलीं. इसके बाद दर्शकों को प्रेम और भक्ति के रंगों से सराबोर किया दिल्ली के ही श्रीराम भारती कला केंद्र ने. श्रीराम भर्ती कलाकेंद्र ने कृष्णलीला का सुन्दर मंचन किया.  

सेक्टर ६ के भारद्वाज मंच पर दर्शकों ने कला का वह रूप देखा जो प्रायः देखने में नहीं आता. आन्ध्रप्रदेशके कलाकार श्रीधर मंच पर ले कर आये मयूर एवं अग्नि नृत्य. इसके बाद दिल्ली के राजा राधा रेड्डी ग्रुप ने त्रिवेणी नामक कार्यक्रम प्रस्तुत किया. अगली पेशकश ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया. यह प्रस्तुति थी महारास. इस मंच पर महारास की जीवंत प्रस्तुति की वृन्दावन से आये देवकी नंदन शर्मा ने .  

सेक्टर १७ के यमुना मंच पर कर्नाटक से आये के रवि ने दर्शकों के सामने एक दुर्लभ नृत्य प्रस्तुति दी जिसका नाम था ढोलू कुनीथा. उनकी पेशकश के बाद इस मंच पर मणिपुर के एम इबोम्चा का मणिपुरी नृत्य देखा गया. इस मंच पर जो सर्वाधिक विशेष आकर्षण था वह था – शिव नृत्य. जयपुर से आये कलाकार श्री नटराज मिश्र ने यह प्रभावशाली नृत्य प्रस्तुति दी. मंगलोर की विद्या की प्रस्तुति भी इसी तरह विशिष्ट थी. विद्या दर्शकों के सम्मुख यक्षगान प्रस्तुत किया. 

सेक्टर 13 के सरस्वती मंच पर दर्शकों ने कालिदास रचित ऐतिहासिक मेघदूत को जीवंत होते देखा.   मेघदूत से प्रेरित और प्रेम और विरह पर आधारित इस सुन्दर नाटक मेघदूत की पूर्वांचल यात्रा को पेश किया उत्तरप्रदेश के मानवेन्द्र तिवारी ने.  लखनऊ की लोकगायिका कनक वर्मा ने सुनाये मीठे  संस्कार गीत जिन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया.संस्कार गीत के बाद होने वाली चित्रकूट के डॉक्टर विवेक फडणवीस की शानदार तबला जुगलबंदी दर्शकों को सुनने को मिली और उन्होंने इस सांगीतिक प्रस्तुति को बहुत पसंद किया. इसके साथ ही प्रयागराज के आशुतोष श्रीवास्तव के भक्ति-भाव में डूबे भजनों ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया.

अब बात करते है प्रयागराज शहर में तैयार किए गए बीस कला मंचों की. आज किला चौराहा कला-मंच, अक्षयवट मंच के निकट का कला-मंच और भारद्वाज मंच के निकट के कला-मंच पर  सर्वांगीण विकास अकादमी, जौनपुर के कलाकार बृजेश पांडेय ने लोक-नृत्य प्रस्तुत किया.  उनके उपरान्त प्रयागराज की समाजसेवा संस्था ने एक नाटक का मंचन किया जिसे दर्शकों की बहुत सराहना मिली.

केपी इंटर कॉलेज कला- मंच, लेप्रोसी चौराहा कला-मंच और हाथी पार्क कला-मंच पर प्रयागराज के कामता प्रसाद ने नाट्य प्रस्तुति दी. उसके पश्चात प्रयागराज के ही कलाकार राजबली और प्रयाग संगीत पार्टी की सांगीतिक प्रस्तुति ने समा बाँध दिया. उन्होंने लोकगीत प्रस्तुत किये.

संस्कृति ग्राम चौराहा कला-मंच, श्री सच्चा आश्रम अरैल कला-मंच और वल्लभाचार्य मोड़ मंच पर प्रयागराज के नामित कुमार जायसवाल ने जादू का कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को हैरानी में डाला. लेकिन उनके बाद मंच पर आये कौशाम्बी के कलाकार अजय कुमार एवं साथियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. उन्होंने नौटंकी का सुन्दर रूप दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया.

बैंक चौराहा कला-मंच, महिला हिन्दू इंटर कॉलेज कला-मंच और पत्थर वाला चर्च कला-मंच पर दर्शकों ने जौनपुर का लोक-नृत्य देखा जिसे लोक कला मीडिया जौनपुर ने प्रस्तुत किया था. इसके बाद प्रयागराज के गायक चंद्रमणि यादव ने अपने बिरहा गीत से सबका मन जीत लिया. 

बालसन चौराहा कला-मंच, इंद्रमूर्ति चौराहा कला-मंच और सुभाष चौराहा कला-मंच पर प्रयागराज के  उदयराज जादूगर एंड पार्टी के जादू के खेल को दर्शकों की भरपूर तालियां मिलीं. उनके बाद लखनऊ के राजेंद्र कुमार त्रिपाठी ने लोकनृत्य प्रस्तुत किया जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया.

विश्वविद्यालय तिराहा कला-मंच, राजापुर ट्रैफिक चौराहा कला-मंच और गोल चौराहा कला-मंच पर लखनऊ के लोककलाकार शिवकुमार शर्मा के लोकनृत्य ने लोक-कला की बारीकियों को बखूबी मंच पर उतारा. उनके उपरांत मंच पर आये प्रयागराज के लोकगायक हरीलाल के सुन्दर लोकगीतों का दर्शकों ने जमकर रसास्वादन किया.   

हीरालाल हलवाई कला-मंच, सरस्वती घाट कला-मंच और प्रयागराज जंक्शन कला-मंच पर  बाँदा के लोक कलाकर रामशरण का लोक नृत्य देखा गया. उनके उपरान्त सोनभद्र के कलाकार हरी लाल प्रजापति के लोकगीत ने दर्शकों की बहुत प्रशंसाएं अर्जित कीं. प्रयागराज से न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये पारिजात त्रिपाठी.

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