श्री हनुमान जी को प्रसन्न करें और पाएं अपनी समस्याओं का समाधान

भगवान श्री राम के परम भक्त श्री हनुमान जी बहुत ही सरल हृदय के देवता हैं और हों भी क्यों न, वे भगवान भोलेनाथ के अवतार जो हैं..

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श्री हनुमान जी को प्रसन्न करना दुष्कर कार्य नहीं है. और उनकी कृपा अर्जित करना आसान इसलिए भी है क्योंकि वे स्वयं श्री शिव शंकर महादेव के अवतार हैं. जैसे भोले बाबा वैसे ही हैं हनुमान जी. जो चाहे मांग लो, यदि प्रसन्न हैं तो सब मिल जाएगा आपको. बस, कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए श्री हनुमान जी की साधना में और उनकी कौन सी साधना आसानी से फलवती होती है – ये भी हम आपको इस लेख में बताएँगे.

श्री राम जी की प्रसन्नता का अर्जन

तीन मार्ग हैं उनकी प्रसन्नता के जिसमे प्रथम मार्ग है भगवान श्री राम की कृपा का अर्जन करना. भगवान श्री राम जिस पर प्रसन्न हों, राम भक्त हनुमान अपनेआप ही उस पर प्रसन्न हो जाते हैं. यही उनकी भक्ति है जो अपने आराध्य श्री राम के प्रति असीम है और अनंत है. इसलिए भगवान श्री राम जी की प्रसन्नता का अर्जन इस तरह आप कर सकते हैं कि आदत डाल लें कि दिन में जब भी आप खाली हों अर्थात मानसिक रूप से व्यस्त न हों, मन ही मन श्री राम जी का नाम लेते रहिये.

निरंतर राम नाम स्मरण 

कहा गया है -राम नाम महा बलशाली! इसलिए भगवान राम की कृपा प्राप्ति हेतु दिन भर मन ही मन राम-राम बोलते रहिये और अपने आपको एक माह का समय दीजिये. एक माह के अनंतर आप पर भगवान श्री राम और श्री हनुमान जी की संयुक्त कृपा होगी और आप का कार्य सिद्ध हो जाएगा. ध्यान रखें, उसके बाद राम नाम स्मरण की अपनी आदत चलाते रहिएगा, छोड़िएगा नहीं!

सुन्दर काण्ड का आश्रय लीजिये

बताने की आवश्यकता नहीं है कि गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस एक महान सनातनी ग्रंथ है जिसका माहात्म्य भगवान श्री कृष्ण की वाणी अर्थात श्री मद्भागवत गीता के समान ही प्रभावशाली बताया गया है. रामचरित मानस के हर दोहे को एक मंत्र माना गया है. ऐसे में इस परम धर्म ग्रंथ के धार्मिक आध्यात्मिक महत्व की कल्पना सहज ही की जासकती है. रामचरित मानस में भी सुन्दर काण्ड वास्तव में सर्वाधिक सुन्दर काण्ड ही है. और श्री हनुमान जी को यह काण्ड परम प्रिय है. माना जाता है कि जब भी सुन्दर कांड का पाठ होता है, श्री हनुमान जी वहाँ साक्षात उपस्थित होते हैं.

मंगलवार या शनिवार हैं महत्वपूर्ण

हर मंगलवार को बिना अंतराल किये आपको सुन्दर काण्ड का पाठ करना है जिसे एक नियत समय पर आप स्नान करके शद्ध वस्त्र धारण करके कर सकते हैं. ग्यारह सुन्दर काण्ड के पाठ के बाद आपको अपनी समस्या का समाधान अपनेआप ही प्राप्त हो जाएगा. किन्तु शर्त फिर वही है कि आपको उसके बाद हर मंगलवार को श्री हनुमान जी की प्रसन्नता हेतु सुन्दर काण्ड का पाठ चलाये रखना होगा.

साधना पूजन कक्ष में करें

सुन्दर काण्ड का पाठ करने के लिए आपको विशेष कुछ भी नहीं चाहिए. अपने पूजन कक्ष में जहां श्री राम जी का चित्र अथवा मूर्ति हो और श्री हनुमान जी की भी मूर्ति या चित्र हो – वहां आप स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करके सरसों के तेल का या चमेली के तेल का दिया जलाएं और सुंदरकांड का पाठ करें जो आप मन ही मन भी कर सकते हैं और बोल कर के भी कर सकते हैं. बोलने का लाभ ये है कि दुसरे भी उसे सुन कर उसके पुण्य का लाभ ले सकेंगे किन्तु बोलने में समय अधिक लगता है और आपको लगभग डेढ़ घंटा का समय लगेगा. किन्तु यदि आप मन ही मन पाठ करते हैं तो एक घंटे में आप पाठ समाप्त कर लेंगे.

हनुमान चालीसा का पाठ

हनुमान जी भोले देवता हैं इसलिए उनके भक्त भी भोले होते हैं. इसी कारण श्री हनुमान जी सरल पूजा जो हर भक्त के लिए सुकर और सरल हो – वे उससे आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं. इस दृष्टि से सबसे सरल और सबसे प्रभावशाली मानी जाती है -हनुमान चालीसा. जो सत बार पाठ कर कोई..छूटहिं बंदि महासुख होई. अर्थात सौ बार पाठ करने से आपकी किसी भी समस्या का समाधान हो जाएगा और आपको परम सुख प्राप्त होगा. इसलिए हनुमान चालीसा दो तरह से आप करके श्री हनुमान जी को प्रसन्न कर सकते हैं – एक तो सौ हनुमान चालीसा के माध्यम से या फिर ग्यारह हनुमान चालीसा के माध्यम से.

दोनो साधनायें हैं फलवती

दोनों ही साधना के उपायों का फल एक ही होगा अर्थात आपको अपने कष्ट से मुक्ति मिलेगी किन्तु यदि आप सौ पाठ का क्रम प्रारम्भ करते हैं तो आपको हफ्ते में सिर्फ एक दिन अर्थात मंगलवार को अथवा शनिवार को एक समय में बैठ कर या दो बार (सुबह शाम) बैठ कर हनुमान चालीसा के सौ पाठ पूर्ण करने होंगे. एक से दो मिनट में एक पाठ हो जाता है यदि आपको पाठ पहले से याद हो या आपने पहले कई बार किया हो. और यदि आप ग्यारह पाठ का क्रम प्रारम्भ करते हैं तो आपको नित्य प्रति ग्यारह पाठ करने होंगे. सुबह या शाम किसी एक समय आपको नियमित तौर पर ग्यारह पाठ करने होंगे और एक माह बाद आप अपनी मंज़िल पा जाएंगे. किन्तु आपको फिर ये पाठ करना बंद नहीं करना होगा.

कार्य-सिद्धि के उपरांत चलाये रखना होगा

यदि हफ्ते में एक बार वाले सौ पाठ आप प्रारम्भ करते हैं तो भी आपको अपने लक्ष्य की प्राप्ति की सफलता के उपरान्त भी पाठ बंद नहीं करना है और कम से कम एक वर्ष तो चलाना ही है. चाहे आप ग्यारह पाठ करें या सौ पाठ – यदि आप उनको चलाये रखते हैं तो ये मान लीजिये कि आप पर सदा ही महाबली हनुमान जी प्रसन्न रहेंगे और वे आपके शत्रुओं के दांत भी खट्टे करते रहेंगे. आप पर आपके शत्रुओं का षड्यंत्र सफल नहीं होगा, आप पर वे तंत्र-मंत्र नहीं कर पाएंगे और आपको हानि पहुंचाने के उनके प्रयास उन पर ही बूमरैंग हो जायेंगे अर्थात उनको ही नुकसान पहुंचा देंगे. इसलिए हनुमान जी की नियमित और आजीवन पूजा में किसी तरह का नुकसान नहीं है, बल्कि फायदे कई हैं – जैसे आप ये समझ लीजिये कि आईजी साहब अर्थात इन्सपेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस आपके बड़े भाई हैं- तब ऐसी स्थित में कोई भी असामाजिक तत्व आप पर हमला करने या आपको नुकसान पहुंचाने की सोच भी नहीं सकता.

सावधानी तीन रखनी होंगी

शराब का सेवन या मांसाहार यदि आप करते हों तो श्री हनुमान जी की साधना कदापि न करें. यदि आपको मुगलों द्वारा सिखाई गई गंदी माँ बहन की गाली देने की आदत हो तो भी आप श्री हनुमान जी की आराधना न करें क्योंकि उलटा नुकसान आपको हो सकता है. भले ही आपके लिए दूसरों की माँ और बहन का कोई महत्व न हो, श्री हनुमान जी के लिए ये महत्व है. भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी माँ सीता को अपनी माँ ही मानते हैं. अतएव, दुनिया की किसी भी माँ को दी गई गाली उनको स्वीकार नहीं है क्योंकि हर माँ में सीता ही बसती है. इसलिए आपको ये दोनों ही गंदी आदतों का सदा के लिए त्याग करना होगा – तभी आप श्री हनुमान जी की पूजा करने के योग्य हो सकते हैं. और यदि इन गंदी आदतों को त्यागे बिना आपने उनकी साधना की, तो आपको भारी दंड मिल सकता है.

विशेष शुद्धता है आवश्यक

स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करके ही श्री हनुमान जी की आराधना करें. बिस्तर पर या सोफे पर या कुर्सी पर बैठ कर कदापि न करें. पूजा के कक्ष में ही भूमि पर बैठ कर करें. यदि आप दिव्यांग हैं तो आप कुर्सी पर बैठ कर भी उनकी पूजा आराधना कर सकते हैं किन्तु बिस्तर पर तब भी न कीजिये. चालीसा या पाठ के पहले कुल्ला अवश्य कर लें तभी पूजा के लिए बैठें. और बहुत ही अच्छा हो कोई एक समय नियत कर लें सुबह या शाम का या रात का – और नियम से नित्यप्रति उसी समय आप अपनी पूजा किया करें.

एक श्लोक से प्रारंभ, एक से अंत

श्री हनुमान जी की पूजा के पहले और पूजा के उपरान्त आपको एक-एक श्लोक अवश्य उच्चारित करना चाहिए. ये दोनों श्लोक हनुमान जी की स्तुति के श्लोक हैं. इनमे से कोई भी आप पूजा प्रारंभ करते समय और दूसरा पूजा समाप्त करते समय बोल सकते हैं या मन ही मन इन श्लोकों का स्मरण कर सकते हैं. यहां नीचे दोनों श्लोक प्रस्तुत हैं:
मनोजवं मारुत तुल्य वेगम
जितेंद्रियम बुद्धि मताम वरिष्ठम
वातात्मजं वानर यूथ मुख्यम
श्री राम दूतं शरणम प्रपद्ये !
अतुलित बलधामं हेम शैलाभ देहम
दनुज वन कृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌
सकल गुणानिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियं भक्तं वातजातं नमामि !

 

परख की कलम से: महानायक हैं श्री राम हर युग के, हर शताब्दी के !!

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