अध्यात्म कथा-11: सहनशक्ति से आप शत्रु का भी मन बदल सकते हैं

सहनशक्ति से आप अपने शत्रु का भी स्वभाव बदल सकते हैं, फिर ये तो सास थी ..औऱ माँ की तरह सास भी कभी पराई नहीं होती..

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युवती नववधू बनकर ससुराल में आई तो जो सास उसको मिली— हे भगवान!  दुर्वासा का अवतार थी वह!
ये सास अपनी नई बहू से दिन में दो-तीन बार जब तक लड़ न ले, तो उसे भोजन नहीं पचता था।
वधू  आई तो उसने सोचा —” अब घर में ही लड़ लो । बाहर लड़ने के लिए काहे को जाना?” बहू को वह बात – बात पर ताने देने लगी — तुम्हारे बाप ने तुम्हें क्या सिखाया है? तुम्हारी मां ने तुम्हें क्या यही शिक्षा दी है ?बहू को बोलती तेरे जैसी मुर्ख तो मैंने कभी देखी ही नहीं ।”
बहू यह सब सुनकर मौन ही रहती । सांस चिल्लाकर कहती—अरे तेरे मुंह में जीभ नहीं है?
ये सुन कर भी बहू शांत बनी रहती। उसके मौन को देखकर, साफ जाहिर था, बिगड़ैल मन वाला वह कर्कश घोड़ा क्रोध की सड़क पर द्रुत गति से दौड़ने लगता। प्रतिदिन ऐसा ही होता। पास पड़ोस के सभी लोग इस व्यापार को देखते मन ही मन सोच से यह सास है या डायन।
एक दिन वह इसी प्रकार वधू पर बरस रही थी पर बहू निश्शब्द थी जैसे लकड़ी की मूरत। सास कह रही थी -अरे पृथ्वी पर लात मारे तो वह भी शोर करती है और मैं इतना बोल रही हूं फिर भी तू चुप है तो मिट्टी से भी गई बीती है
तभी ये सब सुन रहे एक पड़ोसी ने कहा -बुढ़िया, लड़ने की बहुत इच्छा है तो आकर हमसे लड़, तेरा चस्का पूरा हो जाएगा। इस बेचारी गाय के पीछे क्यों पड़ रही है जो उत्तर भी नहीं देती.
अब वधू बोल पड़ी. उसने तुरंत पड़ौसी से कहा – नहीं, इन्हें कुछ मत कहिए । ये मेरी मां हैं। मां ही बेटी को नहीं समझाएंगी तो फिर कौन समझाएगा सास हैरान रह गई. एक वो कि उसकी दुश्मन बनी हुई है और बहू है कि साक्षात शांति और प्रेम की पुतली. सास की आँखें खुलीं और वह स्वयं पर बहुत लज्जित हुई. फिर उसके बाद उसने जीवन में कभी क्रोध नहीं किया।
बहू की सहनशक्ति से स्वभाव सास का स्वभाव बदल गया।
(सुनीता मेहता)

2 COMMENTS

  1. अति सुंदर शिक्षाप्रद,प्रेरणादायी कथा|आगे भी प्रतीक्षा रहेगी ऐसी ज्ञानवर्द्धक कथाओं की|बहुत बधाई और शुभकामनाएँ

    • धन्यवाद अंजू कोशिश करती रहूंगी।

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