Jai Shri Ram: लगाइये राम नाम का तड़का हर काम में!

और फिर उसके बाद देखिये उसका स्वाद अर्थात उसका परिणाम शायद उससे बहुत बेहतर होगा जो आप बिना तड़के के अर्जित कर पाते..

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राम हैं विश्वनायक, राम हैं ब्रम्ह और राम ही हैं परब्रम्ह. जो लोग राम जी को मानते हैं ये तथ्य उनके लिये भी सत्य है, और जो नही मानते उनके लिये भी सच यही है कि राम ही हैं परमेश्वर. आप उन्हें मानें या न मानें या फिर चाहे जिस नाम से पुकारें. राम जी की तरह ही उनके नाम की महिमा भी अपार है. और ये बात भी सबको नहीं पता क्योंकि जानने और मानने में अन्तर है.
हो सकता है सब जानते हों कि राम नाम की महिमा अपार है किन्तु सब यही मानते हों यह संभव नहीं. यदि सभी मान लेते तो यह विश्व स्वर्ग सा सुन्दर हो जाता और हर तरफ राम नाम संकीर्तन चल रहा होता और हर तरफ लोग सर्वश्रेष्ठ आन्ंद का रसपान कर रहे होते और राम नाम के गान के आध्यात्मिक आनंद में नर्तन चल रहा होता दुनिया का. परंतु ऐसा न हो सका.. और चाहे कोई अमीर हो या गरीब -आज इस दुनिया में सभी हाय हाय कर रहे हैं. सभी दुखी दिखाई देते हैं. इस दुनिया में सबका दुख अलग-अलग तरह का है जिसका कारण बस यही है कि सभी भौतिकवाद में डूबे हुए हैं और जीवन के वास्तविक मर्म को समझाने वाले आध्यात्मिक भाव को समझने से वंचित हैं.
यह आध्यात्मिक भाव ईश कृपा से प्राप्त होता है और सत्कर्मों का परिणाम होता है-ये सत्कर्म चाहे इस जनम के हों या पिछले जनम के. ये सत्कर्म आपको आस्तिक बनाते हैं और आस्तिक बनते हैं तो आप राम जी की शरण में जाते हैं और जीवन में सत्कर्म करते हैं. आप किसी भी देवी देवता को पूजते हों या कोई भी देवी देवता आपका आराध्य हो -होते आप सदा राम जी की शरण में ही हैं. राम जी ही ब्रम्ह हैं जो हर देवी देवता के रूप में आपके सम्मुख विराजमान हैं.
तदापि परब्रम्ह का राम जी वाला स्वरूप सर्वाधिक प्रभावशाली है. राम की महिमा की भांति उनके नाम की भी महिमा अपरंपार है. आप इस तथ्य पर एक बार विश्वास करके देखिये – विश्वास ही आस्था है और मूल रूप से वही आस्तिकता है. राम जी की शरण में आप स्वयं को रखें न रखें -होते आप उनकी ही शरण में हैं -चाहे जिस रूप में वे आपको शरण प्रदान कर रहे हों.
इसलिये कभी जब आप किसी समस्य़ा में फंस जायें या कोई परेशानी आपका जीना मुहाल कर दे तो ऐसे समय में समझ लीजिये कि अवसर प्राप्त हुआ है आपको कि इस परेशानी के माध्यम से आप स्वयं को राम जी की शरण में अर्पित कर दें. राम नाम जपें और राम जी से कातर हृदय से प्रार्थना करें -फिर देखिये आपका काम होता है या नहीं !
इसलिये इस लेख के माध्यम से आपको प्रेरित करने के प्रयोजन से हम कहना चाहेंगे कि आप जब भी कोई काम करें या कोई काम शुरू करें तो राम जी के नाम से शुरू करें. इसी को हमने कहा कि राम जी के नाम का तड़का हर काम में लगाइये. काम करते जाइये और राम नाम भी करते जाइये अपने मन में. कुछ समय बाद दो चीजें आपको स्वतः ही स्पष्ट हो जायेंगी – एक ये कि आपका काम बहुत सुन्दर होगा और दूसरा ये कि आपको धीरे धीरे राम जी से प्रेम होता जायेगा.
प्रेम को ही अध्यात्ममार्गियों के बीच में भक्ति कह कर पुकारा जाता है. प्रेम और भक्ति दोनो में समर्पण है दोनो का चरम लक्ष्य मिलन ही है जिसे अध्यात्ममार्गियो में योग कह कर पुकारा गया है. योग का अर्थ जुड़ना है और यही जुड़ना देह से हो या भाव से -यही मिलन है और यही योग है. राम जी का नाम जपने से धीरे धीरे आपको उनसे इतना प्रेम होता जायेगा कि उस भाव के आनंद को आप ही स्वयं जान सकेंगे. और तब आपको लगेगा जीवन कितना सुन्दर है और जीवन आपका निस्सार नहीं जा रहा है.
राम जी का नाम कभी भी आप जप सकते हैं और कहीं भी जप सकते हैं -किसी भी स्थिति में जप सकते हैं. राम नाम जपने के लिये शुद्धता कोई शर्त नहीं है अर्थात इसके लिये आपका शुद्ध होना या शुद्ध वस्त्र पहनना आवश्यक नहीं है. यह तो अध्यात्म जगत की गंगा है जो खुद आपको शुद्ध करती है तो इसके लिये आपको शुद्ध होने की कोई आवश्यकता नहीं है. राम नाम आपको तन से भी शुद्ध करता है और मन से भी. किसी भी पवित्र कार्य करते समय यदि आपको शुद्धीकरण का मन्त्र पता न हो या आपको लगे कि आप अशुद्ध हैं तो आप मन में या बोल कर दो बार राम राम कह दीजिये आपका तन ही नहीं मन भी शुद्ध हो जायेगा. राम नाम के लिये कहा जा सकता है -प्रभु अनंत प्रभुकृपा अनंता..

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