परख की कलम से: उड़ीसा का हिन्दूवादी दारा सिंह एक भूली कहानी बना दिया गया

यदि दारा सिंह ने धर्म रक्षा हेतु अपराध कर डाला तो उसे मोहरा बनाके राजनीति करने वालों ने उसका लाभ उठाके उसके साथ जो घात किया -क्या वह उचित है?..

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उड़ीसा को ईसाई प्रदेश बनने से बचाने वाला व्यक्ति आज जेल में है और इतना लाचार है कि अपने माता पिता की अंत्येष्टि नही कर सका।
बड़ी बात यह है कि इन सबका कारण सिर्फ बीजेपी जैसी हिंदूवादी पार्टी और वाजपेयी आडवाणी जैसे नेता है।
बात 1999 की है जब ग्राहम स्टेन्स नाम के मिशनरी का उड़ीसा में वर्चस्व बढ़ रहा था वह बाइबिल पढ़कर बड़े से बड़ा रोग दूर करने के लिये विख्यात था। इस बहाने गाँव के गाँव ईसाई बहुल होते जा रहे थे, इस बीच बजरंग दल के नेता दारा सिंह ने उसकी चुनौती स्वीकार की।
दारा सिंह ने आदिवासियों को अपनी ओर किया और मिशनरीज को विफल करना शुरू किया लेकिन ग्राहम ने भी हार नही मानी। अंततः दारा सिंह को हिंसा का सहारा लेना पड़ा, 23 जनवरी 1999 को जब ग्राहम अपने दो बच्चों के साथ कार में सफर कर रहे थे उस समय दारा सिंह की अगुवाई में भीड़ ने उन्हें घेर लिया और बच्चों समेत जला दिया।
यह हत्या इतनी भयानक थी कि इससे सारे मिशनरीज उड़ीसा छोड़कर भागने लगे। अमेरिका और इंग्लैंड में बैठे चर्च के आकाओ ने इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाया और वाजपेयी जी की पगड़ी उछाली। यह वाजपेयी जी के गठबंधन का दौर था ऊपर से नोबल पुरस्कार पाने की उनकी इच्छा अलग।
दारा सिंह को पुलिस ढूंढने में लगी, 1 साल तक वह किसी के हाथ नही आया मगर बीजेपी ने उसे समझाया कि वह धर्म के हित मे आत्मसमर्पण कर दे और बाद में बीजेपी उसे बचा लेगी। दारा सिंह सीधा बातो में आ गया और गिरफ्तार होकर उसने बयान दे दिया कि यह सब बजरंग दल या बीजेपी ने नही उसने खुद किया है। मीडिया शांत हो गया, अंतरराष्ट्रीय दबाव भी हट गया।
इस तरह वाजपेयी जी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच गए, 2003 में दारा सिंह के पिता का स्वर्गवास हुआ उसने आडवाणी और नवीन पटनायक को पत्र लिखकर छुट्टी मांगी मगर नही मिली। बात साफ थी बीजेपी अब पलट चुकी थी, दारा सिंह को उम्रकैद हुई और आज तक वह जेल में अपना सिर फोड़ रहा है।
इस बीच उसकी माँ की मृत्यु हुई तब भी छुट्टी नहीं दी गयी। आज केंद्र में फिर हिंदूवादी पार्टी है और उड़ीसा में सेक्युलर हालांकि कुछ दिनों से नवीन पटनायक को भी हिंदुत्व की खुजली मची है लेकिन दारा सिंह की सुध किसी ने नही ली। वही 2004 में जब कांग्रेस वापस लौटी तो उसने सारे मिशनरीज को फिर से स्थापित करवा दिया जो कि ग्राहम कांड के बाद भाग गए थे।
दारा सिंह ने जो नृशंस हत्या की उसका समर्थन तो हम भी नही करते यह अमानवीय था लेकिन उड़ीसा को बचाना उससे भी अधिक जरूरी था। दारा सिंह ने जेल चुनकर उड़ीसा को बचाया, आज हिंदूवादियों की सभा मे दारा सिंह का नाम कभी नही लिया जाता इसका एक कारण यह भी है कि उसके कारण हम उड़ीसा संकट जैसी कोई चीज कभी नही देख सके।
लेकिन बीजेपी और बीजेडी का यह रवैया बड़ा निराशाजनक है।
सभी लोग ट्विटर के माध्यम से नवीन पटनायक पर प्रेशर बनाये। मगर उस अपराध को जस्टिफाई ना करे, 13 लोगो की हत्या करने वाली फूलन देवी जब आज़ाद हो सकती हैं, हजारो को मारने वाला कासिम रिजवी रिहा हो सकता है तो तीन लोगों का हत्यारा दारा सिंह 20 साल जेल काटने के बाद क्यो रिहा नहीं हो सकता?
20 सालो से कोई धर्मवीर जेल मे अपनी मौत की कामना कर रहा है और हम खुश है कि देश मे हिंदूवादी सरकार है। किसी भी धर्म का इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है?
विशेषार्थ – फेसबुक पर मेंरे एक मित्र है जिन्होंने मुंबई यात्रा के समय मुझसे भेंट की थी उन्होंने दारा सिंह के परिवार की आपात काल मे बड़ी सहायता की है। मैं उनका नाम सामने लाना चाहता था मगर वे इस आडंबर और पब्लिसिटी के विरुद्ध है। ऐसे जन गण भी इस देश की अमूल्य धरोहर है जो धरातल पर काम कर रहे है बिना किसी लोभ के।
(परख सक्सेना)

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