Air India: आ गया है अपने घर “एयर इंडिया”

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टाटा सन्स ने खरीद लिया है एयर इंडिया को सरकार से साढे़ अट्ठारह हज़ार करोड़ रुपये में. अब यह हो गई है पब्लिक लिमिटेड से प्राइवेट लिमिटेड.
आपको बता दें कि एयर इंडिया का टाटा सन्स से रिश्ता पुराना है. जी हाँ ये है उसका मायका जहाँ वो पुन: लौट आई है. वर्ष 1932 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन जे आर डी टाटा ने इस एयर लाईन की स्थापना की थी तब इसका नाम एयर इंडिया नही बल्कि “टाटा एयरलाइंस” था.
अब प्रश्न ये उठता है कि ये एयरलाइन  प्राईवेट से सरकारी कैसे हो गई थी.  इसके पीछे का इतिहास हम बताते हैं आपको.  हुआ यूँ कि द्वितीय  विश्वयुद्ध  के उपरांत  जब फिर से विमान  सेवा शुरू की गई तब  एयर इंडिया  सन 1946,29 जुलाई को Public Limited हो गई.  फिर देश आज़ाद होने के बाद इस एयरलाइन का अधिग्रहण उस समय की सरकार यानी पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने कर लिया.  तब से यह सरकारी एयरलाइन  बन गई.
Air India की अपने घर वापसी हुई है करीब 68 वर्ष के पश्चात. आपको ये भी बता दें कि TATA GROUP की पहले से ही Vistara और Air Asia Airlines में क्रमश: 51 प्रतिशत और 84 प्रतिशत  की हिस्सेदारी  है.  अब Air India को खरीद कर पूरी 100 प्रतिशत उसका हिस्सेदार बन गया . अब टाटा  अकेले ही ये तीनों एयरलाइंस चलायेगा और इस ग्रुप का 25 प्रतिशत  का अधिकारी भी हो गया है.
हम आपको इस संदर्भ  में विभिन्न एयरलाइंस  के मार्केट शेयर की विस्तृत जानकारी  भी दे रहे हैं……
AIR INDIA… 13.3%
INDIGO. …..58%
GO FIRST…. 6.8%
SPICE JET….8.9%
VISTARA… 8.2%
AIR ASIA…. 4.4%
अब सवाल यह भी उठता है कि टाटा सन्स के इस एयरलाइन को टेक ओवर करने के बाद क्या इसकी बदहाल स्थिति में बदलाव आयेगा.? इसकी खस्ता हालत के बारे में हम आपको बताना चाहेगें कि 10 साल में केंद्र सरकार  ने एयर इंडिया  पर क़रीब 1 लाख करोड़ रुपए का खर्च किया है फिर भी कोई सुधार नही आया और हर दिन इस एयरलाइन  का 20-25 करोड़ का नुकसान  हो रहा था.
सरकार ने इसकी बेहतरी पर जितना खर्च किया वह राफेल विमान की डील के खर्चे (69000 हज़ार करोड़)  से दुगुना है.
केंद्र सरकार  द्वारा “उड़ान” योजना के तहत अब करीब सभी एअरलाइंस सुदूर क्षेत्रों में भी पहुँच रही हैं जहाँ हवाई साधन नही थे.  पहले एयर इंडिया बीकानेर, मदुरई आदि जगहों के साथ – साथ सुदूर क्षेत्रों में जाने वाली इकलौती एयरलाइंस  हुआ करती थी पर अब सरकार द्वारा चलाई गई इस स्कीम के तहत सभी कंपनी की विमान सेवाएँ सुदूर इलाकों में उपलब्ध हो गई है.
इस एयरलाइन  की घर वापसी से यह अनुमान लगाया  जा रहा है कि यात्रियों  को पहले से बेहतर सुविधाएं और साफ-सफाई मिलेगी. टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन  टाटा  ने बताया  कि इस कंपनी को फिर से इसके शीर्ष तक पहुँचाने के लिये एड़ी चोटी का ज़ोर लगायेगा.
नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और एयर इंडिया के पूर्व डायरेक्टर जीतेन्द्र भार्गव का दावा है कि अब इस एयरलाइन  की बेहतरी के साथ टैक्स पेयर की आमदनी भारत में इन्फ्यूज़ न होने की संभावना  है. India Originated Traffic जो सिंगापुर एयरलाइंस  जैसी एयरलाइन ले जाती थी अब वो नही होगा और टाटा समूह ही एयर इंडिया  को विकसित  करेगा.
अपने स्वर्णिम-युग में यह एयरलाइन “महाराजा” ब्रैंड  के नाम से पॉपुलर  रही है.  पहले हवाई सफर करना अमीरों की बपौती हुआ करती थी.  परन्तु अब ऐसा नही है.  आजकल विमान सेवा बहुत सस्ती हो गई  है. हर वर्ग इस सुविधा  का उपयोग कर पा रहा है.
एयर इंडिया  के कर्मचारियों को एक वर्ष  रिटेल पर रखा जायेगा और एक साल बाद यदि इनके से किसी पुराने कर्मचारी को रिप्लेस  किया गया तो उसे उचित VIR, PF, Gratuity का अधिकार उपलब्ध कराया  जाये इसका पूरा-पूरा ध्यान  रखा जायेगा.
तो अब देखना ये है कि टाटा सन्स  के सान्निध्य  में एयर इंडिया क्या फिर बन पियेगा “महाराजा की सवारी” जिसका आनंद देश का हर वर्ग उठा पायेगा.

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