अध्यात्म कथा-10: सहनशीलता का जादू

हमें सदा स्मरण रखना चाहिेये कि सहनशीलता महापुरुषों का आभूषण है, ये किसी साधारण मानव के बस की बात नहीं है..

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महर्षि दयानंद ठहरे थे फर्रुखाबाद में गंगा के तट पर ।उनसे थोड़ी ही दूर एक और झोपड़ी में एक दूसरा साधु भी ठहरा हुआ था ।
प्रतिदिन वह देव दयानंद की कुटिया के पास आकर उन्हें गालियां देता रहता। देव दयानंद सुनते और मुस्कुरा देते कोई भी उत्तर नहीं देते थे । कई बार उनके भक्तों ने कहा— महाराज !आपकी आज्ञा हो तो इस दुष्ट को सीधा कर दें।”
महर्षि सदा कहते —“नहीं, वह स्वयं ही सीधा हो जाएगा !”
एक दिन किसी सज्जन ने फलों का एक बहुत बड़ा टोकरा महर्षि के पास भेजा
। महर्षि ने टोकरे से बहुत अच्छे अच्छे फल निकाले और उन्हें एक कपड़े में बांधकर एक व्यक्ति से बोला — “यह फल उस साधू को दूध दे आओ जो साथ वाली कुटिया में रहता है, वही जो प्रतिदिन यहां आकर कृपा करता है!”
उस व्यक्ति ने कहा—“परन्तु वह तो आपको गालियां देता है।”
महर्षि बोले —“हां ,उसी को दे आओ ।”
वह सज्जन लेकर उस साधु के पास गए। जाकर बोले —“साधु बाबा! यह फल स्वामी दयानंद ने आपके लिए दिए हैं ।”
साधु ने दयानंद का नाम सुनते ही कहा —“अरे ! यह प्रातकाल किसका नाम ले लिया तूने? पता नहीं आज भोजन भी मिलेगा या नहीं ।चला जा यहां से ! मेरे लिए नहीं, किसी दूसरे के लिए भेजे होंगे ।मैं तो प्रतिदिन उसे गालियां देता हूं।”
उस व्यक्ति ने महर्षि के पास आकर यही बात कही ।महर्षि बोले — “नहीं , तुम फिर उसके पास जाओ । उसे कहो कि आप प्रतिदिन जो अमृत वर्षा करते हो, उसमें आपकी पर्याप्त शक्ति लगती है। यह फल इसलिए भेजे हैं कि इन्हें खाइए , इनका रस पीजिए , जिससे आपकी शक्ति बनी रहे और आप की अमृत- वर्षा में कमी ना आ जाए।”
उस व्यक्ति ने साधु के पास जाकर वही बात कह दी — “संत जी महाराज ! यह फल स्वामी दयानंद ने आपके लिए ही भेजे हैं और कहा है कि आप प्रतिदिन जो अमृत वर्षा उन पर करते हैं उनमें आपके पर्याप्त शक्ति में होती है ।इन फलों का प्रयोग कीजिए , जिससे आप की शक्ति बनी रहे और अब आप की अमृत वर्षा में न्यूनता ना आए ।”
साधु ने यह सुना तो घड़ों पानी उसके ऊपर पड़ गया। निकला अपनी कुटिया से ,दौड़ता हुआ पहुंचा महा ऋषि के पास । उनके चरणों में गिर पड़ा ,और बोला— महाराज !मुझे क्षमा करो । मैंने आपको मनुष्य समझा था ,आप तो देवता हैं”
यह है सहनशीलता का जादू ! जिसमें यह सहनशीलता उत्पन्न हो जाती है, उसके जीवन की में एक अनोखी मिठास , एक अद्भुत संतोष और एक विचित्र प्रकाश आ जाता है
(सुनीता मेहता)

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