अध्यात्म कथा-14: अच्छे संग तरे ..अच्छे संग तरे !!

वो संतरे वाला भी कितना बड़ा ज्ञानी रहा होगा जिसने छज्जू भगत के माध्यम से लोगों को शिक्षा दे दी वो भी गली-मुहल्लों में चिल्ला कर..

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बहुत पुरानी बात है। लाहौर में एक प्रभु प्रेमी निवास करते थे। दूर-दूर तक लोग उनको छज्जू भगत के नाम से जानते थे।
एक दिन छज्जू भगत अपने चौबारे में सत्संगियों के साथ बैठे थे। ज्ञान की बातें चल रही थी कि उसी समय नीचे संतरे बेचने वाला आया और ऊंची आवाज में कहने लगा— “अच्छे संग तरे..अच्छे संग तरे !!”
छज्जू भगत ने सत्संगियों से पूछा —“भक्तों, ये नीचे से क्या आवाज आ रही है?”
सत्संगी ने बताया — “महाराज जी, संतरे बेचने वाला संतरों का गुण बता रहा है। “
छज्जू भगत बोले –“ठीक है, परंतु वो कहता क्या है? जरा सुनो तो सही ध्यान से !”
इतने में फिर से नीचे से वही आवाज आई — अच्छे संग तरे..अच्छे संग तरे।”
सत्संगी ने बताया –” भगत जी, वो अच्छे संग तरे ही कह रहा है ।”
छज्जू भगत बोले –“हां, यही कहता है । चलो आओ, इस बात को समझते हैं —“अच्छे संग तरे ,जो अच्छों की संगति करता है, वह तर जाता है। अच्छे संग तरे। इसलिये ये संदेश हम सभी के लिये है, भक्तों। हमें हर हाल में अच्छी संगति बना के रखनी है, बुरों का साथ नहीं करना है। यही संदेश है जो ये दुनिया को चिल्ला चिल्ला कर बता रहा है – अच्छे संग तरे..अच्छे संग तरे !!”
(सुनीता मेहता)

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